DNT जातियों की बहिष्कार रैली:मुख्यमंत्री का पुतला फूंका, विमुक्त-घुमंतू जातियों के लिए आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग

– जोधपुर में राईका बाग से कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली, , रेनके व इदाते आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग को लेकर महाआंदोलन की चेतावनी जोधपुर। प्रदेश में राईका, कालबेलिया सहित 51 विमुक्त और घुमंतू जातियों की विभिन्न मांगों को लेकर डीएनटी संघर्ष समिति के तत्वावधान में सोमवार को जोधपुर शहर के राईका बाग क्षेत्र से कलेक्ट्रेट तक रैली निकाल प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री का पुतला जलाकर रेनके व इदाते आयोग की सिफारिशें लागू करने सहित 9 मांगों को पूरा करने और ऐसा नहीं होने पर जयपुर में महाआंदोलन की चेतावनी भी दी गई। समिति के अध्यक्ष लालजी राईका और सह-संयोजक रतननाथ कालबेलिया ने बताया कि राजस्थान सरकार ने विमुक्त, घुमंतू और अर्द्ध घुमंतू समाजों के लिए रेनके आयोग और इदाते आयोग की सिफारिशें लागू नहीं की है। इसी के विरोध में प्रदेश की ऐसी सभी 51 जातियों द्वारा संयुक्त रूप से ‘बहिष्कार आंदोलन’ करते हुए डीएनटी वर्ग बनाने की मांग की जा रही है। इन्ही रिपोर्ट के आधार पर संघर्ष समिति ने नौ मांगों का एक चार्टर बनाया है जिसमें 10 प्रतिशत आरक्षण में आरक्षण जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णय में कहा है। साथ ही पंचायतों में 10 प्रतिशत भागीदारी, आवास और शिक्षा की विशेष व्यवस्था की मांग की गई है। देवासी के अनुसार इन समाजों की प्रदेश में तकरीबन डेढ़ करोड़ की आबादी है और इन समाजों ने राजस्थान सरकार को आज़ादी से लेकर अब तक पाँच लाख करोड़ का टैक्स दिया है, लेकिन उसका 10 प्रतिशत भी इन समाजों के विकास पर खर्च नहीं किया गया। डीएनटी मांग पत्र: – विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू की जो सूची बनाई है, उसमें विसंगतियों को दूर किया जाए। जैसे रैबारी लिखा है, लेकिन देवासी और राईका नहीं लिखा होने, जोगी कालबेलिया को एक लिख दिया है, जबकि दोनों समाज अलग-अलग है। बंजारा और गाड़िया लुहार समाजों के नामों में भी विसंगतियाँ है। इसी प्रकार कुछ जातियाँ घुमंतू हैं, लेकिन उनका सूची में नाम नहीं है- जैसे मिरासी, उन समाजों का नाम शामिल किया जाये। – डीएनटी समाज को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थाओं में 10% आरक्षण दिया जाये, जिसकी सिफ़ारिश रेनके आयोग ने भी की है। राजस्थान में इन जातियों की अनुमानित जनसंख्या क़रीब 15% है, इसलिए 10% आरक्षण की माँग है। इन जातियों में अधिकतर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल है, लेकिन इनको कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ‘आरक्षण के भीतर आरक्षण’ के तहत इन समाजों को अलग से 10% आरक्षण मिले। – पंचायती राज्य संस्थाओं और शहरी निकायों में इनके लिए 10% सीटें आरक्षित की जाये। जहाँ पर इनके आवास हैं या बाड़े हैं, उसी को नियमित पर पट्टे दिए जाए। – आवासहीनों को शहर में 100 वर्ग गज और गांवों में 300 वर्ग गज आवास के लिए और 300 वर्ग गज पशुओं के बाड़े के लिए दी जाये। – शिक्षा के लिए शिक्षा बजट का 10 % हिस्सा अलग किया जाये और उसमें से इनके लिए आवासीय विद्यालय, कला महाविद्यालय, आंगनबाड़ी, हॉस्टल, कौशल कॉलेज आदि खोले जाएं। – कहीं भी शिक्षा की सुविधा और बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून में निजी स्कूलों में प्रवेश प्राथमिकता दी जाए। – महिलाओं और युवाओं को आधुनिक उद्योग जैसे इलेक्ट्रॉनिक, आईटी क्षेत्र की ट्रेनिंग देकर रोज़गार दिया जाये। साथ ही सभी प्राइवेट उद्योगों को इस समाजों के लोगों को रोज़गार देने का लक्ष्य दिया जाये। इसी तरह, हर साल एक हजार विद्यार्थियों को सरकार के खर्च पर विदेश में शिक्षा के लिए भेजा जाए।

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