प्रदीप राज|रामगढ़ महिलाओं की बहादुरी, दृढ़ संकल्प और आत्मनिर्भरता के कई उदाहरण है, इनमें महिलाओं की किसी भी मुश्किल परिस्थिति का सामना धैर्य और हिम्मत से कर समाज में अपनी पहचान बन रही है। दूसरों के लिए साहस और दृढ़ निश्चय से कोई भी लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा मिल रही है। आधुनिक परिवेश में महिलाएं भी पुरुषों के समान ही साहसी और सक्षम हो रही है। ऐसा ही रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड के जराद गांव में रहने वाली चरकी देवी की सफलता की है, जो गांव की सफल उद्यमी महिला के रूप में जानी जाती है। क्योंकि, उसने गांव में मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरु किया। उन्होंने 100 मुर्गी चूजों से व्यवसाय शुरू कर उनका अनुभव बढ़ा, इस व्यवसाय को और बड़ा किया। वर्तमान में उनके फार्म में करीब 1 हजार मुर्गी के चूजों का पालन होता है। इस व्यवसाय से उनकी सालाना आय करीब एक लाख 20 हजार रुपए है। यह आय उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आज लोग उन्हें एक सफल उद्यमी और प्रेरणादायी महिला के रूप में देखते है। गांव की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ रही है और अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना देख रही है। इस व्यवसाय को लेकर कई शंकाएं थी, मिली सफलता चरकी देवी को मुर्गी पालन का काम शुरू कर समय उनके मन में कई तरह की डर और शंकाएं थी। उन्हें चिंता थी कि अगर यह व्यवसाय सफल नहीं हुआ, तो उनकी पूंजी डूब जाएगी। परिवार की हालत को देखते हुए यह डर स्वाभाविक भी था। कई बार उन्हें लगा कि शायद यह काम ज्यादा दिन न चल पाए। लेकिन जेएसएलपीएस और समूह की मदद, प्रशिक्षण और साथियों का मार्गदर्शन उनका सहारा बना। वर्ष 2017 में झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) ने महिला स्वयं सहायता समूह बनाया, चरकी देवी ने इस समूह से जुड़ी। उसने हर महीने की बैठक, बचत कैसे करनी है और आवश्यकता पड़ने पर समूह से ऋण लेकर किस प्रकार आर्थिक मदद पाया जा सकता है। इसे वह समझी व सीखी। वह सामुदायिक निवेश निधि से सहयोग मिला और बैंक लिंकेज के ज़रिए बड़े ऋण की सुविधा भी प्राप्त की। मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। गरीबी से जूझता था परिवार चरकी देवी के परिवार में कुल 10 सदस्य हैं। पति नागेश्वर महतो मजदूरी करके घर चलाते थे। इतनी बड़ी जिम्मेदारी के बीच मजदूरी से होने वाली कमाई कम थी। कई बार गांव में मजदूरी का काम भी उपलब्ध नहीं होता था, जिससे घर का खर्चा और बच्चों की पढ़ाई अधूरी रह जाती थी। चरकी देवी गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनने के लिए कर रही प्रेरित करने के साथ-साथ पति के साथ घर की जिम्मेदारियां साझा कर रही हैं। परिवार को उन पर गर्व है। अब बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ाई कर रहे है। घर की आर्थिक स्थिति सुधरने से परिवार में खुशी और आत्मविश्वास लौटा है। चरकी देवी का सपना है कि आने वाले समय में वे अपने मुर्गी फार्म को और बड़ा करना चाहती है। उनकी योजना है कि दो हजार मुर्गी चूजों तक का पालन करे। वे चाहती हैं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर अच्छे पदों पर काम करें


