हिमाचल के गवर्नर शिव प्रताप शुक्ल ने पंचायत चुनाव को लेकर मंत्री और अधिकारियों की अलग-अलग बयानबाजी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा- मंत्री बार-बार कह रहे हैं कि समय पर चुनाव होगा। मंत्रियों के अधीन काम करने वाले 7 डीसी ने रिपोर्ट दी है कि वर्तमान परिस्थिति में हम चुनाव की तैयारी नहीं कर पाए हैं। दोनों बाते नहीं होगी। राज्यपाल ने कहा- दोनों को मिलजुल कर बात करनी चाहिए। मंत्री बड़ा है या अधिकारी बड़ा है, इसकी समीक्षा करें। उन्होंने कहा- पंचायत चुनाव कराना राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन के बीच का विषय है। समय पर पंचायत चुनाव कराना संवैधानिक व्यवस्था है। यदि समय पर चुनाव न हो तो पूरे राज्य में अस्थिरता हो जाएगी। राज्यपाल ने कहा- स्टेट इलेक्शन कमिश्नर अनिल खाची ने आज उनसे राजभवन में मुलाकात की है। उन्होंने बंद लिफाफे में चुनाव से जुड़ी रिपोर्ट दी है। वह अब इसका अध्ययन करेंगे। इससे पहले, इलेक्शन कमिश्नर ने राजभवन में गवर्नर से भेंट कर कमीशन की पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियों से अवगत कराया। राज्यपाल को बताया कि प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव 31 जनवरी से पहले करवाए जाने है। यह संवैधानिक बाध्यता है। इलेक्शन कमीशन ने इसके लिए वोटर लिस्ट तैयार कर दी है। 3 करोड़ बैलेट पेपर छपवाए जा चुके हैं। कमीशन की तरफ से सभी तैयारियां पूरी कर दी गई है। मगर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीसी ने कमीशन के कुछ ऑर्डर की अनुपालना नहीं की। आरक्षण रोस्टर का अभी इंतजार किया जा रहा है। दो-तीन महीने के घटनाक्रम की जानकारी दी इस दौरान, अनिल खाची ने बीते दो-तीन महीने के पंचायत चुनाव से जुड़े पूरे घटनाक्रम की राज्यपाल को जानकारी दी, क्योंकि राज्यपाल संवैधानिक मुखिया है। पंचायत चुनाव के लिए इलेक्शन कमीशन के साथ साथ प्रदेश सरकार का सहयोग भी जरूरी है। लेकिन राज्य सरकार आपदा से हालात सामान्य होने के बाद चुनाव की बात कह रही है। राज्य में अभी डिजास्टर एक्ट लागू होने का हवाला दिया जा रहा है। गवर्नर-कमिश्नर की मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया राज्यपाल और इलेक्शन कमिश्नर के बीच इस मुलाकात से दो दिन पहले तक माना जा रहा था, अनिल खाची गवर्नर से सरकार की चुनाव टालने की मंशा पर सवाल खड़े करेंगे। मगर सरकार के तेवर भी अब नरम पड़ने लगे है। बीते गुरुवार को राज्य के मुख्य सचिव और सेक्रेटरी पंचायतीराज ने बारी बारी इलेक्शन कमिश्नर अनिल खाची से मुलाकात की। उन्होंने सरकार के चुनाव टालने की वजह से कमिश्नर को अवगत कराया। यही अधिकारी कुछ दिन पहले कमीशन द्वारा मीटिंग के लिए बुलाने के बाद भी नहीं आए थे। मगर जब कमीशन ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के क्लॉज 12.1 लगाकर पंचायतों और नगर निकायों की सीमाएं फ्रीज की तो अधिकारी खुद कमीशन के पास पहुंचे। कमिश्नर ने समय पर चुनाव की प्रतिबद्धता को दोहराया सूत्र बताते हैं कि अनिल खाची ने राज्यपाल को तय समय के भीतर पंचायत चुनाव कराने की प्रतिबद्धता को दोहराया है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के मुताबिक हर पंचायत का कार्यकाल 5 साल से ज्यादा नहीं हो सकता। मौजूदा जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही चुनाव करवाना जरूरी है। अनिल खाची ने शिष्टाचार भेंट बताया इसे लेकर इलेक्शन कमिश्नर अनिल खाची से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि गवर्नर प्रदेश के संवैधानिक मुखिया है। इसलिए, उन्होंने शिष्टाचार भेंट की है, क्योंकि इलेक्शन का कार्यक्रम चल रहा है। उन्होंने गवर्नर को तैयारियों से अपडेट कराया है। हाईकोर्ट में 22 दिसंबर की सुनवाई पर सबकी नजरें इस मुलाकात के बाद सबकी नजरें गवर्नर के अगले मूव पर रहेगी। इसी तरह, यदि सरकार चुनाव को तैयार नहीं होती तो 22 दिसंबर को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर पंचायत चुनाव का फैसला निर्भर करेगा।


