HM हाउस से निराश लौटे CAF कैंडिडेट:12 घंटे इंतजार के बाद भी नहीं हुई मुलाकात, आरोप: अधिकारियों ने गृह मंत्री को जानकारी नहीं दी

छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्ड (CAF) के वेटिंग कैंडिडेट पिछले 50 दिनों से नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान कई दफा गृहमंत्री विजय शर्मा से मुलाकत करने उनके बंगले पहुंचे है। दो-तीन बार मुलाकात हुई। लेकिन कोई सपष्ट जवाब नहीं मिला। ऐसे में कैंडिडेट्स लगातार गृहमंत्री शर्मा के बंगले लगातार पहुंच रहे हैं। इसके पीछे कैंडिडेट्स का कहना है कि पहली तीन मुलाकात के बाद गृहमंत्री के अधिकारी अब उन्हें मंत्री शर्मा से मिलने ही नहीं दे रहे हैं। दरअसल, पहली मुलाकात में गृहमंत्री ने कैंडिडेट्स को कोर्ट जाने को कह दिया था। दूसरी मुलाकात में उन्होंने सीएम से पूरे मामले में बात करने का आश्वासन दिया था। तीसरी मुलाकात में उन्होंने कैंडिडेट्स को बताया था कि सीएम से बात नहीं हो पाई है। वो बात करेंगे। बातचीत का अपडेट जानने के लिए ही कैंडिडेट्स लगातार गृहमंत्री हाउस पहुंच रहे हैं। कैंडिडेट्स का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उनकी मांग को सही बताया है। उनके समर्थन में लेटर भी लिख चुके है। लेकिन गृहमंत्री के यहां से उन्हें कोई रिप्लाई नहीं मिल रहा है। सोमवार को भी कैंडिडेट्स का डेलिगेशन सुबह से शाम तक गृहमंत्री हाउस के बाहर डटे रहे।लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। कैंडिडेट्स का आरोप है कि सुबह गृहमंत्री हाउस के अधिकारियों ने उन्हें तस्वीर खींचने के बहार ले गए। और गृहमंत्री से मुलाकात किए बगैर निकल गए। शाम को भी लंबे इंतजार के बाद कैंडिडेट्स से ये कह दिया गया कि मंत्री विजय शर्मा रेस्ट रूम में जा चुके हैं। अगली सुबह आइए। मुलाकात नहीं हो पाने से कैंडिडेट्स से भारी नाराजगी है।
अब समझिए भर्ती का पूरा मामला 7 साल पहले 2018 में जब भर्ती आई थी, तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। मेरिट लिस्ट के बाद वेटिंग लिस्ट जारी की गई थी। मेरिट लिस्ट में शामिल युवाओं की भर्ती कर ली गई। वेटिंग लिस्ट वाले 417 कैंडिडेट्स से कहा गया कि अभी पद खाली नहीं है, ऐसे में उनकी भर्ती रोक दी गई है। 50 प्रतिशत से ज्यादा कैंडिडेट ओवर एज लेकिन आगे मेरिट लिस्ट में शामिल कई कैंडिडेट्स मेडिकल में आउट हो गए, कुछ ने नौकरी छोड़ दी। सीट खाली हुई, लेकिन इन सब के बीच सरकार भी बदल गई। कांग्रेस ने इन वेटिंग लिस्ट वाले कैंडिडेट्स की भर्ती पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। वक्त के साथ इन 417 में से 250 से ज्यादा यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा कैंडिडेट ओवर एज हो गए हैं। आगे किसी भर्ती के काबिल नहीं हैं। दरअसल, जब भर्ती हुई थी उस वक्त सभी अभ्यर्थी 28 से 32 वर्ष के थे, लेकिन ज्वॉइनिंग नहीं मिलने से आज इन्हीं अभ्यर्थियों की उम्र 36 से 40 साल पहुंच गई है। अभ्यर्थियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल के पास जाकर गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं मिल सकी। आर्म्स फोर्स में पिछले 6 साल से भर्ती भी नहीं 2018 से लेकर अब तक कई पद खाली हो चुके हैं। इन पदों पर भर्ती नहीं हुई है। पिछले 6 सालों में अब तक सीएएफ में भर्ती नहीं हुई है। जानकारी के मुताबिक, जब तक नई वैकेंसी नहीं आ जाती, तब वेटिंग लिस्ट वाले कैंडिडेट्स वैलिड ही माने जाते हैं। अगर शासन चाहे तो अभी भी इन्हें रिक्त पदों पर भर्ती कर