मनोरम वादियों में लोगों ने किया नए साल का आगाज, झूमे

भास्कर टीम|लोहरदगा जिले के दुर्गम अति नक्सल प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में बीते कुछ समयों की तरह इस वर्ष भी साल के पहले दिन सैलानियों की आमद रही। पेशरार के लावापानी सहित कुछ झरनों की पहाड़ी पर लोगों का जनसैलाब उमड़ा। वहीं सेन्हा प्रखंड के नंदगांव व कैरो प्रखंड के नंदनी डैम सहित इनके आसपास के इलाकों में पिकनिक स्पॉटों पर नए साल का आगाज करते हुए जिलेवासियों में खूब उत्साह दिखा। नए साल का जश्न 31 दिसंबर की आधी रात से ही शुरू हो चुकी थी। पिकनिक स्पॉटों पर सुबह से देर शाम लगभग पांच बजे तक लोगों की काफी भीड़ रही। संबंधित थानों की पुलिस कई पिकनिक स्पाटों पर लोगों की सुरक्षा को लेकर चौकन्नी दिखी। युवा वर्ग की टोलियों में पिकनिक को लेकर उत्साह चरम पर था। ये वर्ग अपनी धुन में घंटों नाचते गाते रहे। कई स्थानों पर लोगों ने सामूुहिक रूप से पकवान बनाकर खाने का भी आनंद लिया। धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों ने नये साल की शुरूआत मंदिर, मस्जिद और चर्चों में प्रार्थना कर की। सबसे ज्यादा भीड़ लावापानी, कुडू प्रखंड के कांति जलप्रपात, बड़की चांपी क्षेत्र के रेलवे पुलिस का 27 नंबर, नंदलाल फॉर्म में दक्षिणी कोयल नदी के तट पर लोगों ने पिकनिक का लुत्फ उठाया। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सदर थाना प्रभारी रत्नेश मोहन ठाकुर तैनात नजर आए। भास्कर न्यूज | सिमडेगा सलडेगा स्थित सरना मंदिर में नववर्ष पर तुलसी पूजन एवं मातृ-पितृ पूजन का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर क्षेत्र की अनेक श्रद्धालु महिलाएं एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित हुए। जिनमें प्रमुख रूप से निराला देवी, संतोषी देवी, द्रोपदी देवी, बेलावती, अजीता, शीतल प्रसाद, राहुल कुमार, प्रदीप एवं सुरेंद्र सम्मिलित थे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार तुलसी पूजन से हुई। तुलसी को भारतीय संस्कृति में देवी स्वरूप माना जाता है और इसे सुख-शांति एवं आरोग्य का प्रतीक कहा गया है। तुलसी पूजन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने तुलसी के महत्व को समझते हुए उसके संरक्षण का संकल्प लिया। इसके पश्चात मातृ-पितृ पूजन का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों एवं युवाओं ने अपने माता-पिता के चरण धोकर उन्हें तिलक लगाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। बताया गया कि इस पूजन का उद्देश्य परिवार में आपसी स्नेह,आदर और प्रेम को बढ़ावा देना था। वक्ताओं ने कहा कि माता-पिता हमारे प्रथम गुरु होते हैं और उनका सम्मान हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। कार्यक्रम के दौरान भजन मंडली द्वारा सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी गई। जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों ने उपस्थित लोगों को आस्था से जोड़ते हुए आत्मिक शांति प्रदान की। समारोह के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं और समाज में प्रेम,एकता और भाईचारे का संदेश फैलाने का आह्वान किया। इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में संस्कारों और परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास भी हैं। इस पवित्र आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक लाभ प्रदान किया,बल्कि समाज के हर वर्ग को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य भी किया। कार्यक्रम का समापन निराला देवी के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ। जिसमें उन्होंने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

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