जोधपुर की सफाई व्यवस्था पर फिर दिखी हाईकोर्ट की नाराजगी:निगम से मांगा पुख्ता प्लान, कहा- उपाय नाकाफी, फोकस्ड-इफेक्टिव अप्रोच की जरुरत

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर की सफाई व्यवस्था पर फिर नाराजगी जताते हुए कहा है कि नगर निगम द्वारा उठाए गए कदम अपर्याप्त हैं। इसमें और अधिक प्रभावी दृष्टिकोण की जरुरत है। जस्टिस विनित कुमार माथुर और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने मंगलवार को महेश गहलोत की याचिका पर सुनवाई करते हुए निगम को पुख्ता प्लान बनाने का आदेश दिया। कोर्ट ने सरकार की ओर से मांगे गए समय की अनुमति दे दी है। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय की गई है। तब तक नगर निगम को विस्तृत शपथपत्र और प्रभावी कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी। दरअसल, यह मामला 2021 से चल रहा है, जब महेश गहलोत ने अपने वकील के माध्यम से जोधपुर शहर की खराब सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को लेकर याचिका दायर की थी। पिछली सुनवाइयों में हाईकोर्ट ने बार-बार नगर निगम को फटकार लगाई है और शहर की स्वच्छता को “अत्यंत दयनीय” और “भयावह” बताया था। विशेष रूप से अनासागर बांध में मलबे और कचरे के ढेर को नगर निगम की उदासीनता का प्रमाण बताया गया था। नगर निगम ने दी अनुपालन रिपोर्ट अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अदालत के निर्देशों की अनुसरण में एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम ने जोधपुर शहर की सफाई के लिए मैन-पॉवर की तैनाती का उल्लेख किया है। जोधपुर शहर से कचरा हटाने के लिए उपयोग किए जाने वाले मापदंडों के बारे में अन्य विवरण भी दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों द्वारा जोधपुर शहर की सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के लिए किए गए उपाय पर्याप्त नहीं हैं और इसके लिए अधिक केंद्रित और प्रभावी दृष्टिकोण की जरुरत है। सरकार ने मांगा समय, कहा- शपथ पत्र दाखिल करेंगे अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि वह जोधपुर शहर की सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के लिए अधिक प्रभावी उपाय करने के संबंध में एक विस्तृत शपथपत्र दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि मलबा हटाने के लिए उपयोग की जाने वाली मशीनरी/वाहनों (ट्रक और टेम्पो) की संख्या के बारे में विवरण भी रिकॉर्ड पर रखा जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि कचरा डंपिंग केंद्रों की पहचान की जाएगी और संबंधित क्षेत्र में बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए उन्हें बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जाएगा। इस काम के लिए कुछ समय दिया जाए। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाइयों में भी लगाई थी फटकार अगस्त 2025 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर हलफनामा नहीं दिया गया तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा। सितंबर 2025 की सुनवाई में कोर्ट ने नगर निगम को एक सप्ताह के भीतर ठोस कचरे और निर्माण मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण का व्यावहारिक प्लान पेश करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने विस्तृत योजना में निम्नलिखित बिंदु शामिल करने को कहा था- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का वैज्ञानिक ढांचा, निर्माण मलबे का सुरक्षित निस्तारण, कर्मचारियों की संख्या और उनके कार्य की स्थिति, कचरा उठाने से लेकर नष्ट करने तक की विस्तृत कार्ययोजना और समयसीमा के साथ जिम्मेदारियों का बंटवारा।

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