दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर के खिलाफ क्रिमिनल केस खारिज किया:कोरोना महामारी के दौरान दवाओं की जमाखोरी के आरोप लगे थे

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर के खिलाफ दवाओं की जमाखोरी और बिना लाइसेंस वितरण के क्रिमिनल केस को खारिज किया है। शुक्रवार को जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा- ‘गंभीर और उनके फाउंडेशन के खिलाफ आपराधिक शिकायत रद्द की जाती है।’ हाईकोर्ट ने 3 साल पहले 20 सितंबर 2021 को इस मामले में किसी भी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई थी। एक याचिका में गंभीर, उनकी पत्नी, मां और फाउंडेशन के खिलाफ ट्रायल कोर्ट के समन को चुनौती दी गई थी। इसमें क्रिमिनल शिकायत को रद्द करने की मांग की भी गई थी। 3 साल पहले हाई कोर्ट ने स्टे लगाया था
2021 में कुछ रिपोर्ट में दावा किया गया कि गंभीर का कार्यालय जरूरतमंदों को कोविड दवाएं बांट रहा है। विपक्ष ने इसे अवैध स्टॉकिंग कहा। जबकि, गंभीर ने दावा किया कि यह मानवीय आधार पर किया गया कार्य था। इससे किसी को नुकसान नहीं हुआ। इस पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ समन जारी कर दिया। कोविड के दौरान दवाई बांटी थी
दिल्ली सरकार के ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने पूर्वी दिल्ली के तत्कालीन सांसद गौतम गंभीर, उनके NGO, अपराजिता सिंह, गंभीर की मां सीमा गंभीर और पत्नी नताशा गंभीर के खिलाफ औषधि एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम की धारा 18(सी) के साथ धारा 27(बी)(2) के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। सीमा गंभीर और नताश गंभीर इस संगठन की ट्रस्टी हैं। धारा 18(सी) बिना लाइसेंस के दवाओं को उत्पादन, बिक्री और वितरण पर रोक लगाती है। जबकि, धारा 27(बी)(2) के तहत बिना वैध लाइसेंस के दवाएं बेचने और वितरण पर जेल की सजा का प्रावधान है। —————————————————————— गंभीर से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… कोटक बोले-गंभीर को अपने स्वार्थ के लिए क्रिटिसाइज कर रहे भारत के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने कहा है कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के कारण केवल गंभीर को क्रिटिसाइज कर रहे हैं। उन्होंने इसे कहा- हर कोई गंभीर को दोष दे रहा, यह एजेंडा जैसा लगता है। भारतीय कोच ने कप्तान शुभमन गिल के गुवाहाटी टेस्ट में खेलने या न खेलने पर भी बात की। पढ़ें पूरी खबर

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