सरस डेयरी में इन दिनों दूध की आवक पीक पर है। प्रदेशभर के दूसरे डेयरी संघों में आवक ज्यादा होने से एक-दूसरे को सप्लाई की व्यवस्था थम गई है। ऐसे में पिछले 15 दिन से अतिरिक्त दूध से रोज 6 टन पाउडर तैयार किया जा रहा है। गर्मियों में दूध की डिमांड बढ़ने पर इस पाउडर से दूध बनाने के साथ नीलामी भी की जाएगी। इससे एक तरफ दूध की मांग पूरी होती रहेगी, दूसरी ओर संघ को अतिरिक्त कमाई भी होगी। इन दिनों उदयपुर डेयरी में रोज 1.12 लाख लीटर दूध की आवक है। इसके उलट खपत 76 हजार लीटर प्रतिदिन ही है। इसमें टूरिस्ट सीजन और न्यू ईयर का दैनिक करीब 6 से 7 हजार लीटर उठाव भी शामिल है। ऐसे में रोज करीब 35 हजार लीटर दूध बच रहा है। सामान्य दिनों में 70 हजार लीटर की खपत रहती है। अतिरिक्त दूध से पाउडर बना रहे हैं। इसके 25-25 किलो के पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। संघ में अभी 90 टन का स्टॉक हो चुका है, जो एक साल तक खराब नहीं होगा। मार्च तक दूध की आवक ज्यादा, फिर गिरावट डेयरी संघ अधिकारियों के अनुसार मार्च तक दूध की आवक ज्यादा रहेगी। फिर गिरावट शुरू हो जाएगी। दरअसल, मानसून सीजन से ही दूध की आवक बढ़ना शुरू हो जाती है। सर्दियों में पशुओं को पर्याप्त चारा-पानी मिलने से उत्पादन अच्छा रहता है। साल में 8 से 9 माह तक आवक डिमांड से ज्यादा रहती है। गर्मियों में यह क्रम एकदम उल्टा हो जाता है। तब पाउडर से दूध बनाकर जरूरत पूरी करेंगे। देश में नेशनल को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ऑफ इंडिया के जरिये मिल्क पाउडर की ई-नीलामी होती है। फेडरेशन के पोर्टल पर डेयरी संघ अपने स्टाक की जानकारी डालते हैं। फिर 20 से 50 टन तक के स्टॉक की एक साथ नीलामी होती है। अभी सर्दियों में गुजरात के मार्केट में दूध की सरप्लस आवक होने से वहां भी सप्लाई नहीं हो रही।


