अरपा सड़क निर्माण पर कांग्रेस ने उठाए सवाल:जर्जर सड़कों के लिए डिप्टी सीएम, केंद्रीय मंत्री को जिम्मेदार बताया; कल होगा धरना

बिलासपुर जिले में सड़कों की खस्ताहाल स्थिति के बीच अरपा नदी के किनारे 100 करोड़ रुपये की लागत से बन रही सड़क पर सवाल उठने लगे हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने आज एक पत्रकार वार्ता में जिले भर की जर्जर सड़कों के लिए उपमुख्यमंत्री एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और सत्तारूढ़ दल के विधायकों को जिम्मेदार ठहराया। केशरवानी ने सवाल उठाया कि नदी किनारे 100 करोड़ रुपये की लागत से यह सड़क किसके लिए बनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से छिपाकर यह परियोजना किसके लाभ के लिए और किस दबाव में तैयार की गई है, इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। अरपा नदी किनारे 80 फीट चौड़ी सड़क अधूरी उन्होंने आगे कहा कि अरपा नदी के दोनों किनारों पर 80 फीट चौड़ी यह सड़क नए कमिश्नर ऑफिस के पीछे कोनी और शिव घाट बैराज से मंगला तक बनाई जा रही है, लेकिन यह आगे जाकर निजी भूमि पर समाप्त हो जाती है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि इस सड़क का निर्माण किसे लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, जबकि आगे कोई रास्ता ही नहीं बचेगा। केशरवानी ने शासन-प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि शहर के उन इलाकों में जहां वास्तविक आबादी रहती है, वहां की टूटी सड़कों की मरम्मत छोड़कर करोड़ों रुपये सुनसान क्षेत्र में खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सड़क जनता के लिए नहीं, बल्कि किसी “विशेष लाभार्थी” के लिए तैयार की गई है। शनिवार को कांग्रेस का मोपका रोड धरना प्रदर्शन कांग्रेस ने जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जर्जर सड़कों के सुधार की मांग को लेकर शनिवार को दोपहर 1 बजे मोपका रोड पर धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पत्रकार वार्ता में राजेंद्र साहू, ऋषि पांडे, झगरराम सूर्यवंशी, विनोद साहू, अनिल यादव, मोहन श्रीवास, सुनील सोनकर और साखन दर्वे सहित अन्य कांग्रेस नेता उपस्थित थे। स्मार्ट सिटी के नाम पर भ्रष्टाचार जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि स्मार्ट सिटी योजना के नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस जगह सड़क बनाई जा रही है, वह क्षेत्र स्मार्ट सिटी की सीमा में भी नहीं आता। उन्होंने सवाल उठाया कि इस सड़क निर्माण की डीपीआर सार्वजनिक नहीं की गई, न कोई जनसुनवाई हुई, न पर्यावरणीय अनुमति दिखाई गई और न ही नदी के संवेदनशील तट से जुड़े नियमों का पालन हुआ। अधूरी सड़क ने बिगाड़ा संतुलन केशरवानी ने बताया कि कांग्रेस का मानना है कि अरपा नदी को बचाने और विकसित करने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने शिवघाट और पचरीघाट के बीच तट-सड़क, तट संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन क्षेत्र जैसी योजनाएँ बनाई थीं। लेकिन वर्तमान प्रोजेक्ट में इन योजनाओं को नजरअंदाज कर सिर्फ एक महंगी, अधूरी और बिना उद्देश्य की सड़क तैयार कर दी गई।

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