टोंक में डिग्गी कल्याण महाराज को ओढ़ाई रजाई:दूध, खिचड़ा, हलवा, बाजरे का चूरमा का लगा रहे भोग

सर्दी बढ़ने के साथ ही लोगों की ही नहीं, अब मंदिरों में विराजमान भगवानों का पहनावा और खान-पान बदल गया है। देश के बड़े मंदिरों में शुमार टोंक जिले की मालपुरा तहसील क्षेत्र के डिग्गी कस्बे के डिग्गी कल्याण महाराज को भी रजाई ओढ़ा दी है।
उनके खान-पान (भोग) में भी अब सर्दी के हिसाब से बदलाव कर दिया है। अब उन्हे भी लोगों की तरह गर्म खाद्य सामग्री भोग के रूप में परोसी जा रही है। श्रीजी को दूध, खिचड़ा, हलवा, बाजरे के चूरमा का भोग लगाया जा रहा हैं। मंदिर में अंगीठी जलाई जा रही है। मंदिर पुजारी विजय नारायण शर्मा (जोनी) ने बताया कि एक-दो दिन से सर्दी बढ़ गई है। ऐसे में भगवान को भी सर्दी ना लगे, इसके लिए उनके गर्म दूध, मेवा व हलवे का भोग लगाया जा रहा है। इसके अलावा सर्दी से बचाव के लिए सुबह-शाम मंदिर में अंगीठी जलाई जा रही है।
कल्याण जी महाराज को ऊनी बगलबंदी और पैरों में मोजे, पजामा के साथ शयन में रजाई ओढ़ाई जा रही है। शरद पूर्णिमा से लेकर अक्षय तृतीया तक सर्दी की पोशाक धारण करवाई जाती है। इसमें करीब 40 मीटर कपड़े का प्रयोग किया जाता है। पुजारी ने बताया कि 3 दिन से भगवान को सर्दी की ड्रेस पहनाई है । पुष्प से भगवान श्री कल्याण जी महाराज को सर्दी ना लग जाए, इसके चलते भगवान को पुष्प का चढ़ावा भी बंद कर दिया हैं। पुजारी लेखराज शर्मा के मुताबिक सर्दी के मौसम में श्री कल्याण जी महाराज को रोज-रोज अलग ड्रेस पहनाया जाता है। ये पोशाक दिन के हिसाब से शुभ रंगों में बनवाई गईं हैं। जो खास दिनों में पहनाई जाती है।
श्री कल्याण जी महाराज रजाई ओढ़कर इन दिनों अपने भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। श्री कल्याण जी महाराज के इस रूप के दर्शन करने के लिए डिग्गी कस्बा ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। साथ ही भगवान से अपनी मुरादें मांग कर खुशी खुशी वापस जाते हैं श्रद्धालुओं का कहना है कि श्री जी मंदिर में भगवान से जो भी मांगा जाता है वह पूरा होता है। इनपुट: दीपांशु पाराशर, डिग्गी।

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