गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में 12वीं बोर्ड की संस्कृत विषय की परीक्षा 25 फरवरी बुधवार को आयोजित की गई थी। हालांकि, जिले में संस्कृत विषय का एक भी विद्यार्थी न होने के कारण किसी भी परीक्षा केंद्र पर परीक्षा नहीं हुई और सभी केंद्र खाली रहे। यह स्थिति तब है जब जिले में संस्कृत विषय के पर्याप्त व्याख्याता मौजूद हैं। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि जिले के 35 हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों ने 10वीं पास करने वाले विद्यार्थियों को 11वीं में संस्कृत विषय चुनने के लिए प्रेरित नहीं किया। प्राचार्यों की संस्कृत पढ़ाने में रुचि न लेने को भी इस स्थिति का एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है, जिसके चलते पूरे जिले में संस्कृत का एक भी विद्यार्थी नहीं है। 9-10 में संस्कृत अनिवार्य नहीं रखने का निर्णय संस्कृत को हाई स्कूल (9-10) में अनिवार्य न रखने का निर्णय मुख्य रूप से 2016 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लिया गया था। इसका उद्देश्य स्कूलों में त्रि-भाषा फॉर्मूला को अधिक लचीला बनाना था। फरवरी 2016 में ही यह स्पष्ट किया गया था कि स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य करने की आवश्यकता नहीं है। नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, संस्कृत एक महत्वपूर्ण विषय है, लेकिन इसे छात्रों पर थोपा नहीं जाएगा। 11वीं में संस्कृत पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को किया जाएगा प्रेरित इस मामले में डीईओ रजनीश तिवारी ने बताया कि नए शिक्षण सत्र में 11वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को संस्कृत पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए प्राचार्यों को निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि हायर सेकेंडरी स्तर पर संस्कृत विषय की पढ़ाई सुनिश्चित की जा सके।


