दौसा जिले के गांव-ढाणियों में बेसहारा पशु किसानों की फसलों को चौपट कर रहे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड रहा है, लेकिन प्रशासन का इस ओर कतई भी ध्यान नहीं है। जिले के सिकराय क्षेत्र के किसान नीलगाय और बेसहारा गोवंश द्वारा फसलों में किए जा रहे नुकसान से बेतहाशा परेशान हैं। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में सड़क पर घूमने वाले बेसहारा मवेशी एक ओर दुर्घटनाओं का कारण बने हुए हैं तो वहीं दूसरी ओर खेतों में घुसकर किसानों की फसल चौपट कर रहे हैं। बेसहारा आवारा गोवंश एवं नीलगाय द्वारा फसलों को चौपट करने से किसान परेशान हो चुके हैं। अपने खेतों को बचाने के लिए किसानों ने खेतों के किनारों पर लोहे के तार लगा दिए हैं, लेकिन खुले में घूम रहे जानवर उन्हें भी तोड़कर खेतों में घुस जाते हैं और फसल को चौपट कर देते हैं। सिकराय निवासी अमित मीना ने बताया कि लोग गोवंश का दूध निकालने के बाद उन्हें खुला छोड़ देते हैं। इस वक्त सैकड़ों की संख्या में गाय, सांड, बछड़े खुले घूम रहे हैं। नीलगाय के झुण्ड के झुण्ड खेतों में खुले घूमते हैं। जो आए दिन लोगों के खेतों में घुसकर फसल चट कर रहे हैं। किसानों के लिए सर्दी की रात में फसल को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। खेतों पर अस्थाई झोपड़ी बनाकर रात-दिन खेतों पर रहकर फसल का ध्यान रखना पड़ता है। किसान मुरारी प्रजापत ने बताया कि इस वक्त गेहूं व सरसों की फसलों को बचाने के लिए परिवार का एक सदस्य हमेशा खेतों पर रहकर फसलों की रखवाली करने में जुटे हैं। सर्दी के मौसम मे खेतों में फसलों के लिए ग्रहण बन चुके बेसहारा पशुओं के आतंक ने किसानों का सुख चैन छीन लिया है। फसलों को सुरक्षित रखना मुश्किल होता जा रहा है। सरकार ने की थी नंदीशाला खोलने की घोषणा जबकि पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने बजट घोषणा में प्रत्येक पंचायत समिति क्षेत्र में एक नंदीशाला खोलने की घोषणा की थी। जिससे बेसहारा घूमने वाले पशुओं को उसमें रखकर किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही पशुओं के कारण होने वाले हादसों पर अंकुश लग सके। लेकिन घोषणा के दो साल बाद भी नंदीशाला खोलने को लेकर कोई कवायद तक नहीं हुई है।


