छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाओं को रोकने के लिए एकदिवसीय जन जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यक्रम धरमजयगढ़ काष्ठागार में हुआ। कार्यशाला में प्रशिक्षकों ने लोगों को सर्पदंश से कैसे बचें, इलाके में मिलने वाले अलग-अलग जहरीले सांपों की पहचान कैसे करें, सांपों को सुरक्षित तरीके से कैसे रेस्क्यू किया जाए और उनका संरक्षण क्यों जरूरी है, इन सभी बातों के बारे में जानकारी दी। धरमजयगढ़ में सर्पदंश से बचाव पर जागरूकता कार्यशाला प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह था कि लोगों को सर्पदंश के बाद होने वाले इलाज, सावधानियों और सांपों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाए। ताकि सांप के काटने से होने वाली अकाल मौतों को कम किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान वनमंडलाधिकारी धरमजयगढ़ जितेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि क्षेत्र में सांप के काटने की घटनाओं को कैसे कम किया जा सकता है और इसके लिए लोग क्या-क्या सावधानियां अपनाएं। एम. सुरज नोवा नेचर वेलफेयर टीम ने यहां पाए जाने वाले सांपों की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी दी और बताया कि सांपों के काटने से बचने के क्या उपाय हैं। स्वास्थ्य विभाग के डॉ. शर्मा ने सर्पदंश के बाद इलाज और मेडिकल प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाया। मितानिन सुकवारा साहू ने भी अपने अनुभव साझा किए और स्थानीय स्तर पर सर्पदंश से बचने के तरीकों की जानकारी दी। मितानिन सुकवारा साहू लंबे समय से सांपों के बारे में जागरूकता फैला रही हैं। वीडियो और प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी जानकारी प्रशिक्षण के दौरान लोगों को सांपों की जानकारी देने के लिए वीडियो और प्रेजेंटेशन का भी इस्तेमाल किया गया। साथ ही, लोगों के बीच सांपों के बारे में एक प्रश्न-उत्तर सत्र का आयोजन भी किया गया। इसमें मनोरंजक तरीके से और आसान भाषा में सांपों के बारे में जानकारी दी गई। धरमजयगढ़ वनमंडल के अधिकारी ने बताया कि सर्पदंश की घटनाओं के प्रति संवेदनशील है और लगातार सांपों के संरक्षण के लिए काम कर रहा है।


