बड़ा सवाल… रिंग रोड के चारों ओर अवैध कॉलोनियां बस रहीं, आखिर इस पर रोक कौन लगाएगा
झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) ने शहरी क्षेत्र के बाहर अवैध रूप से बस रही कॉलोनियों आैर भवनों पर केस करना बंद कर दिया है। प्राधिकार में अवैध निर्माण से जुड़े 1600 मामलों की तिथि भी बढ़ा दी गई है। उपाध्यक्ष के न्यायालय में अवैध निर्माण से जुड़े करीब 1600 मामले चल रहे थे। सभी में सुनवाई की तिथि छह माह से एक साल के लिए बढ़ाई जा रही है। आरआरडीए ने सभी जूनियर इंजीनियरों को नए निर्माण पर फिलहाल केस दर्ज नहीं करने का मौखिक आदेश भी दिया है। इस वजह से प्राधिकार क्षेत्र में बिना नक्शा स्वीकृत कराए भवनों का निर्माण बढ़ गया है। दरअसल, झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड पंचायत राज अधिनियम वाले क्षेत्रों में आरआरडीए द्वारा की गई कार्रवाई को अवैध बताया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि झारखंड पंचायत राज अधिनियम शासित क्षेत्रों में आरआरडीए को भवनों के नक्शा को मंजूरी देने का कोई अधिकार नहीं बनता है। इसके बाद आरआरडीए ने नगर निगम क्षेत्र के बाहर मास्टर प्लान के अंतर्गत आने वाले मात्र 114 गांवों का ही नक्शा स्वीकृत करेगा। लेकिन, अब बड़ा सवाल यह है कि रांची के कांके, रातू, ओरमांझी, तुपुदाना, नामकुम, अनगड़ा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नई कॉलोनियां बस रही हैं। सड़क चौड़ीकरण, नाली के लिए जगह छोड़े बिना प्लॉटिंग करके जमीन बेची जा रही है। उन पर धड़ल्ले से बिना नक्शा स्वीकृत कराए अवैध निर्माण हो रहा है, इस पर कौन रोक लगाएगा। 2022 से पहले अवैध निर्माण पर आरआरडीए ने किया था यूसी केस
जिला परिषद को नक्शा पास करने का अधिकार मिलने से पहले आरआरडीए नगर निगम क्षेत्र से बाहर विकास योजनाओं पर काम करता था। इसलिए उन क्षेत्रों में होने वाले अवैध निर्माण पर प्राधिकार ने अवैध निर्माण का केस दर्ज किया। हाईकोर्ट ने इस मामले पर ही आरआरडीए को घेरा। अदालत ने कहा कि पंचायती राज अधिनियम से संरक्षित क्षेत्र में आरआरडीए कार्रवाई नहीं कर सकता है। इसलिए आरआरडीए ने पूर्व में किए गए सभी अवैध निर्माण के केस की सुनवाई बंद कर दी है। मास्टर प्लान में शामिल 354 गांवों को 3 भाग में बांटा, 70 गांव नगर निगम को
वर्ष 2012 में कुल 354 गांव आरआरडीए क्षेत्र में शामिल किए गए थे। लेकिन 2015 में बने रांची के नए मास्टर प्लान में मात्र 184 गांवों को ही शामिल किया गया। जिसमें 70 गांव नगर निगम और 114 गांव आरआरडीए के अंतर्गत आ गए। इन क्षेत्रों के विकास की योजना और वहां बनने वाले भवनों का नक्शा दोनों संस्थाएं पास कर रही हैं। शेष गांवों में आरआरडीए नक्शा पास नहीं कर रहा था। वर्ष 2022 में नगर विकास विभाग ने आदेश जारी कर 154 गांवों में नक्शा पास करने का अधिकार जिला परिषद को दे दिया। शेष बचे 16 गांवों को खूंटी जिले में शामिल कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध डबल बेंच में अपील करेगा आरआरडीए
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ आरआरडीए डबल बेंच में अपील करेगा। क्योंकि, उसका तर्क है कि आरआरडीए जिस तरह दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी और जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी काम करती है, उसी तरह 1981 में बनी बिहार रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी एक्ट के तहत आरआरडीए का गठन किया गया था। बीआरडीए एक्ट को 2001 में जेआरडीए नाम से स्वीकृत किया गया। आरआरडीए ने ही 1983 में रांची का मास्टर प्लान तैयार किया था। उस समय से आरआरडीए भवनों का नक्शा पास कर रहा था। जबकि, 2011 में पंचायती राज अधिनियम लागू किया गया। पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्र में नागरिकों को मुलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना, जैसे सड़क, नाली, चेक डैम आदि पर काम करना है। लेकिन आरआरडीए का काम यह तय करना है कि आबादी के अनुसार सड़क की चौड़ाई कितनी होनी चाहिए, उस क्षेत्र में ओपन स्पेस कितना होना चाहिए, क्षेत्रवार कहां क्या नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। शहर में जमीन न के बराबर है। जमीन की खरीद-बिक्री रिंग रोड के आसपास के क्षेत्रों में हो रही है। नई बसावट भी यहीं रही है। मास्टर प्लान से बाहर 154 गांवों में भी बड़ी आबादी बस रही है। इन क्षेत्रों का विकास मास्टर प्लान के अनुसार नहीं हुआ। अगले कुछ वर्षों में शहर के साथ बाहरी क्षेत्र अव्यवस्थित हो जाएगा। अभी शहर में करीब 1.75 लाख अवैध घर बने हुए हैं। ऐसे घरों को नियमित करने की मांग की जा रही है।


