JCB बेचकर आए रुपयों से कार लेने वाला था:परिजन 22 दिन तक तालाब-नदियां तलाशते रहे; 39वें दिन गाड़ी में मिली 2 दोस्तों की लाश

टोंक में दो लापता दोस्तों के शव तालाब में 39 दिन बाद डूबी हुई कार में मिले। परिजन 22 दिन तक उन्हें इलाके के तालाबों, नदियों और परिचितों के यहां तलाशते रहे। इसके बाद सोचा कि दोनों ड्राइवरी करते हैं, हो सकता है कि कहीं बुकिंग लेकर चले गए हो। जब दोनों के शव कार में मिले तो परिजनों की सारी उम्मीद खत्म हो गई। सारी बातें धरी की धरी रह गई। युवक के जीजा ने बताया कि महावीर और राकेश दोनों साथ रहते थे। महावीर ने हाल ही में JCB बेची थी, उसके रुपए आने थे। उसी से वह कार लेने वाला था और उसकी इजाजत लेने के लिए माताजी के दर्शन करने जाने वाला था। पढ़िए टोंक के रामसागर तालाब में मिले दोस्तों की लाश की पूरी कहानी… सबसे पहले ब्रीफ में जानिए मामला सोमवार की सुबह 9 बजे ग्रामीणों ने एक कार की छत को टोंक के आवां के रामसागर तालाब के पानी की सतह पर देखा। इसकी सूचना लोगों ने आवां सरपंच दिव्यांश भारद्वाज को दी। सरपंच भारद्वाज ने पुलिस बुलाई और गाड़ी बाहर निकलवाई। गाड़ी नंबर से पता चला कि 8 जनवरी को बूंदी के दबलाना थाना क्षेत्र के रेण निवासी रमेश (43) पुत्र जगन्नाथ गुर्जर और महावीर (40) पुत्र सेवा गुर्जर यही गाड़ी लेकर टोंक से निकले थे। वे ख्वासपुरा (टोंक) में सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, उन्होंने यहां से सीताराम (रमेश के जीजा) से यह गाड़ी ली थी। पुलिस ने सीताराम को मौके पर बुलाकर शवों की पहचान करवाई। 22 दिन तक तालाब-नदियां तलाशते रहे परिजन महावीर गुर्जर के छोटे भाई कैलाश ने बताया- महावीर भैया माताजी के जाने की कहकर 8 जनवरी को निकले थे। इसके बाद लौटे नहीं, हमने 22 दिन तक टोंक में ख्वासपुरा और दूनी इलाके का चप्पा-चप्पा छान मारा। तालाब देखे, परिचितों से पूछा, इसके बाद भाई और उनका दोस्त नहीं मिले तो फिर पुलिस में 30 जनवरी को गुमशुदगी दर्ज करवा दी। हमने सोचा कि दोनों ड्राइवरी का काम भी करते हैं तो हो सकता है कि कहीं गाड़ी बुकिंग पर ले गए हों। लेकिन, 39 दिन बाद 16 फरवरी को भाई और उनके दोस्त की लाश मिली तो हमारी सारी उम्मीद खत्म हो गई। बड़े भाई की कैंसर से मौत हो चुकी कैलाश ने बताया- हम तीन भाई थे। सबसे बड़े भाई की कुछ साल पहले कैंसर से मौत हो गई। महावीर दूसरे नंबर के थे। उनके 13 और 15 साल की 2 बेटियां और एक सबसे छोटा बेटा 10 साल का है। अब परिवार में कमाने वाला मैं ही बचा हूं। JCB की पेमेंट से कार लेने वाला था रमेश के जीजा सीताराम गुर्जर ने बताया- दोनों साथ ही रहते थे, बचपन के दोस्त थे, रैण में भी दोनों का एक ही मोहल्ले में मकान है। ज्यादातर बाहर जाते थे तो रिश्तेदारी में ही जाते थे। महावीर गुर्जर के जेसीबी मशीन थी, वह खुद ही चलाता था और व्यस्त होने पर अस्थाई तौर पर ड्राइवर भी रख लेता था। सीताराम ने बताया- महावीर ने उसकी जेसीबी मशीन करीब डेढ़ महीने पहले ही किसी को बेच दी थी। उसके पास से JCB का पेमेंट भी आना था। उसी पेमेंट से वह कार लेने की सोच रहा था। माताजी दर्शन के लिए चलने को कहा था सीताराम ने बताया- उसने 8 जनवरी को मेरी कार लेकर जाते समय कहा था कि कल आपकी कार भी रख जाएंगे और दूनी माताजी के चलेंगे और कार लेने की पाती (स्वीकृति) लेंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उसके बाद वे दोनों नहीं लौटे। रमेश का भाई भी कुएं में डूबा था सीताराम ने बताया- रमेश पांच भाई बहन हैं। इसमें तीन बहनें और दो भाई थे। रमेश के बड़े भाई की मौत करीब 20 साल पहले रैण गांव में ही कुएं में डूबने से हो गई थी। रमेश खेती-बाड़ी और ड्राइवरी का काम करता था। रमेश के दो बेटे 17 और 18 साल के हैं। दोनों बूंदी जिले के गोठड़ा में प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। माता-पिता का आखिरी सहारा भी छिन गया। — लाश मिलने की ये खबर भी पढ़ें… तालाब में डूबी कार में मिले 2 दोस्तों के शव:39 दिन से लापता थे, शरीर की चमड़ी तक गल गई टोंक में दो दोस्तों के शव तालाब में डूबी हुई कार में मिले। दोनों दोस्त 39 दिन से लापता थे। ग्रामीणों को तालाब के पानी में कार की छत नजर आई थी। पढ़ें पूरी खबर

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