मध्य प्रदेश में साल 2025 के दौरान एक्सट्रीम वेदर वाले दिनों की संख्या भले ही कम रही, लेकिन मौसम से जुड़ी घटनाओं में मौतों का आंकड़ा 500 के पार पहुंच गया। यह जानकारी सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की वर्ष 2026 की ‘स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट’ (SOE) रिपोर्ट में सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल भी प्रदेश के कई जिलों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। मार्च की शुरुआत में ही गर्मी का असर दिखने लगा है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा गर्मी इंदौर संभाग के निमाड़ इलाके में महसूस की जा रही है, जहां खरगोन में तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर समेत कई जिले भी गर्मी की चपेट में हैं। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मार्च से मई के बीच मध्यप्रदेश में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी बढ़ सकता है। हालांकि, हीट वेव जैसी गंभीर मौसमी स्थितियों का असर अप्रैल और मई में ज्यादा देखने को मिल सकता है। प्रदेश में 2025 में मौतों का आंकड़ा 500 के पार रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 2025 में मौतों का आंकड़ा 500 के पार था, जबकि 2022, 2023 और 2024 में हर साल 150 से ज्यादा दिन एक्सट्रीम वेदर वाले रहे और प्रतिवर्ष 250 से ज्यादा लोगों की जानें गईं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस दीपक गुप्ता, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पूर्व सचिव अशोक लवासा और सीएसई की महानिदेशक सुनिता नारायण की मौजूदगी में 25 फरवरी को रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें मौसम-जलवायु समेत कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं को लेकर भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट जारी करते समय सुनीता नारायण ने कहा कि यह साफ है कि 2025 में, दुनिया एक नए अनजान दौर में पहुंच गई। क्लाइमेट का असर अब उम्मीद से पहले और तीव्रता के साथ हो रहा है। इस अनप्रेडिक्टेबल भविष्य से हमें चिंतित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट एक ऐसे बिंदु पर पहुंच रहा है, जहां से वापस लौटना असंभव है। यदि हम पिछले वर्षों का औसत लें तो दुनिया का तापमान पहली बार 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाएगा। यह एक संकेत है कि हम सुरक्षा सीमा को पार कर रहे हैं। अब जानिए, क्या होता है एक्सट्रीम वेदर? एक्सट्रीम वेदर वाले दिन वे दिन होते हैं जब मौसम सामान्य से बहुत अलग और खतरनाक हो जाता है। ऐसे दिनों में बहुत तेज बारिश, आंधी-तूफान, ओलावृष्टि, भीषण गर्मी या कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। उदाहरण के लिए, हीटवेव में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और लोगों को लू लग सकती है। इसी तरह अत्यधिक बारिश से पानी सड़कों और घरों में भर जाता है। एक्सट्रीम वेदर के दिन लोगों को सावधान रहना चाहिए, सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए, क्योंकि ऐसे मौसम से जान-माल का नुकसान हो सकता है। 2025 में देश में चार हजार से ज्यादा मौतें रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2025 में पूरे भारत में खराब मौसम की घटनाएं लगभग रोज हुईं और इनकी फ्रीक्वेंसी और असर दोनों में चार सालों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई। 2025 में 99 फीसदी दिनों में ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं, जिससे 4,419 मौतें हुईं। यह आंकड़ा 2024 से बहुत ज्यादा है, जब खराब मौसम की घटनाएं 88 प्रतिशत दिनों में हुईं, जिससे 3393 मौतें हुईं थीं। