जोधपुर-नागौर रोड पर एक खेत में 26 साल पुराने बोरवेल से आग निकल रही है। अन्नाराम देवड़ा के 2 बीघा खेत पर ये बोरवेल बना हुआ है। 6 साल पानी आने के बाद 20 साल से ये बंद था। 28 दिसंबर 2024 को अचानक इसमें से गैस की बदबू आने लगी। जब ग्रामीण माचिस की तिल्ली इस बोरवेल के पास ले गए तो अचानक आग जलने लगी। 28 दिसंबर की दोपहर में शुरू हुई आग जलने की घटना 31 दिसंबर 2014 तक चली। प्रशासन और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। बोरवेल से निकलने वाली गैस और आग को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अब बड़ा सवाल इन सभी सवालों का जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम जोधपुर एमबीएम यूनिवर्सिटी के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील सारस्वत को साथ लेकर गांव बावड़ी पहुंची। टीम ने जब यहां माचिस की तीली लगाई तो बोरवेल से नीले रंग की लौ निकलने लगी। उबलता हुआ दिखा पानी
अन्नाराम देवड़ा ने बताया कि उन्होंने पुराने बोरवेल को चालू कराने के लिए शनिवार को सफाई का काम शुरू किया था। इसी दौरान कुछ आवाज सुनाई देने लगी। इसके बाद आस-पास के लोगों की भीड़ जुट गई। इसी बीच अचानक आग निकलने लगी थी। बोरवेल से लगातार पानी के उबलने जैसी आवाज और तेज गंध आ रही थी। हकीकत जानने के लिए वॉटर प्रूफ कैमरा बोरवेल में उतारा गया। जब ये कैमरा उतारा तो बोरवेल के भीतर पानी उबल रहा था। अन्नाराम ने हमें वो वीडियो भी दिखाए। बताया कि कैमरे में ऐसा लग रहा था जैसे पानी उफान मार रहा हो। इसमें उथल-पुथल नजर आने लगी। हमने पानी निकालने के लिए ट्यूबवेल लॉरिंग करवाकर पंप-केबल डाली। एक-डेढ़ घंटे तक पानी निकलने के बाद बिल्कुल कम हो गया। इसके बाद सोचा भी कि बोरवेल गहरा करवा दिया जाए। बोरवेल से निकलने वाली गैस की गंध भी तेज आने लगी। जब हम तीली पास लेकर गए तो चार फीट तक आग की लपटें उठने लगी थीं। इसके बाद शाम तक इसका प्रेशर काफी कम हो गया था। बाद में अधिकारियों ने इसे बंद करवाकर पत्थरों से ढकवा दिया। आग के रंग से दावा- हाइड्रोजन और मीथेन गैस
रासायनिक अभियांत्रिकी विशेषज्ञ डॉ. सारस्वत को जब टीम मौके पर लेकर पहुंची तो उन्होंने भी वहां माचिस की तीली जलाकर देखी। बोरवेल से करीब 4 फीट ऊपर तक नीले रंग की लौ निकलने लगी। डॉ. सारस्वत ने बताया कि आग की लौ के रंग को देखकर प्रारंभिक तौर पर यह दावा किया जा सकता है कि इसमें मीथेन और हाइड्रोजन गैस के अंश हैं। इन दोनों गैस के मिश्रण की वजह से पीली दिखाई देने वाली लौ नीले रंग की नजर आ रही है। ये वही गैस है, जिससे वाटर हीटर और एयर कंडीशनर को ठंडा रखने वाली गैस बनती है। हालांकि जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर ये गैस है कौन सी। डॉ. सारस्वत ने बताया जमीन से निकल रही लगातार गैस से ये भी जाहिर हो रहा है कि इस क्षेत्र के आस-पास मीथेन या हाइड्रो कार्बन गैस का बड़ी मात्रा में भंडार है। हालांकि जमीन में कौन सी गैस के भंडार हैं, जांच के बाद ही सामने आएगा। पानी में गैस का प्रेशर ज्यादा, इसलिए उठ रहे हैं बुलबुले
डॉ. सारस्वत ने बताया – ट्यूबवेल के भीतर कैमरे की रिकॉर्डिंग से साफ जाहिर हो रहा है कि पानी के नीचे काफी मात्रा में गैस है। इसी वजह से पानी से बुलबुले उठ रहे हैं। ट्यूबवेल करीब 500 फीट गहरा बताया जा रहा है। उस स्तर पर आसपास से कहीं किसी अन्य सोर्स से इसमें गैस पहुंच रही है। इस ट्यूबवेल की चौड़ाई बढ़ने की स्थिति में भी गैस की मात्रा बढ़ सकती है। सैंपलिंग से गैस की पुष्टि होने के बाद आगे की जांच की दिशा तय की जा सकती है। डॉ. सारस्वत ने आसपास के लोगों से बातचीत के बाद बताया कि ये साफ हो गया कि यहां से गैस लगातार निकल रही है। हालांकि इसका प्रेशर अब कम हुआ है। यदि इसकी गहरी खुदाई करते हैं तो इसका प्रेशर भी बढ़ सकता है। क्या गैस निकलने से किसी तरह की अनहोनी का खतरा है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि चूंकि ये आग पकड़ रही है। अभी प्रेशर सामान्य है इसलिए इसका प्रभाव सीमित है। यदि प्रेशर बढ़ेगा तो अनहोनी होने की आशंका भी बढ़ेगी। भू-गर्भ वैज्ञानिक और ऑयल इंडिया की टीम ने लिए सैंपल
बावड़ी एसडीएम जवाहरराम चौधरी ने बताया कि 30 दिसंबर 2024 को सूचना मिली थी कि ट्यूबवेल से गैस निकल रही है। इससे आग भी लग रही है। ऐसे में उच्चाधिकारियों को भी इस संबंध में सूचित किया गया। साथ ही आमजन की सुरक्षा को देखते हुए ट्यूबवेल को बंद करवाकर आसपास लोगों की आवाजाही को पूरी तरह बंद करवा दिया। 31 दिसंबर को भूजल विभाग के विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची थी। मौके पर ऑयल इंडिया के एक्सपर्ट और उनकी टीम भी पहुंची थी। इसके बाद पानी के सैंपल लिए गए। हालांकि गैस निकलने को लेकर कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। लेकिन, एक्सपर्ट की ओर से ये भी दावा किया जा रहा है कि पानी के सैंपल से गैस की मात्रा और वह कौन सी गैस है। इसके बारे में जानकारी सामने आनी मुश्किल है। इसके लिए गैस सैंपलर सिलेंडर और बैग से केवल गैस का सैंपल लेना होगा। इसकी साथ प्रशासन की परमिशन भी जरूरी है। फिलहाल गैस की जांच और इसकी सैंपलिंग केवल डीआरडीओ, एमबीएम विवि रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, ओएनजीएस व अन्य तेल कंपनियां कर सकती हैं।


