बलौदाबाजार जिले में केंद्र सरकार द्वारा संदिग्ध बीपीएल राशन कार्ड धारकों की सूची जारी होने से हड़कंप मच गया है। इस सूची में 1,31,794 ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिनके पास केंद्र सरकार के मापदंडों के अनुसार ढाई एकड़ (2.47 एकड़) से अधिक जमीन है। सूची जारी होने के बाद से ही हितग्राही अपना नाम और जमीन का विवरण जांचने के लिए नगर पंचायत कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। यह सूची पलारी नगर सहित पूरे जिले में जारी की गई है। केंद्र सरकार ने उन कार्ड धारकों को संदिग्ध माना है, जिनके पास निर्धारित सीमा से अधिक कृषि भूमि है। सूची जारी होने के बाद से ही सैकड़ों की संख्या में लोग अपने नाम की पुष्टि के लिए संबंधित कार्यालयों में पहुंच रहे हैं। नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे हितग्राहियों के चेहरों पर चिंता साफ दिखाई दे रही है। उन्हें डर है कि यदि उनका राशन कार्ड निरस्त हो गया, तो उनके परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। हितग्राहियों ने जताई चिंता सूची की मुनादी होते ही लोग यह जानने के लिए नगर पंचायत पहुंच गए कि उनका नाम इस ‘संदिग्ध सूची’ में तो नहीं है। हितग्राहियों ने अपनी स्थिति अधिकारियों के सामने रखी। तीजबती यादव, रेखा यादव, संतोषी और पदेशनिन जैसे कई लोगों ने कहा, “हम वास्तविक गरीब हैं। हमारे पास न जमीन है और न ही पैसा। हम सिर्फ यह जानने आए हैं कि हमारा नाम इस सूची में तो नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो हमारे परिवार का पेट कैसे भरेगा?” अन्य हितग्राहियों ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त की। केंद्र और राज्य के मापदंडों में अंतर इस पूरे मामले की जड़ केंद्र और राज्य सरकार की गरीबी रेखा के अलग-अलग मापदंड हैं। जहां केंद्र सरकार ने ढाई एकड़ से अधिक जमीन वाले परिवारों को संदिग्ध माना है, वहीं राज्य सरकार के अपने पात्रता मानदंड हैं। जिला खाद्य अधिकारी पुनीत राम वर्मा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, “केंद्र सरकार के निर्देश पर ही यह सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में कुल 1,31,794 लोगों को ऐसा पाया गया है, जिनके पास 2.47 एकड़ से अधिक जमीन है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि राज्य सरकार की गरीबी रेखा का मापदंड अलग है। क्या है पूरी प्रक्रिया? शासन द्वारा राशन कार्ड में दर्ज सभी नामों का सत्यापन कराया जा रहा है, जिसमें यह देखा जाएगा कि प्रत्येक हितग्राही के नाम पर कितनी जमीन दर्ज है। इसके लिए पटवारियों से जमीन का सत्यापन कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। संदिग्ध हितग्राहियों की सूची को पारदर्शी बनाने के लिए इसे ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों और राशन दुकानों पर भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि लोग अपना ब्यौरा स्वयं जांच सकें। फिलहाल, यह सत्यापन अभियान जारी है और अंतिम निर्णय के पहले हितग्राहियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य लाभार्थियों की वास्तविक पहचान करना और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाना बताया जा रहा है।


