रायपुर में जिला प्रशासन ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी है। इस परियोजना का नाम ‘जिंदगी मुस्कुराएगी’ है। इसका उद्देश्य उन गरीब बच्चों को नई उम्मीद देना है, जिनका जन्म हाथ, पैर, मुंह, नाक या कान में विकृति के साथ हुआ है। ऐसे बच्चे जो ठीक से खा, बोल या चल नहीं पाते, या सामान्य बच्चों की तरह दैनिक कार्य नहीं कर पाते-उनके मुफ्त इलाज के लिए यह पहल शुरू की गई है। इस अभियान में कालड़ा बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर का महत्वपूर्ण सहयोग मिला है। कलेक्टर गौरव कुमार ने बताया कि रायपुर जिले के सभी ब्लॉकों में स्वास्थ्य विभाग के साथ संयुक्त रूप से कैंप लगाए गए। कैंपों में 19 बच्चे जन्मजात विकृतियों के साथ मिले, जिन्हें चयनित कर कालड़ा बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी सेंटर में भर्ती कराया गया। ठीक से चल नहीं पाता था
कक्षा पहली के ताकेश निषाद के पैर में गंभीर समस्या थी, वह ठीक से चल नहीं पाता था। महंगा खर्च देखकर परिजन इलाज नहीं कर पाए। जिला प्रशासन के कैंप से उसका इलाज हुआ और अब वह सामान्य बच्चों की तरह चल सकेगा। महंगे इलाज से थे परेशान
कक्षा पांचवीं की देवी निषाद के दोनों कान में छेद, हाथ की उंगली जुड़ी हुई और पैर का तलवा दो हिस्सों में बंटा था। महंगे इलाज के कारण परिवार पीछे हट गया था। कलेक्टर और डॉक्टरों की मदद से अब उसका इलाज जारी है। खाने में हो रही थी दिक्कत, एक दिन में हुई ठीक
कक्षा दूसरी की प्रेमिन के नाक और मुंह की हड्डी में जन्म से विकृति थी, वह न सही से खा पाती थी, न बोल पाती थी। स्कूल के स्वास्थ्य शिविर में बताया गया कि इलाज मुफ्त होगा। एक ही दिन में सर्जरी हो गई और अब बच्ची खुश है। मकसद- इलाज के साथ बच्चों को समाज से जोड़ना
डॉ. सुनील कालड़ा के मुताबिक अब तक 5 बच्चों की प्लास्टिक सर्जरी कर उन्हें नई जिंदगी दी गई है। शेष बच्चों की सर्जरी भी अलग-अलग स्लॉट में की जाएगी। प्रोजेक्ट का मकसद केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और परिवारों को यह भरोसा दिलाना है कि उनका बच्चा भी सामान्य जीवन जी सकता है।


