सेहत की खुश-खबर:पहली बार एआई से हार्ट की MRI; पहले हार्ट बीट के चलते संभव नहीं थी, अब ब्लॉकेज के हर लेवल का पता चल सकेगा

राजस्थान में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हार्ट की एमआरआई (मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग) हो सकेगी। अभी तक एमआरआई मशीनें मूवेबल ऑर्गन के स्क्रीन शॉट्स व टेस्टिंग नहीं कर पाती थी। इसलिए दिल के मरीजों की एमआरआई संभव नहीं थी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीज के हार्ट का बेस्ट डायग्नोस कर एआई तकनीक से ही इलाज की प्रक्रिया तय होगी यानी डॉक्टर एआई से तय कर सकेंगे कि हार्ट को बाईपास की जरूरत है या सिर्फ दवाओं से ही मरीज का इलाज किया जा सकता है। खास बात है कि इस एमआरआई से बच्चों के हार्ट वॉल्व की होने वाली सर्जरी में कारगर साबित होगी। वॉल्व की लाइफ को इस एमआरआई से आसानी से पता चल सकेगा। पहले मरीज के अस्पताल आने के साथ ही सीटी स्कैन या एंजियोग्राफी की जाती थी, लेकिन उसमें ब्लॉकेज की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती थी। अब एआई से सीटी स्कैन करने पर ब्लॉकेज का हर लेवल पता चलता है। आर्टरी में स्टेंट या वॉल्व की असेसमेंट एक्यूरेसी 100 प्रतिशत बढ़ गई है। पेसमेकर की कार्यक्षमता कम होते ही हार्ट फेल्योर की स्थिति जांच में सामने आ सकेगी हार्ट में इंप्लाटेबल पेसमेकर लगाए जा रहे हैं, जो कि हार्ट पंपिंग की मॉनिटरिंग करते हैं और असामान्यता बताते हैं। ईएचसीसी के डॉ. संजीव के. शर्मा का कहना है कि हार्ट कम धड़कता है तो उसे सही भी करते हैं। जैसे-जैसे इन पेसमेकर की उम्र बीतने लगती है, इनकी कार्यक्षमता भी कम होने लगती है। लेकिन अब एआई के जरिए यह बताया जा सकता है कि पेसमेकर की क्षमता कम होने लगी है और हार्ट के कम काम करने से लंग्स में पानी जाने लगा है। यानी कि हार्ट फैल्योर की स्थिति को पहले ही भांपा जा सकता है। ऐसे में व्यक्ति तुरंत पास के अस्पताल में जाकर इलाज ले सकता है। असेसमेंट एक्यूरेसी 100%: मरीज की आर्टरी में ब्लॉक की पूरी जानकारी देने के साथ ही एआई यह भी बता सकेगा कि किस तरह का इलाज किया जाए। यानी कि ब्लॉक को शॉक से, रोटा प्रोसेस से या बायपास से क्लीयर किया जाए, यह भी बता सकेगा। अभी तक अनुभवी डॉक्टर ही यह बता पाते थे। यहां तक कि आर्टरी में स्टेंट या वॉल्व का असेसमेंट एक्यूरेसी 100 प्रतिशत बढ़ गई है। वॉल्व की उम्र का पता चल सकेगा बच्चों के हार्ट में छेद की समस्या में वॉल्व सर्जरी एआई एमआरआई से आसान होगी। वॉल्व की उम्र 10 से 15 साल तक ही होती है तो बच्चे के लक्षणों के आधार पर अंदाजा लगाया जाता था कि वॉल्व की उम्र कितनी बची है। अब एमआरआई की इस जांच से ही वॉल्व की शेष उम्र का पता लगाया जा सकता है और उसके बाद वॉल्व की सर्जरी की जा सकती है। आर्टरी में कैल्शियम कितना बड़ा, पता लग सकेगा ईएचसीसी कार्डियक इमेजिंग की डायरेक्टर डॉ. रितु अग्रवाल के मुताबिक, मरीज की आर्टरी में ब्लॉक करने वाला कैल्शियम कितना है, इसकी मोटाई कितनी है, यह कितने प्रतिशत है, आर्टरी में कितने एरिया और कितनी गहराई तक ब्लॉक है, इन सभी की पूरी जानकारी मिल सकेगी। साथ ही अब डॉक्टर तय कर सकते हैं कि मरीज को केवल दवाओं से सही किया जा सकता है या एंजियोप्लास्टी की जरूरत है। इससे यह तक पता लगाया जा सकता है कि ट्रीटमेंट के बाद हार्ट कितना काम कर सकेगा यानी डॉक्टर्स को बाईपास सर्जरी करनी है या नहीं, इसका पहले ही पता लगाया जा सकता है।

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