चित्तौड़गढ़ में एक बार फिर आर्ट टीचर्स ने अपनी भर्ती को लेकर आवाज उठाई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में कला शिक्षा (चित्रकला और संगीत) को कंपलसरी सब्जेक्ट में लिया था, लेकिन राजस्थान सरकार ने साल 1992 को आर्ट टीचर्स के पदों को खत्म कर भर्ती प्रक्रिया बंद कर दी। हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी 33 साल से यह बहाल नहीं हो पाया। इसको लेकर आज बेरोजगार कला शिक्षक अभ्यर्थी संगठन ने फिर से राजस्थान कला शिक्षकों की भर्ती की मांग की है। 1992 में बंद की थी शिक्षकों की भर्ती क्लास 1 से 10वीं तक पहले कला शिक्षा को कंपलसरी सब्जेक्ट किया गया था। कला शिक्षा में ड्राइंग और म्यूजिक को कंपलसरी किया था। बच्चों के आर्ट को लेकर केंद्र सरकार इसके लिए करोड़ों रुपए का बजट जारी करती है। नई शिक्षा नीति 2020 में भी कला शिक्षा को महत्व दिया गया है। कला के जरिए बच्चों को एजुकेशन मिले, इसके लिए आर्ट एण्ड क्राफ्ट रूम, कला किट, कला उत्सव के लिए केन्द्र सरकार द्वारा करोड़ रुपयों का बजट भी भेजा जा चुका है। साल 1992 में राजस्थान के शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कला शिक्षकों का पद खत्म करते हुए सेकंड और थर्ड ग्रेड के पदों की भर्ती बंद कर दी। जिससे सरकारी स्कूलों में ड्राइंग, म्यूजिक, डांस और मूर्तिकला का सब्जेक्ट भी बन्द हो गया। सरकारी स्कूलों में 33 सालों से भर्ती बंद है। भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी करे सरकार बेरोजगार कला शिक्षक अभ्यर्थी संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि हमारी मांग है कि बिना टीचर्स और बुक्स के फर्जी मूल्यांकन पर रोक लगाई जानी चाहिए। साल 2018 और 2024 में हाइकोर्ट ने आदेश भी दिया है कि आर्ट सब्जेक्ट के लिए सरकारी स्कूलों में टीचर्स की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, लेकिन अभी तक ऐसा कोई आदेश निकला नहीं है। भर्ती को लेकर सरकार ने आदेश निकाले। केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए बजट से राजस्थान सरकार के सरकारी स्कूलों में तैयार आर्ट एंड क्राफ्ट रूम में स्टूडेंट के लिए आर्ट सब्जेक्ट की पढ़ाई की व्यवस्था करे। इसके अलावा कला शिक्षा को लेकर कई मांगे की है। इसके लिए आज गुरुवार को संगठन की ओर से ज्ञापन सौंपा गया।


