कोटपूतली के बोरवेल में गिरने से 3 वर्षीय चेतना की मौत के बाद सरकार ने जिला प्रशासन को आदेश देकर ऐसे खुले मौत के बोरवेल को बंद करने निर्देश दिए है, लेकिन बाड़मेर में पीएचईडी की ओर से 1968 में खोदे ऐसे दर्जनों की संख्या में बोरवेल खुले पड़े है। बाड़मेर शहर, बीएसएफ, सेना और अन्य गांवों को पेयजल सप्लाई देने के लिए भाडखा इलाके में करीब पिछले 40-50 साल में 80 से ज्यादा बोरवेल खोदे गए। इनमें 50 बोरवेल ऐसे है, जिनमें पानी सूख जाने से फेल हो गए। ऐसे में पीएचईडी ने ऐसे बोरवेल से मोटर व अन्य मशीनरी, केबल व पाइप निकाल कर दूसरे बोरवेल की खुदाई कर उसमें डाल दिए, जबकि जो बोरवेल फेल हुए है, उन्हें बंद करना भूल गई। भाडखा में ऐसे करीब 20 से ज्यादा बोरवेल है, जो खुले पड़े है। जबकि सेना को पानी सप्लाई के लिए जो बोरवेल थे, वो फेल होने के बाद ढके हुए है। राजस्थान में एक के बाद एक बढ़ रहे हादसों के बाद भी पीएचईडी की ओर से इन्हें बंद नहीं किया गया है। जलदाय विभाग बाड़मेर राइजेप खंड के अधीन भाडखा गांव से बाड़मेर शहर, सेना, बीएसएफ और उत्तरलाई एयरफोर्स को भी 1968 के बाद से पानी की सप्लाई दी जाती थी। शहर के आसपास भाडखा के अलावा कहीं मीठा पानी नहीं था। ऐसे में पीएचईडी की ओर से पिछले 40 साल में 80 से ज्यादा बोरवेल की खुदाई की गई और इनसे शहर और गांवों की करीब 2 लाख आबादी को पानी सप्लाई दी जा रही थी। 2012 में इंदिरा गांधी लिफ्ट कैनाल से बाड़मेर शहर, बीएसएफ, सेना और एयरफोर्स को पानी की सप्लाई देना शुरू कर दिया। इसके बाद से भाडखा में पुराने बोरवेल बंद हो गए। जलदाय विभाग ने यहां सूखे बोरवेल से मशीनरी सामान निकाल दिया और खुले छोड़ दिए। अब ये मौत के बोरवेल हादसों को निमंत्रण दे रहे हैं। जबकि आसपास में भाडखा, बोथिया, कपूरड़ी सहित कई गांवों की आबादी क्षेत्र है। 2 दिन सरकार ने दिए आदेश ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के जिला परिषद सीईओ को आदेश दिए है कि प्रत्येक खुले बोरवेल को बंद करने के लिए सभी अधिकारियों को निर्देशित करे। कोई अगर बोरवेल खुला नहीं छोड़ा जाए और जो खुले बोरवेल है, उन्हें भर दिया जाए या ढक्कन लगाकर बंद किया जाए। अगर कोई विभाग, संस्था या निजी व्यक्ति समय रहते खुले बोरवेल को बंद नहीं करता है तो उनके खिलाफ कार्यवाही करने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी गई है। पटवारी-वीडीओ ने लकड़ी के ठूंठ से बोरवेल बंद किए गडरा रोड़ | खुले ट्यूबवेल में मासूम बच्चों के गिरने की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए सरकार की सख्ती के बाद गडरारोड इलाके के अकली गांव में पटवारी व वीडीओ ने खुले बोेरवेल को बंद किया, लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि इसके लिए अधिकारियों ने कवर लगाने की बजाय आसपास के खेत से लकड़ी ठूंठ उठा कर बोरवेल में डाल दिया। जबकि सरकार ने पंचायत स्तर पर कवर लगाकर बंद करने के आदेश दे रखे हैं। भारत-पाक बॉर्डर के नजदीक स्थित अकली सहित कई अन्य गांवों में जैसिंधर स्टेशन पटवारी रोहिताश मीणा व ग्रामसेवक केशव कुमार बैरवा द्वारा बोरवेल को ढका गया। बॉर्डर इलाके में कई जगह अब भी बोरवेल खुले पड़े हैं। “सरकार से आदेश मिले है, जहां भी अगर बोरवेल खुले है तो हम जल्द बंद कर देंगे।” -जयरामदास, एक्सईएन, राइजेप


