छत्तीसगढ़ में DMF घोटाला केस में जेल में बंद कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी की जमानत याचिका पर EOW कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट किसी भी वक्त जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगा। आरोप है कि मनोज ने अपनी बनाई NGO में DMF फंड की राशि हासिल की। इसके बाद कमीशन तत्कालीन IAS रानू साहू तक पहुंचाया था। और वे जिस NGO में सचिव था उसके NGO को कई ठेके मिले थे। 42 प्रतिशत तक दिया गया कमीशन इस मामले की EOW और ED दोनों जांच कर रही है। ED की जांच में पता चला कि, 2021-22 और 2022-23 में मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित IAS रानू साहू और अन्य अधिकारियों से मिलीभगत की। अपने एनजीओ उदगम सेवा समिति के नाम पर कई डीएमएफ ठेके हासिल किए थे। अधिकारियों को टेंडर की राशि का 42% तक कमीशन दिया था। 17 करोड़ 79 लाख की हेराफेरी ED ने जांच में पाया कि, मनोज कुमार द्विवेदी ने DMF फंड की हेराफेरी कर 17 करोड़ 79 लाख रुपये कमाए। इसमें से 6 करोड़ 57 लाख रुपये अपने पास रख लिए। बाकी रकम रिश्वत के रूप में अधिकारियों को दी। ठेका के लिए जिला स्तर के अधिकारियों से मिलीभगत की और उनकी मदद की। DMF घोटाला क्या है प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। केस में यह तथ्य निकल कर सामने आए हैं कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता पाई गई। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ED की जांच के बाद अब EOW की टीम अपनी जांच तेज कर दी है। 90 करोड़ का घोटाला ED की जांच ने DMF घोटाले के तौर-तरीकों का खुलासा किया है। इसमें यह बात सामने आई है कि ठेकेदारों के बैंक खाते में जमा की गई राशि का बड़ा हिस्सा ठेकेदारों ने सीधे कैश में निकाल लिया है। जांच के दौरान ED ने ठेकेदारों, सरकारी और उनके सहयोगियों के अगल-अगल ठिकानों पर रेड मारी थी।


