भास्कर न्यूज| लुधियाना कोहाड़ा चौक स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर में शाम होते ही जैसे ही संकीर्तन शुरू हुआ, उससे पहले ही पूरी नजरें एक जगह ठहर चुकी थीं मंदिर में सजे श्याम बाबा के अलौकिक शृंगार पर। सफेद, सुनहरे और नीले रंगों का ऐसा अद्भुत संगम था कि पहली ही झलक में मन ठहर जाता था। मुख्य गर्भगृह के मध्य में सजे बाबा के विशाल स्वरूप को घेरे हुई मोतियों, 20 किलो फूलों और पत्तों की परतें दूर से ही चमक बिखेर रही थीं। बीचोंबीच काले संगमरमर की मूर्ति पर मोरपंखों का मुकुट सजा था, जिसकी मद्धम नीली-हरी चमक दूर खड़े श्रद्धालुओं को भी खींच लेती थी। माथे पर तिलक, कनकों से बना तुर्रा और चारों ओर बिखरे गुलाब के फूल हर तत्व अपनी जगह पर पूर्ण संतुलन में था। श्रृंगार के आधार मंच पर नीले रंग का भारी वस्त्र, जिस पर सुनहरे फूलों की महीन कढ़ाई की गई थी, पूरी सजावट को शाही रूप देता दिख रहा था। श्रृंगार की जिम्मेदारी निभाने वाले विजय गोयल परिवार के सदस्यों ने इसे कई घंटों की साधना कहना ज्यादा उचित बताया। गुलाब, मोगरा, मोरपंख, ताजी हरियाली और सुनहरी जरी इन सबके संयोजन से तैयार किया गया यह स्वरूप उपस्थित हर भक्त के लिए अद्भुत अनुभव बन गया। जैसे ही संकीर्तन शुरू हुआ, माहौल में छाई पवित्रता और श्रृंगार की दिव्यता एक हो गई। देना हो तो दीजिए जन्म-जन्म का साथ… की पहली ही पंक्ति गूंजी और पूरा हाल एक साथ बाबा के श्रृंगार को निहारता हुआ झूम उठा। महिलाओं की तालियां, युवाओं के जयकारे और बच्चों की मुस्कान सभी का उत्साह एक साथ गूंज रहा था। इसके बाद मोनू दुआ चंडीगढ़ वालों ने माहौल को भक्ति रस में रंग दिया। उनका भजन मेरे श्याम दया कर आजा, तेरे बिना कौन हमारा…, गूंजा तो कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। रात बढ़ती गई पर किसी के कदम नहीं थके। देना हो तो दीजिए जन्म-जन्म का साथ, न दिल में रहे दूरी, न मन में रहे बात…, पर पूरा पंडाल एक साथ स्वर में डूब गया । ऐसा लगा जैसे हजारों दिल एक ही धड़कन में बदल गए हों। ट्रस्टी प्रदीप मित्तल, संदीप अग्रवाल, एल.आर. मित्तल और अनिल मित्तल व्यवस्था संभालते रहे, जबकि दर्शन करने वालों की कतारें लगातार बढ़ती रहीं। इस अवसर पर विजय गोयल, अभिषेक गुप्ता, हरीश गर्ग, मुनीश बजारी, संदीप गोयल, अतुल वालिया, जितेंद्र शर्मा, रीना जैन गोयल, निधि गुप्ता सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।


