पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब में एक तरफ जहां सरकार की तरफ से कल विशेष विधानसभा सेशन बुलाया है। यह पहला मौका होगा, जब चंडीगढ़ से सेशन बाहर होगा। वहीं, इससे पहले श्री आनंदपुर साहिब में विभिन्न संघर्षशील लोगों की तरफ से जनता का सेशन चलाया गया। इस दौरान नेताओं ने नहरी पानी, बेअदबी कानून, ग्रीन इंडस्ट्री, माइनिंग नीति और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी अधिकार जैसे महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे उठाए। नेताओं ने इस मंच से सरकार से मांग की कि इन सभी मुद्दों को 24 नवंबर को होने वाले विधानसभा सत्र में पारित किया जाए। केंद्र व पंजाब सरकार दोनों को घेरा इस सेशन की खास बात यह रही कि वहां पंजाब विधानसभा के सारे नेताओं के मुखौटे पहनकर लोग ही बैठे थे। ऐसा लग रहा था कि मानों सच में विधानसभा चल रही हो। विधानसभा के लिए जो पंडाल लगाया गया था, उसमें विरासत -ए -खालसा व श्री आनंदपुर साहिब की ऐतिहासिक इमारतों की तस्वीरें थीं । लोगों ने प्रत्येक मुद्दे को सेशन में गंभीरता से उठाया। केंद्र और पंजाब दोनों सरकारों को घेरने की कोशिश की । यह अपनी तरह का सेशन था। इसमें दावा किया गया कोई राज नेता नहीं, बल्कि इलाके व पंजाब के लिए संघर्ष करने वाले लोग शामिल थे। ऐसे हुआ विधानसभा का आगाज इस सेशन की शुरुआत जैसे होती है, तो कुछ लोग अपने हाथ में बैनर और पोस्टर लेकर आते हैं। इस दौरान स्पीकर पूछते हैं कि “श्रीमान जी, आप कौन हैं?”हम वह लोग हैं, जिन्होंने चुनकर आपको कुर्सियों पर बैठाया। स्पीकर कहते हैं कि इसमें चुने हुए नुमाइंदे आते हैं। इस पर लोग कहते हैं कि जब असेंबली चंडीगढ़ से चलकर गुरुओं की धरती पर आ सकती है, तो यहाँ के लोगों की भी बात सुनी जानी चाहिए। हमें भी मौका दिया जाए, हम भी गाँवों में हैं। हमें पंजाब का दर्द आने रख लेने दो।इस पर स्पीकर कहते हैं कि चार मिनट आपको देते हैं। फिर उठाएं इलाके के सारे मुद्दे ऐसे में विधानसभा में एक व्यक्ति श्री आनंदपुर साहिब की महत्ता के बारे में बताता है। वह कहता है कि जिस सिद्धांत को लेकर हम चले थे, वह आज नज़र नहीं आता है। सरकार कहीं से चल रही है। आज केंद्र पंजाब के हर हक को छीनने की कोशिश कर रहा है। संघीय ढांचा कहाँ है? हकों पर डाका पड़ा है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के नाम पर बहुत अड़ी कील लगाई गई है। जनाब, इस मामले में प्रस्ताव से कुछ नहीं होगा। इसके लिए लड़ाई लड़नी होगी। चंडीगढ़ पंजाब के गाँवों पर बसाया गया था। जब हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ बनी थी, उस समय तय हुआ था कि जब हरियाणा की अपनी राजधानी बन जाएगी, तो चंडीगढ़ पर पंजाब का एकाधिकार हो।उस फाइल पर धूल झाड़ लो।पंजाब का पानी चंडीगढ़ जा रहा है। पानी हमारा, चंडीगढ़ हमारा जाए।


