अमृतसर में गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित:कम से कम 11 ग्राम होना चाहिए हीमोग्लोबिन, 5 ग्राम तक पाया जा रहा, जो खतरनाक

अमृतसर जिले में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार जिले में ज्यादातर गर्भवती महिला के खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम पाई गई है। महिलाएं एनीमिया यानी रक्त की कमी से जूझ रही हैं, और यह कमी ज्यादातर गर्भवती महिलाओं में पाई गई है, जो मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिला के शरीर में कम से कम 11 ग्राम हीमोग्लोबिन होना आवश्यक है, लेकिन कई महिलाओं में यह स्तर 5 ग्राम तक पाया गया है। एनीमिया के कारण महिलाओं में कमजोरी, थकान, चक्कर आना और काम करने की क्षमता में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गर्भावस्था में इसका असर और भी बढ़ जाता है, जिससे प्रसव के दौरान जटिलताएं सामने आती हैं और नवजात शिशुओं का वजन सामान्य से कम रहता है। सरकारी अभियानों से एनीमिया रोकथाम के लिए तेज प्रयास अमृतसर की सिविल सर्जन डॉ. भारती धवन ने बताया कि इस समस्या को दूर करने के लिए हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों का वितरण, मातृ वंदना योजना, एनीमिया मुक्त भारत अभियान और स्कूलों में सप्लीमेंट देना शामिल है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों में किशोरियों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर और पोषण परामर्श सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। भारती धवन का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में एनीमिया के मामले ग्रामीण इलाकों से अधिक हैं, क्योंकि शहरों की महिलाएं पोषक भोजन को लेकर लापरवाह रहती हैं, जबकि गांवों में महिलाएं सादा और पौष्टिक भोजन का सेवन करती हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि महिलाओं को अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार, गुड़ और प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। समय-समय पर खून की जांच और आयरन-फोलिक जिंक सप्लीमेंट लेना भी जरूरी है।

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