मुरैना जिले के झुंडपुरा में फर्जी कॉलेज का खुलासा होने के बाद सरकार अलर्ट दिख रही है। अब उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश में संचालित प्राइवेट कॉलेजों का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए प्रदेश के सभी अग्रणी शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश जारी कर सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश के सभी जिलों को यह रिपोर्ट देनी है कि उनके जिले में पहले से संचालित और प्रस्तावित नए प्राइवेट कॉलेजों का फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद क्या स्थिति है। इसके लिए हर जिले में शासकीय महाविद्यालय के दो नियमित शिक्षकों की समिति का गठन कर निरीक्षण कराया जाएगा। निरीक्षण दल की रिपोर्ट अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा को सौंपनी होगी। अग्रणी महाविद्यालयों से यह रिपोर्ट सात दिन में सौंपने को कहा गया है ताकि शासन द्वारा ऐसे कालेजों को एनओसी जारी किए जाने के मामले में फैसला लिया जा सके। कॉलेज बिल्डिंग की जानकारी देनी होगी निरीक्षण दल को यह देखना होगा कि महाविद्यालय का संचालन खुद के भवन, किराए के भवन या लीज पर लिए भवन में हो रहा है। समिति को उपलब्ध कुल भूमि (एकड़ में), खसरा नंबर और भूमि डायवर्जन की जानकारी देनी होगी। कॉलेज परिसर में मौजूद भवनों की संख्या, उनके क्षेत्रफल और कुल निर्मित क्षेत्रफल का विवरण भी देना होगा। जांच में प्राचार्य कक्ष, व्याख्यान कक्ष, कार्यालय, स्टाफ कक्ष, पुस्तकालय, एनसीसी, एनएसएस कक्ष, छात्राओं के लिए कॉमन रूम, प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर कक्ष, खेल मैदान और पार्किंग क्षेत्र की व्यवस्था का ब्यौरा देना आवश्यक होगा। स्टूडेंट्स की डिटेल भी बताना होगी इंस्पेक्शन टीम को कॉलेज में कुल विद्यार्थियों की संख्या (छात्र-छात्राओं की अलग-अलग), नियुक्त शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की जानकारी भी जुटानी होगी। साथ ही प्राइवेट कॉलेज खोलने या नए सिलेबस शुरू करने के लिए एनओसी की स्थिति भी जांचनी होगी। टीम यह भी बताएगी कि अध्ययन और अध्यापन के लिए पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं। यह जानकारी भी देना होगी रिपोर्ट में शिवशक्ति नाम से चल रहा था मुरैना में फर्जी कालेज पिछले माह मुरैना जिले के झुंडपुरा में एक फर्जी कॉलेज का मामला सामने आया था। ईओडब्ल्यू की जांच के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने जनवरी 2025 में इस कॉलेज की मान्यता निरस्त कर दी। शिवशक्ति कॉलेज कागजों पर हर साल संबद्धता प्राप्त कर रहा था, जबकि झुंडपुरा में इसका कोई अस्तित्व नहीं है। शिकायतकर्ता डॉ. अरुण शर्मा ने खुलासा किया कि उन्हें इस फर्जी कॉलेज का प्राचार्य बताया गया था, जबकि उन्होंने कभी इस संस्थान को देखा ही नहीं। इस मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय, राजस्थान के बांसवाड़ा विश्वविद्यालय के कुलपति समेत 17 प्रोफेसरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।


