सहायक प्राध्यापकों की भर्ती में अतिथि विद्वानों को 25% आरक्षण:1923 पदों के लिए होने वाली भर्ती में हो सकेंगे शामिल, तीन भर्ती तक ही मिलेगी लाभ

राज्य शासन ने सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ा अधिकारी, ग्रंथपाल सहित अन्य पदों की भर्ती में अतिथि विद्वानों के लिए 25% पद आरक्षित कर दिए हैं। बशर्ते, उन्होंने एक शैक्षणिक सत्र में अध्यापन कराया या 4 अंक अर्जित किए हों। इतना ही नहीं, उन्हें आयु सीमा में भी 1 से 10 वर्ष की छूट दी गई है। अतिथियों को इस आरक्षण का लाभ अगली तीन भर्तियों तक ही मिलेगा। इनमें से दो परीक्षाएं इसी साल (मई-अक्टूबर 2025) में प्रस्तावित हैं। ये परीक्षा 1923 पदों के लिए होगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने ‘मध्य प्रदेश शैक्षणिक सेवा (महाविद्यालयीन शाखा) सेवा भर्ती नियम 1990’ में संशोधन किया है। मध्य प्रदेश में प्राध्यापक के 457 और सहायक प्राध्यापक के 3675 पद रिक्त हैं। वहीं प्रदेश के कॉलेजों में 2 दशक से भी अधिक समय से 4500 अतिथि विद्वान पढ़ा रहे हैं। वे लगातार नियमित करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यह खबर सुकून देने वाली है। हालांकि आरक्षण तीन भर्तियों तक ही सीमित रहेगा। इसमें से दो भर्ती परीक्षा इसी साल हो रही हैं। साल 2026 के बाद विद्वानों को कोई मौका नहीं मिलेगा। बता दें कि नियमितीकरण के लिए अतिथि विद्वानों ने लंबी लड़ाई लड़ी है। साल 2015 में उन्होंने 110 दिन आंदोलन किया और साल 2019 में छिंदवाड़ा से भोपाल तक यात्रा निकालकर 130 दिन आंदोलन किया था। फिर कोरोना संक्रमण फैलने लगा और उन्हें आंदोलन खत्म करना पड़ा। एमपीपीएससी ने घोषित किया परीक्षा कार्यक्रम
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग इंदौर ने सहायक प्राध्यापक (क्रीड़ा अधिकारी, प्राणी शास्त्र, भौतिक शास्त्र, राजनीति शास्त्र, गणित, हिंदी, भूगोल, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, भौतिक रसायन, वाणिज्य रसायन शास्त्र, इतिहास, समाज शास्त्र, कम्प्यूटर विज्ञान विषय) के लिए मई और (यौगिक विज्ञान केंद्र, वे, उर्दू, सांख्यिकी, संस्कृत, व्याकरण, संस्कृत साहित्य, संस्कृत प्राच्य, संस्कृत ज्योतिष, संगीत, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, मराठी, भूगर्भ शास्त्र विषय) के लिए अक्टूबर 2025 में परीक्षा कराने का कार्यक्रम घोषित किया है।
50 हजार रुपए मानदेय
कॉलेजों में पढ़ा रहे अतिथि विद्वानों को प्रतिदिन 2000 रुपए के मान से मानदेय दिया जाता है। उन्हें अधिकतम 25 दिन का 50 हजार रुपए मानदेय देने का प्रावधान है। निर्णय से खुश नहीं अतिथि
अतिथि विद्वान सरकार के इस निर्णय से खुश नहीं हैं। वे कहते हैं कि सरकार ने 25% आरक्षण देकर अतिथियों को दिए जाने वाले लाभ को सीमित कर दिया है। यानी 1125 विद्वानों को ही लाभ मिल पाएगा। अतिथि विद्यान संघ के अध्यक्ष डॉ. देवराज सिंह कहते हैं कि 20-20 साल से अतिथि कार्यरत हैं। उनका, योग्यता एवं अनुभव के आधार पर पुनर्वास किया जाना चाहिए। दरअसल, एमपीपीएससी की परीक्षा का कोई भरोसा नहीं है। 28 साल बाद साल 2017 में परीक्षा कराई गई थी। ऐसा ही आगे हुआ तो हम कभी नियमित नहीं हो पाएंगे। वर्तमान में कार्यरत अतिथि विद्वानों की उम्र 45 से 50 साल हो गई है। वे कहते हैं कि 4500 में से 3650 अतिथि विद्वान यूजीसी के मापदंड पूरे करते हैं। उन्हें तो किसी परीक्षा में बैठने की जरूरत ही नहीं है। 11 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महापंचायत बुलाई थी। जिसमें कई वादे किए गए थे। उसमें से ‘हटाया नहीं जाएगा’ भी एक वादा था। जिस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

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