सकती है। मौजूदा स्थिति में 65,439 जवान कार्यरत छत्तीसगढ़ में पुलिस बल में हजारों पद रिक्त हैं। यह रिक्तियां करीब 10 से 15 साल से हैं। इसके बाद भी इन पदों पर भर्तियां नहीं हो रही है। इधर छत्तीसगढ़ की जनसंख्या भी तेजी से बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस के पास डिस्ट्रिक्ट एक्जीक्यूटिव फोर्स, छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स और छत्तीसगढ़ टेलीकॉम फोर्स में कुल 83,259 पद स्वीकृत हैं। इनमें से मौजूदा स्थिति में 65,439 जवान कार्यरत हैं। लेकिन 17,820 पद लंबे समय से खाली हैं। प्रदेश में 13 IPS तो 129 DSP की जरूरत छत्तीसगढ़ में पुलिस बल में जवानों की कमी की वजह से लगातार कार्यरत अफसरों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुलिस बल को अभी 13 आईपीएस अफसरों की जरूरत है। प्रदेश में 142 स्वीकृत पदों में वर्तमान में 129 आईपीएस अफसर कार्य कर रहे हैं। वहीं पुलिस बल में डीएसपी/एएसपी के 513 पद स्वीकृत हैं। इसमें 384 डीएसपी ही कार्यरत हैं। प्रदेश को अभी भी 129 डीएसपी की जरूरत है। इसके अलावा इंस्पेक्टर के 64 पद भी रिक्त पड़े हैं। कॉन्स्टेबल और सूबेदार के ज्यादातर पद खाली पुलिस विभाग में सूबेदार का मुख्य काम कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों की जांच करना और थाना स्तर पर प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करना होता है। वहीं कॉन्स्टेबल जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा पेट्रोलिंग, जांच में सहायता, FIR दर्ज करना, और विशेष आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का काम करते हैं। लेकिन प्रदेश में सूबेदार के 80 स्वीकृत पदों में केवल 3 सूबेदार ही काम कर रहे हैं। दूसरी ओर हेड कॉन्स्टेबल के 827 और कॉन्स्टेबल के 10436 पद अभी भी रिक्त हैं। जांच हो रही प्रभावित पुलिस बल की कमी की वजह से प्रदेशभर में अपराधों की जांच पेंडिंग है। रिक्त पदों के भरने से अपराधों की जांच में तेजी आएगी। इधर, रायपुर जिले में अपराधों की जांच बेहतर और जल्द होने का दावा है। रायपुर में साल 2024 में 17693 अपराध दर्ज किए गए थे। जनवरी 2025 तक 1713 मामले पेंडिंग थे। अक्टूबर 2024 में पुलिस बल में भर्ती निकाली गई। इस भर्ती के माध्यम से कुल 341 पदों को भरा जाना है। जिसमें 278 एसआई के पद, 19 सूबेदार, 14 प्लाटून कमांडर, 11 उप निरीक्षक (विशेष शाखा), 4 उप निरीक्षक (अंगुल-चिन्ह), 1 उप निरीक्षक (प्रश्नाधीन दस्तावेज) जैसे पद शामिल है। इसके अलावा 5 उप निरीक्षक (कंप्यूटर) और 9 उप निरीक्षक (साइबर क्राइम) के पदों पर भर्ती होनी है। लेकिन इसकी प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। वहीं कॉन्स्टेबल की भर्ती भी नहीं हो सकी है। ………………………………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… CAF अभ्यर्थियों ने पूछा-क्यों न हम नक्सली बन जाएं:गृहमंत्री शाह को लिखा पत्र, कहा-सरेंडर करने पर नक्सलियों को सुविधाएं,लेकिन क्वालिफाई कैंडिडेट को नौकरी नहीं छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स (CAF) की 2018 आरक्षक भर्ती विवादों में है। कोर्ट के आदेश के बाद भी 8 साल से वेटिंग लिस्ट के 417 अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं हुई। अभ्यर्थियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेटर लिखा है। पूछा है कि नौकरी नहीं मिलने पर क्यों न हम नक्सली बन जाएं। पढ़ें पूरी खबर…

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