IJR-2025 में मप्र की ओवरऑल रैंकिंग में सुधार:जेल व्यवस्था-कानूनी सहायता में बेहतर प्रदर्शन, HC जज-जेल अधिकारियों की नियुक्ति में पिछड़ा

भारत में न्याय व्यवस्था पर इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (IJR) की 2025 की ओवरऑल रैंकिंग में मध्य प्रदेश को सातवां स्थान मिला है। इसके पहले वर्ष 2022 में प्रदेश की आठवीं रैंकिंग थी। मध्यप्रदेश ने कानूनी सहायता में पांच पायदान ऊपर चढ़कर 9वां और जेल व्यवस्था में 5वां स्थान हासिल किया है। हालांकि पुलिस व्यवस्था के मामले में प्रदेश के प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की गई है। 2022 में जहां पुलिस व्यवस्था के मामले में मप्र 7वें स्थान पर था, वहीं 2025 में चार स्थान लुढ़क कर 11वें स्थान पर पहुंच गया है। इसके साथ ही मप्र में जेल अधिकारियों के लगभग 43 प्रतिशत पद भी रिक्त हैं। यह विश्लेषण 1 करोड़ से अधिक आबादी वाले 18 बड़े और मध्यम आकार के राज्यों के बीच किया गया है। इस रैंकिंग में कर्नाटक देश के सभी राज्यों में टॉप पर है, इसके बाद आंध्र प्रदेश दूसरे, तेलंगाना तीसरे और केरल छठे स्थान पर हैं। इसके पहले 2022 में आंध्रप्रदेश पांचवें स्थान पर था। 1 करोड़ से कम आबादी वाले छोटे राज्यों में सिक्किम ने फिर से पहला स्थान हासिल किया, इसके बाद हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश हैं। टाटा ट्रस्ट ने की थी रैंकिंग की शुरुआत द इंडिया जस्टिस रिपोर्ट (IJR) की शुरुआत टाटा ट्रस्‍ट ने की थी। इसकी पहली रैंकिंग 2019 में प्रकाशित हुई थी। यह रिपोर्ट का तीसरा संस्‍करण है, जिसे सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, कॉमन काज, कॉमनवेल्‍थ ह्यूमन राइट्स इनिशियेटिव, दक्ष, टीआई एसएस-प्रयास, विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी और IJR के डेटा पार्टनर हाऊ इंडिया लिव्‍स जैसे भागीदारों ने मिलकर बनाया है। मप्र के बारे में इंडिया जस्टिस रिपोर्ट कहती है कि- न्याय व्यवस्था में तुरंत और बड़े बदलाव की जरूरत है। इसने खाली पदों को जल्दी भरने और सभी तरह के लोगों को न्याय व्यवस्था में शामिल करने पर जोर दिया है। असली बदलाव लाने के लिए न्याय देना एक आवश्‍यक सेवा होना चाहिए। कानूनी सहायता बजट में सबसे अधिक हिस्सेदारी वाला राज्य मध्य प्रदेश अपने कुल कानूनी सहायता बजट में 91% योगदान देता है। इसने डी-एलएसए सचिवों की रिक्तियों को भी कम किया है।‌‌ ‌‌‌वर्ष 2022 में 31% से 2025 में 2% तक यह आया है। लोक अदालतों में लिए गए प्री-लिटिगेशन मामलों का निपटान दर 91.6% (2023-24) था जो टॉप पांच में है। प्रशिक्षण संस्थानों में कमी, आरक्षित पदों पर रिक्तियां मध्य प्रदेश पुलिस की रैंकिंग इस साल 7वें से 11वें स्थान पर गिर गई। राज्य में पुलिस के लिए 8 प्रशिक्षण संस्थानों की कमी है। प्रति प्रशिक्षण संस्थान पुलिस कर्मियों की संख्या भी एक साल में लगभग दोगुनी हो गई है। पुलिस एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षित किसी भी पद को पूरी तरह से भरने में सक्षम नहीं रही। पुलिस में महिलाओं की हिस्सेदारी 7.1% है। हालांकि कम से कम एक सीसीटीवी कैमरे वाले पुलिस स्टेशनों (98%) और महिला सहायता डेस्क (82%) के हिस्से में सुधार हुआ है। जिला अदालतों में केस निराकरण की दर पहली बार 100 से अधिक जिला अदालतों के जजों की रिक्तियों में सुधार हुआ है। वर्ष 2022 में 23.8% से घटकर यह 2025 में 16.6% तक आया है। इसके साथ जिला अदालतों में केस निपटान दर IJR 2019 के बाद पहली बार 100 से अधिक हो गई। जिला अदालतों में 40.6% जज महिलाएं हैं, जबकि हाई कोर्ट में यह 3% है। हाई कोर्ट में जजों की रिक्तियां लगभग 38% हैं। राज्य की जेलों में 164% ऑक्‍यूपेंसी रेट मध्य प्रदेश ने विचाराधीन कैदियों का हिस्सा 2020 में 70% से घटाकर 2022 में 55% कर दिया था, जिससे यह देश में सबसे कम विचाराधीन कैदी वाला राज्य बन गया। इसने चिकित्सा अधिकारी की रिक्तियों को 2021 में 72.4% से 2022 में 31% तक कम किया जिससे चिकित्सा अधिकारियों के कार्यभार में सुधार हुआ। इन कारकों ने इसे इस साल जेलों में शीर्ष 5 स्थानों में रैंक दिलाने में योगदान दिया। हालांकि राज्य की जेलों की औसत ऑक्‍यूपेंसी रेट 164% है। 40% जेलों में ऑक्‍यूपेंसी 150-250% के बीच है, जबकि 12% में 250% से अधिक है। जेल कर्मचारियों में अधिकारियों की 43% रिक्तियां हैं।

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