राज्य महिला आयोग में नोटिस की तामिली के लिए पुलिस अधीक्षकों को लिखी जा रही चिट्ठी से नया विवाद खड़ा हो गया है। अलग अलग प्रकरणों में आला अफसरों को आयोग में सुनवाई के लिए बुलाने पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखा जा रहा है। ज्यादातर चिट्ठी अध्यक्ष किरणमयी नायक लिखी है। आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा सहित अन्य दो सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग सचिव को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि चिट्ठी आयोग के सचिव के माध्यम से लिखी जानी चाहिए। अध्यक्ष को इसका अधिकार नहीं है। उन्होंने विभाग के सचिव से आग्रह किया गया है कि वे पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर निर्देश दें कि केवल आयोग के सचिव का पत्र आने पर ही नोटिस तामिली के लिए अफसरों को नोटिस भेजे। ये कार्यालयीन प्रक्रिया का उल्लंघन: लक्ष्मी वर्मा
राज्य महिला आयोग की सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि अध्यक्ष पुलिस अधीक्षकों को सीधे पत्र नहीं लिख सकती हैं। ये कार्यालीन प्रक्रिया का उल्लंघन है। उन्होंने कहा है कि आयोग का कार्य संचालन आयोग के अधिनियम और कानूनी प्रक्रिया के तहत नहीं किया जा रहा है। यहां स्वेच्छाचारिता से काम हो रहा है। अध्यक्ष अपने पद का दुरुपयोग कर रही हैं। कानून का ज्ञान नहीं, ये शर्मनाक: किरणमयी
आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक का कहना है कि ये अजीबोगरीब तर्क है। उन्हें कानून और अध्यक्ष की शक्तियों का ज्ञान ही नहीं है। ये शर्मनाक है। उन्हें महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए नियुक्त किया गया है या अफसरों को बचाने के लिए। आयोग में अगर सचिव नहीं होंगे या किसी दूसरे कार्य में व्यस्त रहेंगे तो क्या आयोग पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं दिलाएगा। महिला आयोग एकमात्र ऐसा विभाग है जो किसी भी अधिकारी को पत्र लिखकर बुला सकता है। ये कानूनी तर्क भी दिया सदस्य ने आयोग सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने आयोग की अधिनियम धारा 5 तथा राज्य महिला आयोग प्रक्रिया विनिमय 1998 की कंडिका 13 में का उल्लेख करते हुए बताया है कि उसमें स्पष्ट किया गया है कि राज्य आयोग के आदेश तथा पत्र सचिव द्वारा या राज्य आयोग के ऐसे अधिकारी द्वारा जो अवर सचिव के पद से निम्न श्रेणी का न हो, उन्हीं के माध्यम से प्रमाणित किए जाएंगे। निगम अफसरों को बुलाने लिखा पत्र
महिला आयोग में शुक्रवार को गुढ़ियारी की पीड़ित महिला के प्रकरण की सुनवाई के बाद आयोग अध्यक्ष किरणमयी नायक ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है कि वे निगम अफसरों को नोटिस तामिल करवाएं ताकि उनके समक्ष महिला के पक्ष को रखा जा सके। प्रकरण के अनुसार महिला ने आयोग में बताया कि निगम आयुक्त व उपायुक्त ने उनकी मां को बीएसयूपी मकान के लिए 9 साल बाद 3 हजार लिए थे। इस दौरान उनका मकान भी तोड़ दिया। लेकिन अब तक मकान नहीं दिलाया। महिला का पक्ष सुनने के बाद ही निगम अफसरों को बुलाने एसपी रायपुर के माध्यम से नोटिस भेजने के निर्देश दिए गए हैं।


