MLAभाटी बोले-साइबर ठगी रोकने के लिए नहीं है टैक्निकल व्यवस्था:रोजाना 400 व्यक्ति हो रहे शिकार, डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड रोकने के लिए बने साइबर सेल

शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने साइबर ठगी के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। भाटी ने कहा राजस्थान साइबर ठगी का हब बनता जा रहा है। नेशनल क्राइम अभिलेख ब्यूरों के आकड़ों के अनुसार देश में राजस्थान पहले नंबर पर है। एक लाख से अधिक शिकायतें मिली है। लेकिन दर्ज केवल 0.69 प्रतिशत ही हुई है। भाटी ने कहा साल 2024 में एक लाख से अधिक शिकायतें मिली थी। साल 2025 में 1, 27 हजार मिली है। सीधा 27 प्रतिशत वृद्धि हुई है। मिली शिकायतों पर पुलिस थानों में 0.69 प्रतिशत मामलों में एफआईआर दर्ज हुई है। भाटी ने पूरे सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज के समय में कोई व्यक्ति साइबर ठगी को लेकर कोई थाने में एफआईआर देने के लिए जाता है। तब उनको बोलते है सीधे साइबर थाने में जाओ। आज के समय में उसको फुटबाल की तरह बना दिया जाता है। आज उसके बात की सुनवाई नहीं हो रही है। अगर मजदूर, किसान, महिला या छोटा कर्मचारी की तनख्वाह या जीवन भर की बचत चली जाती है तो उसकी सुनने वाला कोई नहीं है। विधायक ने कहा कि पहले के समय में फेसबुक समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हैक करके ठगी होती थी। आज के समय में नया डिजिटल अरेस्ट और तमाम चीजें आई है। ठगी की रेट बहुत ज्यादा बढ़ गई है। आज के समय में हमारी पुलिस के पास टैक्निकल व्यवस्था नहीं है जिससे साइबर ठगों को रोक दिया जाए। आज के समय में हर रोज 400 लोग साइबर ठगी के शिकार हो रहे है। भाटी के अनुसार, जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच 1923 करोड़ रुपये का नुकसान साइबर ठगी के माध्यम से हुआ।
भाटी ने कहा कि यह आम आदमी से जुड़ा हुआ विषय है। मेरा प्रदेश की सरकार से मांग है कि साइबर सेल बनाए। 350 विशेषज्ञों के नियुक्ति की योजना बनाई थी वह भी अधर में है। आप धरातल पर लेकर आए। आम आदमी को इसका फायदा मिलेगा। “पीड़ित को फुटबॉल बना दिया जाता है” भाटी ने कहा कि जब कोई आम व्यक्ति, मजदूर, किसान, महिला या छोटा कर्मचारी, अपनी जीवनभर की बचत गंवाकर थाने पहुंचता है, तो उसे कहा जाता है कि “साइबर थाने में जाओ।” साइबर थाना कहता है कि “यह सामान्य थाना देखेगा।” इस तरह पीड़ित को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकाया जाता है — मानो वह इंसान नहीं, एक फुटबॉल हो। डिजिटल अरेस्ट: नया खतरा, पुरानी तैयारी भाटी ने चेताया कि अब साइबर अपराध केवल सोशल मीडिया हैकिंग तक सीमित नहीं है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए तरीके सामने आए हैं, जिनमें अपराधी वीडियो कॉल, नकली पुलिस अधिकारी या एजेंसियों के नाम पर लोगों को मानसिक रूप से बंधक बनाकर ठग रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस तंत्र के पास अभी भी ऐसी कोई आधुनिक तकनीकी व्यवस्था नहीं है जिससे इन साइबर गिरोहों को समय रहते रोका जा सके।

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