आखिर 40 साल बाद भोपाल का बोझ उतरा:आज नई सुबह… आप जब तक जागेंगे, यूनियन कार्बाइड का 337 टन जहरीला कचरा पीथमपुर पहुंच चुका होगा

250 किमी का ग्रीन कॉरिडोर… रात 9 बजे ट्रैफिक रोककर 12 कंटेनर में कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना 72 घंटे में पैकिंग… 150 मजदूर लगे, पीथमपुर में 1200 डिग्री सेल्सियस पर जलाया जाएगा कचरा रविवार रात 9 बजे भोपाल में यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की तरफ से फिर सायरन बजने लगा। ठीक उसी तरह जैसे 40 साल पहले 1984 में 2-3 दिसंबर की दरमियानी रात को गैस लीक के समय समय बजा था। लेकिन इस बार सायरन भोपाल का बोझ हल्का करने के लिए बजा। यूका के गोदाम में रखे 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को निस्तारण के लिए पीथमपुर रवाना किया। पुलिस की 5 गाड़ियां साइरन बजाते हुए यूका परिसर से निकली। पीछे-पीछे 12 कंटेनर चले। इसके बाद पुलिस के 3 और वाहन, गैस राहत, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड समेत कुल 25 वाहन काफिले में चले। 250 किमी के ग्रीन कॉरिडोर के लिए वीआईपी मूवमेंट की तरह ट्रैफिक डायवर्ट किया गया। इन ट्रकों के 7 घंटे में पीथमपुर पहुंचने की संभावना है। यानी सुबह जब तक लोग नींद से जागेंगे, कंटेनर पीथमपुर पहुंच चुके होंगे। पूरी प्रक्रिया के लिए एसडीएम गोविंदपुरा रवीश कुमार श्रीवास्तव को मजिस्ट्रेट बनाया गया था। इस कचरे को कंटेनरों में लोडिंग के काम में 150 मजदूरों ने 15 शिफ्ट में किया। कुल 72 घंटे में कचरे की पैकिंग हुई। एक कंटेनर में एवरेज 30 टन कचरा भरा गया है। यह पूरी कार्यवाही सीपीसीबी और एमपीपीसीबी के वैज्ञानिकों की देखरेख में हुई। फैक्ट्री के अंदर 700 अफसर-कर्मचारी मौजूद रहे। इधर, पीथमपुर रवाना हुए हर कंटेनर में दो-दो ड्राइवर हैं। ये बिना रुके पीथमपुर जाएंगे। खाने-पीने का सामान ड्राइवरों को पहले दे दिया गया है। हर जिले की सीमा पर वहां का पुलिस बल अगले जिले की सीमा तक इन्हें स्कॉट करेगा। मालूम हो, गैस लीक होने से 5,479 लोगों की मौत हुई थी। 5 लाख से अधिक लोग आज भी इसके दुष्प्रभाव झेल रहे हैं। बड़ा सवाल… अभी सिर्फ गोदाम में रखा 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा हटाया, लेकिन… यूका परिसर में 20 और जगह दफन है कचरा, उसका क्या‌‌‌? यूका परिसर के गोदाम में रखे 337 टन कचरे को तो पीथमपुर रवाना कर दिया है, लेकिन अब सवाल है कि परिसर में ही 20 अलग-अलग जगहों पर दबे कचरे को कब हटाया जाएगा‌‌? हालांकि यह कचरा कितना है, इसका कोई अनुमान किसी के पास नहीं है। हाई कोर्ट के निर्देश पर मप्र सरकार ने 2010 में नेशनल एन्वायर्नमेंटल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट (नीरी) नागपुर और नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजीआरआई) हैदराबाद ने जहरीले कचरे व उससे हुए मिट्टी-भूजल प्रदूषण की जांच कराई थी। सामने आया था कि यूका परिसर में 21 जगह जहरीला कचरा दफन है। यहां 1969 से 1984 के बीच अलग-अलग प्लांट के पास कई तरह का जहरीला कचरा डंप होता था। इससे आसपास का ग्राउंड वॉटर और करीब 11 लाख टन मिट्‌टी दूषित हो चुकी है। गड्‌ढे खुदवाकर दबाए थे जहरीले रसायन
गैस पीड़ितों से जुड़े संगठनों का कहना है कि सरकार भले ही यूका परिसर में रखे 337 टन कचरे को पीथमपुर ले जाकर नष्ट कर रही है, लेकिन सरकार को बाकी कचरे की ओर भी ध्यान देना चाहिए। यहां जगह-जगह दबे कचरे को साफ करना चाहिए। भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा का कहना है कि यूका प्रबंधन ने 1977 में यहां गड्ढे खुदवाकर हजारों टन जहरीला रसायन और कारखाने से प्लांट्स से निकले अपशिष्ट दबाए थे। 3 किमी तक 42 बस्तियों का पानी प्रदूषित
नीरी की रिपोर्ट के मुताबिक यूका में फैले कचरे के कारण यहां की मिट्टी कई जगह तो दो मीटर गहराई तक प्रदूषित हो चुकी है। आसपास के बड़े इलाके का भूजल भी दूषित हुआ है। गैस पीड़ित संगठनों के मुताबिक आसपास की 42 बस्तियों का पानी पीने लायक नहीं रहा है। ढींगरा का कहना है कि आशा है कि अब सरकार 20 अन्य जगहों पर दबे कचरे के साथ ही तालाब में व अन्य स्थानों पर दबे हजारों टन जहरीले कचरे की सफाई के लिए कदम उठाएगी।

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