ईरान, अफगानिस्तान या पाकिस्तान? पहली बार छोले-भटूरे चाहे किसी भी देश में बने हों, आज दुनियाभर के फूड लवर्स के दिलों पर राज करते हैं। छोले-भटूरे जिस भी शहर में गए, वहां अपना स्वाद बदला और खाने-पीने के शौकीनों को अपना दीवाना बनाया। जायका सीरीज में आज हम आपको ऐसे छोले भटूरे से रूबरू करवाते हैं जो साइज में तो किंग हैं ही स्वाद में भी बेमिसाल हैं। 14 इंच के भटूरे के साथ परोसे जाने वाले छोले अमेरिका से मंगाए जाते हैं। इन काबुली चने का आकार भी 14 एमएम होता है। इसी तरह किंग साइज भटूरे के साथ 6 इंच बड़े गुलाबजामुन का भी आप आनंद उठा सकते हैं, जो पनीर में बनाए जाते हैं। इन गुलाब जामुन के बनाने के लिए पनीर बाकायदा मुंबई से डेली फ्लाइट में जयपुर पहुंचता है। तो फिर देर किस बात की। राजस्थानी जायका में आज चखते हैं इन दोनों जायकों का स्वाद… मुंबई के रमेश चोना ने 1958 में क्रीम सेंटर की शुरुआत की थी। ये उस जमाने का मशहूर आइसक्रीम पार्लर हुआ करता था। लेकिन बाद में ये एक वेजिटेरियन रेस्टोरेंट के तौर लोगों के बीच लोकप्रिय हुआ। आज क्रीम सेंटर को तीसरी पीढ़ी के ऋषि चोना मैनेज करते हैं। मुंबई के क्रीम सेंटर पर किंग साइज के छोले भटूरे (चना भटूरा) का स्वाद एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी, कुशा कपिला और स्मृति ईरानी समेत कई बॉलीवुड स्टार्स भी चख चुके हैं। जयपुर में भी क्रीम सेंटर ने फ्रेंचाइजी आउटलेट शुरू किया है। जिससे मुंबई का देसी स्वाद जयपुर वासियों को भी उसी अंदाज के साथ सर्व किया जा सके। यूं तो रेस्टोरेंट के मेन्यू में कई फूड आइटम हैं, लेकिन किंग साइज के छोले भटूरे का स्वाद सबसे निराला है। आम जगह जहां भटूरे का साइज ज्यादा से ज्यादा 8-10 इंच का होता है, क्रीम सेंटर पर भटूरे का साइज़ 14 इंच का है। इसकी भी दो वैरायटी हैं। सादा भटूरा और पालक भटूरा, जिसे यहां की सिग्नेचर डिश चना (छोले) के साथ सर्व किया जाता है। साउथ अमेरिका से मंगवाते हैं चने जयपुर के वैशाली नगर स्थित क्रीम सेंटर आउटलेट के शेफ दीपक सिंह पटवा ने बताया कि भटूरे के साथ 14 एमएम साइज का चना सर्व होता है, वो साउथ अमेरिका से मंगाया जाता है। यही कारण है कि देश भर में जितने भी आउटलेट हैं, सभी पर छोले का एक जैसा स्वाद मिलता है। ये काबुली चले क्वालिटी में भी बेस्ट हैं। सीक्रेट है रेसिपी, स्वाद भी यूनिक शेफ दीपक सिंह पटवा ने बताया कि 14 इंच के भटूरे के साथ सर्व होने वाले छोले को 23 तरह मसालों के साथ बनाया जाता है। नमक, हल्दी, धनिया, लाल मिर्च के साथ सीक्रेट मसालों की पूरी रेसिपी तैयार की गई है। ये सीक्रेट मसाले मुंबई के क्रीम सेंटर के ओनर ऋषि चोना के परिवार ने इन हाउस तैयार किया है। इन मसालों का ही जादू है कि देशभर के सभी आउटलेट में छोले का स्वाद एक जैसा रहता है। क्योंकि सब जगह यही मसाले इस्तेमाल होते हैं। रेसिपी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाती। किंग साइज का सादा और पालक भटूरा शेफ दीपक सिंह पटवा ने बताया कि आमतौर पर लोग मैदा का भटूरा बनाते हैं। क्रीम सेंटर पर भटूरे में मैदे के साथ सूजी और गेहूं का आटा भी इस्तेमाल होता है। तीनों का अनुपात भी फिक्स रहता है। एक किलो मैदा में 200 ग्राम गेहूं का आटा और 50 ग्राम सूजी मिलाते हैं। आटा तैयार करने में दही का इस्तेमाल नहीं होता। पालक भटूरे तैयार करने के लिए पालक को पीसकर, उसी से आटा गूंथा जाता है। आगे बढ़ने से पहले देते चलिए आसान से सवाल का जवाब पनीर से तैयार होता है 6 इंच का गुलाब जामुन गुलाब जामुन का नाम आते ही गोल-मटोल और रस से भरी मिठाई ही याद आती है। लेकिन क्रीम सेंटर के ये गुलाब जामुन 6 इंच लंबे होते हैं। दिखने में ये बंगाली मिठाई पंतुआ जैसा होता है। गुलाब जामुन जहां बाहर से चिकने होते हैं, ये मिठाई दानेदार होती है। जयपुर के आउटलेट पर गुलाब जामुन तैयार करने के लिए मुंबई के क्रीम सेंटर से पनीर मंगाया जाता है। हर दिन फ्लाइट से पनीर जयपुर पहुंचता है। क्योंकि गुलाब जामुन बनाने के लिए सबसे पहले पनीर और मावे का एक मिक्सचर तैयार करना होता है। देसी घी में तैयार होने वाले गरमा गरम गुलाब-जामुन को ठंडी रबड़ी के साथ सर्व किया जाता है। कहां से आए छोले-भटूरे? छोले-भटूरे डिश की शुरुआत पंजाबी रसोइयों द्वारा मानी जाती है। यह भारत कैसे पहुंची, इसकी कई कहानियां हैं। ऐसी ही एक कहानी भारत विभाजन के दौरान 1947 की है। बताते हैं विभाजन के दौरान पाकिस्तान के पंजाब से दिल्ली आए सीताराम नाम के शख्स ने इसकी शुरुआत की थी। दिल्ली में सीताराम दीवान चंद नाम से दुकान खोल खमीरी रोटी (भटूरे) और छोले बेचना शुरू किए। इसका स्वाद धीरे-धीरे लोगों की जुबान पर चढ़ने लगा। आज यही छोले-भटूरे पूरे उत्तर भारत की पॉपुलर डिश है और कई इंटरनेशनल रेस्टोरेंट के मेन्यू का हिस्सा हैं। पिछले राजस्थानी जायका में पूछे गए प्रश्न का सही उत्तर ये है जयपुर की फेमस अखरोट की बर्फी। ये मिठाई कभी ‘उगम’ नाम से पाकिस्तान के सिंध में मशहूर होती थी। देश के बंटवारे से पहले जयपुर आकर बसे सिंध के एक परिवार ने इस मिठाई को पहली बार बनाया था। आज 79 साल से यह मिठाई गुलाबी नगरी का बेहतरीन जायका बनी हुई है। इसके दीवाने दुबई-अफ्रीका से लेकर लंदन तक हैं। राजस्थानी जायका की इस कड़ी में आपको लेकर चलते हैं जयपुर के उस ठिकाने पर जहां बनती है यह खास मिठाई…(CLICK कर पढ़ें)


