LPG ब्लास्ट में झुलसे लोगों के किडनी-लीवर खराब हो रहे:मांस और हेल्दी टिश्यू तक जल गए; अब भी 8 मरीजों की जान खतरे में

जयपुर के भांकरोटा में हुए अग्निकांड में घायल हुए मरीजों में मल्टीपल ऑर्गन डिसऑर्डर की समस्या आनी शुरू हो गई। ज्यादा जलने (डीप बर्न) के कारण शरीर के हेल्दी टिश्यू जलकर खत्म हो गए। इस कारण मरीजों में किडनी, लीवर के अलावा हार्मोंस से जुड़ी समस्याएं शुरू हो रही हैं। जयपुर-अजमेर हाईवे पर 20 दिसंबर को इस घटना में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें एक पूर्व IAS भी शामिल हैं। अब भी कई मरीजों की हालत गंभीर है। आखिर क्या है बड़ा कारण? एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जन डॉ. आर.के. जैन ने बताया- अभी बर्न यूनिट में 8 मरीज और भर्ती हैं। इनमें ज्यादातर मरीज 50 फीसदी या उससे ज्यादा बर्न वाले हैं। डॉ. जैन ने बताया- हमारे पास नॉर्मली जो बर्न केस आते हैं उसमें आग की इंटेनसिटी (आग की उग्रता) और कॉन्टेक्ट पीरियड (आग लगने के बाद उसे बुझाने वाला समय) कम वाले मामले आते है। इस कारण डीप बर्न की स्थिति बहुत कम होती है। ऐसी परिस्थिति में जो मरीज 60 फीसदी या उससे ज्यादा बर्न वाले होते है, उनको ठीक कर दिया जाता है। मरीजों के लिए क्यों बढ़ रही परेशानी? डॉ जैन ने बताया कि भांकरोटा वाले केस अलग था। यहां दोनों ही चीजें अधिक थीं। इस कारण इस केस में ज्यादातर मरीज डीप बर्न (शरीर के ऊपर की चमड़ी जलने के अलावा चमड़ी के नीचे मांस और हेल्दी टिश्यू का जलना) वाले हैं। डॉ. जैन ने बताया- डीप बर्न केस में ऑर्गन भी जल जाते हैं। जैसे-जैसे हम ट्रीटमेंट करते है, वैसे-वैसे अलग-अलग टेस्ट करवाकर उन ऑर्गन्स के काम करने की स्थिति भी देखते हैं। किसी में कोई दिक्कत होती है तो मेडिसिन के जरिए उसे रिकवर करते हैं। इसमें मरीज के हार्मेन्स संबंधित कई बीमारियां बाद में शुरू हो जाती है, जो मरीज के लिए परेशानी बढ़ाती हैं। टैंकर से निकली गैस आग का गोला बनकर हाईवे पर फैली थी पुलिस को जयवीर सिंह (LPG टैंकर ड्राइवर) ने बताया कि हादसे के दौरान टैंकर में वह अकेले था। बिना समय गंवाए मैं भागने लगा। टैंकर से निकली गैस आग का गोला बन कर सड़क पर फैलने लगी। तब तक मैं रिंग रोड पर आ चुका था। मैंने फोन कर ट्रक मालिक अनिल कुमार को घटना की जानकारी दी। इसके बाद मोबाइल को बंद कर लिया। 40 गाड़ियों और फैक्ट्री में लगी थी आग आग इतनी तेजी से फैली थी कि 40 से ज्यादा गाड़ियां उसकी चपेट में आ गई थी। टैंकर के ठीक पीछे चल रही एक स्लीपर बस और हाईवे किनारे मौजूद पाइप फैक्ट्री भी जल गई थी। एक्सीडेंट की वजह से बस का दरवाजा एक ट्रक से चिपक गया। इस कारण उसमें सवार 34 लोगों को बाहर निकलने की जगह ही नहीं मिली। बड़ी मुश्किल से ड्राइवर वाले गेट से लोगों को बाहर निकाला गया। आग बुझने के बाद कई शवों को पोटली में डालकर अस्पताल ले जाया गया था। …. जयपुर LPG ब्लास्ट की ये खबरें भी पढ़िए… ट्रेन की जगह बस से आई,LPG ब्लास्ट में गई जान:पिता बोले- टीचर बनना चाहती थी बेटी, आग से घिरने के बाद भी सड़क पर दौड़ी जयपुर LPG टैंकर ब्लास्ट हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत हो गई है। हादसे में गंभीर रूप से झुलसी युवती सहित 3 और लोगों ने 25 दिसंबर (बुधवार) को सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया। जिन लोगों की बुधवार को जान गई, उनमें 22 साल की विजेता (विनिता) भी है। वह 70 प्रतिशत तक झुलस गई थी। सुबह 4 बजे उसने दम तोड़ दिया। विजेता बीएड की पढ़ाई कर रही थी। साथ में टीचर बनने के लिए कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी कर रही थी। (पूरी खबर पढ़ें) जयपुर LPG-ब्लास्ट: 95% जले युवक ने चाचा को कॉल किया:सड़क पर दौड़ते हुए कहा- मुझे बचा लो, गाड़ी में ले चलो, किराया दे दूंगा जब कहीं भी पता नहीं चला तो डरते-डरते हम मॉर्च्युरी में पहुंचे। वहां एक शव रखा था। सिर से पैर तक जला हुआ। पैरों में पहनी बिछिया पर नजर गई तो सारी उम्मीदें टूट गईं। वो शव मेरी बहन का था। ये दर्द है बसराम मीणा का। (पूरी खबर पढ़ें)

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