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच देश में 334 में से 331 दिनों में किसी न किसी रूप में एक्सट्रीम वेदर था। इन घटनाओं में हीटवेव, कोल्ड वेव, बिजली गिरना, तूफान, चक्रवात, क्लाउडबर्स्ट, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन शामिल हैं। प्रदेश में जनहानि का जोखिम बढ़ रहा 2022 से 2025 के आंकड़े मध्यप्रदेश में एक्सट्रीम वेदर के बदलते और खतरनाक ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2022 में 183 दिन ऐसे रहे जब किसी न किसी रूप में खराब मौसम की स्थिति बनी और 301 लोगों की जान गई। 2023 में ऐसे दिनों की संख्या घटकर 171 रही और मौतें 253 दर्ज हुईं। हालांकि 2024 में घटनाएं बढ़कर 237 दिन हो गईं और 353 लोगों की मौत हुई। चिंताजनक पहलू 2025 में सामने आया, जब एक्सट्रीम वेदर वाले दिनों की संख्या घटकर 162 रह गई, लेकिन मौतों का आंकड़ा 537 तक पहुंच गया। यह ट्रेंड बताता है कि अब सिर्फ घटनाओं की संख्या नहीं, बल्कि उनकी तीव्रता और प्रभाव अधिक घातक होता जा रहा है, जिससे जनहानि का जोखिम बढ़ रहा है। पड़ोसी राज्यों में सबसे ज्यादा एमपी प्रभावित रिपोर्ट के अनुसार, एक्सट्रीम वेदर वाली घटनाओं का असर मध्यप्रदेश में पड़ोसी राज्यों राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी ज्यादा हुआ। आंकड़े बताते हैं कि एक्सट्रीम वेदर के मामले में मध्यप्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां 162 दिनों में 537 मौतें दर्ज हुईं, जो पड़ोसी राज्यों से कहीं अधिक हैं। तुलना करें तो महाराष्ट्र में 158 दिनों में 288, उत्तरप्रदेश में 112 दिनों में 243, गुजरात में 133 दिनों में 136, राजस्थान में 117 दिनों में 107 और छत्तीसगढ़ में 84 दिनों में 102 मौतें हुईं। यानी कई राज्यों में घटनाएं अधिक रहीं, फिर भी जनहानि कम रही। प्राथमिक तौर पर भौगोलिक स्थिति, स्थानीय प्रशासन की ओर से फैलाई गई जागरुकता का स्तर ही इन राज्यों के डेटा में अंतर की वजह के रूप में सामने आया है। अप्रैल-मई में हीटवेव का असर ज्यादा रहेगा मौसम विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. दिव्या सुरेंद्र ने बताया कि राज्य में पूरे सीजन में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है, अप्रैल-मई में असर ज्यादा रह सकता है। प्रदेश के नॉर्थ-ईस्ट रीजन जैसे- सीधी, सिंगरौली, विदिशा, सागर जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं करीब 70 प्रतिशत तक है, बाकी के क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से ज्यादा ही रहेगा। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो केवल मार्च की बात करें तो नॉर्मल रहने का चांसेज हैं। उन्होंने बताया कि हीटवेव को लेकर फिलहाल जो अनुमान है वो यह कि छत्तीसगढ़ बॉर्डर से जुड़े क्षेत्रों में नंबर सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। डे-टू-डे में देखा जाए तो अभी तापमान बढ़ना शुरू हो गया है। अप्रैल-मई में इसका असर दिखाई देगा। हालांकि अलनीनो का असर न्यूट्रल कंडीशन में है। जब भी तापमान बहुत ज्यादा होता है तो हम हीटवेव का वार्निंग इश्यू करते हैं। डॉ. दिव्या सुरेंद्र ने बताया कि गर्मी के समय में पानी ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। पीक समय यानि दोपहर 12 से 3 बजे के बीच ज्यादातर रेडिएशन हमारी धरती पर आती हैं, उस समय में बाहर जाने से बचना चाहिए। जाना भी पड़े तो कवर करके जाना चाहिए, जिन्हें पहले से कोई सीवीयर बीमारी है तो ज्यादा सावधानी रखने की जरुरत होती है। यदि किसी को हीटवेव का कोई असर महसूस हो तो तत्काल मेडिकल सहायता लेना ठीक रहेगा। यह खबर भी पढ़ें… 2024 में एक्सट्रीम वेदर से 3,238 मौतें वर्ष 2024 के शुरुआती नौ महीनों के 274 दिनों में से 255 दिन देश में कहीं न कहीं एक्सट्रीम वेदर कंडीशन रही। मतलब ये कि या तो तेज गर्मी पड़ी या शीतलहर चली या भारी बारिश हुई या भयंकर सूखा पड़ा या कोई आंधी-तूफान आया। पढ़ें पूरी खबर…


