छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) ने राज्य सेवा परीक्षा 2024 के फाइनल रिजल्ट 20 नवंबर की देर रात जारी कर दिए हैं। टॉप 10 में बिलासपुर की दो लड़कियों ने अपनी जगह बनाई है, जिसमें शताक्षी पांडेय महिला वर्ग से टॉपर रहीं हैं। उन्होंने दो बार एग्जाम में असफल होने के बाद टीचर का जॉब छोड़कर तैयारी की। वहीं, बिलासपुर के ही सृष्टि गुप्ता महिला वर्ग से दूसरे और ओवर ऑल 8वें स्थान पर जगह बनाई है। बिलासपुर की लिंक रोड की रहने वाली शताक्षी पांडेय ने दैनिकभास्कर से अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि वो लगातार मेहनत और आत्मविश्वास से उन्हें सफलता मिली है। जब शताक्षी बारहवीं क्लास में थी, तब ये तय नहीं किया था वो पीएससी की तैयारी करेगी। यही वजह है कि उन्होंने बारहवीं के बाद इंजीनियरिंग की। जिसके बाद कम्प्यूटर साइंस का कोर्स किया। इसके साथ-साथ ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। दो बार असफल हुई तो टीचर का जॉब छोड़ा
शताक्षी बताती हैं कि इंजीनियरिंग और कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। इस बीच उन्हें दो बार असफलता हाथ लगी। इस दौरान शताक्षी स्वामी आत्मानंद स्कूल में टीचर का जॉब भी करने लगी। इस बार परीक्षा की तैयारी करने के पहले उन्होंने अपना जॉब छोड़ दिया। जिसके बाद परिणाम ये आया कि उनका सिलेक्शन हो गया। अपनी खामियों की पहचान कर की जाए तैयारी
शताक्षी का कहना है कि किसी भी एग्जाम में असफल होने पर निराश नहीं होना चाहिए। बल्कि, अपनी कमियों की पहचान कर दोबारा मेहनत करें तो निश्चित ही सफलता मिलती है। लगातार मेहनत और लगन के साथ तैयारी करने से सफलता जरूर मिलती है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कोचिंग से गाइडेंस मिलता है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि कोचिंग जरूरी है। कांग्रेस नेता राजेंद्र की भांजी है शताक्षी शताक्षी पांडेय कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला की भांजी है। इससे पहले CG-PSC एग्जाम में राजेंद्र शुक्ला के बेटे स्वर्णिम शुक्ला भी सफल हुए थे, जिसमें उन्हें डिप्टी कलेक्टर का पद मिला। स्वर्णिम को देखकर ही शताक्षी ने भी तैयारी की और दो बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी। सृष्टि की सफलता पर ढोल-ताशों पर झूमे घरवाले
CG-PSC 2024 की परीक्षा में बिलासपुर की सृष्टि गुप्ता ने महिला वर्ग पर दूसरा स्थान हासिल की है। जबकि, ओवर ऑल उन्हें आठवां रैंक मिला है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगियों को असफलता से निराश नहीं होना चाहिए। क्योंकि, एक बार में ही सफल हो यह जरूरी नहीं। दूसरी बार में ये देखें कि क्या कमी रही, जिसके कारण आप असफल हुए। सृष्टि की सफलता पर परिवार के साथ ही मोहल्ले के लोग भी खुश हैं। यही वजह है कि उनके घर में ढोल-ताशों की धुन पर थिरकते नजर आए।


