छत्तीसगढ़ में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के अधिकारी और कर्मचारी पिछले एक महीने से वेतन गड़बड़ी और सेवा लाभ नहीं मिलने के विरोध में अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल पर थे। अब विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से बातचीत और समयबद्ध समाधान का आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल फिलहाल स्थगित कर दी है। KVK कर्मचारी संघ को कुलपति ने वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। बैठक के दौरान लंबित मांगों पर ठोस और स्थायी समाधान का मौखिक भरोसा दिया गया। इसी भरोसे के आधार पर संघ ने आंदोलन रोकने का निर्णय लिया। क्या है कर्मचारियों का मुख्य मुद्दा संघ का कहना है कि कृषि विज्ञान केंद्रों के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों को लेकर नियम पहले से तय हैं। साल 1997 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वेतन का 75 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय संस्था की ओर से और 25 प्रतिशत जिम्मेदारी मेजबान विश्वविद्यालय की होती है। इसके अलावा मेडिकल भत्ता, रिटायरमेंट लाभ और अन्य सुविधाएं भी विश्वविद्यालय को देनी होती हैं। नियम और कोर्ट आदेश के बावजूद नहीं मिला पूरा हक कर्मचारियों का आरोप है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश और विश्वविद्यालय द्वारा जारी आदेश के बावजूद लंबे समय से पूरा वेतन और वैधानिक लाभ नहीं दिए गए। इससे कर्मचारियों को आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। सात सूत्रीय मांगों को लेकर हुआ था आंदोलन हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने सात प्रमुख मांगें रखीं। इनमें GPF और NPS की पूरी बहाली, सभी कर्मचारियों को बराबर मेडिकल और अन्य भत्ते, प्रमोशन और उच्च वेतनमान योजनाओं को लागू करना, विश्वविद्यालय नियमों के मुताबिक सभी सेवा लाभ, रिटायरमेंट की उम्र तय करना, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं देना और उच्च शिक्षा की अनुमति शामिल है। दो मांगों पर बनी सहमति संघ ने बताया कि उनकी तीन अहम मांगों में से दो पर विश्वविद्यालय ने सहमति जता दी है। राज्य शासन से जुड़े मामलों के लिए बनाई गई छह सदस्यीय समिति में संघ के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। साथ ही वेतन विसंगति के स्थायी समाधान के लिए 22 मार्च 2026 तक राज्य सरकार से सहमति लेने की प्रक्रिया पूरी करने का भरोसा दिया गया है। तीसरी मांग पर नहीं बनी बात हालांकि, विश्वविद्यालय में KVK से जुड़े मामलों के समन्वय के लिए विशेष अधिकारी (OSD) के रूप में संघ के प्रतिनिधि की नियुक्ति की मांग को विश्वविद्यालय ने स्वीकार नहीं किया है। समय पर फैसला नहीं हुआ तो फिर होगा आंदोलन संघ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर तय समयसीमा में कोई ठोस और लिखित फैसला नहीं हुआ, तो कर्मचारी दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ऐसी स्थिति में शैक्षणिक, प्रशासनिक और प्रसार कार्यों में होने वाली अव्यवस्था की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। किसानों को नुकसान न हो, इसलिए रोकी हड़ताल संघ ने यह भी कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसानों व कृषि सेवाओं पर असर न पड़े, इसी वजह से फिलहाल हड़ताल स्थगित की गई है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने वादे पर खरा उतरेगा और जल्द समाधान निकलेगा।


