भ्रष्टाचार और मिलीभगत से हुआ घटिया निर्माण:आईटीआई छात्रों के विकास कोष के 38.46 लाख रुपए खर्च जी-शिड्यूल के तहत नहीं हुआ निर्माण और मरम्मत कार्य

औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र में निर्माण एवं मरम्मत कार्य के नाम पर स्टूडेंट्स के सालों से जमा विकास कोष के 38.46 लाख रुपए खर्च तो हो गए, लेकिन न जी-शिड्यूल के मुताबिक निर्माण कार्य हुआ और न ही मरम्मत हुई। भवन में कहीं-कहीं ताे दीवारों का प्लास्टर ही नहीं किया है और रंग-रोगन घटिया होने से उखड़ गया है। फर्श पर पत्थर लगाए तो उनकी घिसाई तक नहीं हुई। छत के पानी की न ठीक निकासी है और न छत के ड्रेनेज के लिए ढाल बनाया है। छत के जोड़ों से पानी रिसता है। कमरे व शौचालयों के पानी के निकलने का कोई रास्ता नहीं है। शौचालय कक्ष की ज्यादातर टाइल्स उखड़कर टूट गई हैं। हाल ये है कि निर्माण व मरम्मत का काम होने के बाद भी नहीं लगता कि कुछ काम हुआ है। जब भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं व भवन निर्माण में घोटाले की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई केन्द्र पर हुई तो एडीएम सिटी ने एसडीएम की अध्यक्षता में 13 मई, 2024 को चार सदस्यीय जांच कमेटी बनाई, लेकिन करीब 7 माह का समय बीत जाने के बाद भी न तो जांच सामने आई और न ही कोई कार्रवाई ही हुई। इसके अलावा आईटीआई ने खुद अपने स्तर पर इंटरनल भी 5 सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच कराई, जिसने जी-शिड्यूल के मुताबिक व गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होना पाया और अपूर्ण माना। वहीं संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण प्राविधिक शिक्षा क्षेत्रीय कार्यालय भरतपुर ने भी जांच की, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस हैं। कॉलेज प्रशासन को आजतक पीडब्ल्यूडी ने 38.46 लाख रुपए का बिल आदि कोई हिसाब नहीं दिया है, जबकि वह उस राशि की उपयोगिता का प्रमाण पत्र मांगने के लिए कई बार लिख चुका है। निर्माण और मरम्मत में ये छोड़ी मुख्य कमियां जांच में मिलीं कमियां , पीडब्ल्यूडी ने नहीं दिया 38.46 लाख रुपए का हिसाब “संस्थान के निर्माण व मरम्मत के कार्य के लिए 38.46 लाख रुपए की राशि पीडब्ल्यूडी को दी गई थी। निर्माण व मरम्मत के कार्य में कमी को लेकर पीडब्ल्यूडी को लिखा गया है। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी से काम पूरा होने के बाद खर्चे का बिल और उपयोगिता प्रमाण पत्र भी मांगा गया है, जिसके लिए पिछले माह रिमांइडर भी दिया है।”
-पुरुषोत्तम मीणा, उप निदेशक, औद्याेिगिक प्रशिक्षण संस्थान भरतपुर “आईटीआई संस्थान से मिली राशि में से सिविल वर्क का वर्कऑर्डर 25 लाख का 19 मार्च से 18 जुलाई 2023 तक था, बाकी राशि से इले​​क्ट्रिक विंग का काम हुआ। और कुछ विभाग के खर्चे भी शामिल होते हैं। जो कमी है, उसको ठीक कराया जाएगा। ठेकेदार का 3 लाख का पेमेंट रोका है। जबतक काम पूरा नहीं होगा पेमेंट नहीं करेंगे।”
-योगेश खंडेलवाल, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी

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