MP में 6 महीने में 17 तरीकों से फ्रॉड:साइबर-पुलिस से ठग चार कदम आगे; फौरन बदलते हैं पैटर्न, ठगी करने अकाउंट में बैलेंस जरूरी नहीं

मध्यप्रदेश में पिछले 6 महीने में 17 से ज्यादा तरीकों से ऑनलाइन फ्रॉड हुआ है। यह ठगी के वह तरीके हैं, जिनसे कम से कम 100 से ज्यादा लोगों को ठगा गया है। साइबर पुलिस के एक्सपर्ट जब तक तरीका समझत पाते हैं और उसका तोड़ निकालते हैं, उससे पहले साइबर फ्रॉडस्टर ठगी का पैटर्न बदल लेते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो फ्रॉड करने वाले पुलिस से चार कदम आगे हैं। अब APK फाइल्स का इस्तेमाल करके फ्रॉड आम हो गया है। फ्रॉड करने वाले शादी के इनविटेशन कार्ड, RTO ई-चालान की कॉपी या बधाई मैसेज को APK फाइल्स के तौर पर दिखाकर लोगों को टारगेट कर रहे हैं। जरूरी नहीं है कि ठगी का शिकार वह लोग हो रहे हैं, जिनके अकाउंट में पैसे हैं। ऐसे लोग भी ठगे जा रहे हैं, जिनके अकाउंट खाली पड़े हैं। ऐसे लोगों के नाम पर ठग डेटा हैक कर ऑनलाइन लोन निकाल लेते हैं। किस्त के लिए जब अलर्ट मैसेज आता है तो ठगी का पता चलता है। तकनीकी सुविधाओं के इस दौर में जहां जिंदगी आसान हुई है, वहीं साइबर ठगों के नए-नए हथकंडों ने आमजन के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। दैनिक भास्कर आपको बता रहा है 17 तरीके, जिनसे ठग लोगों के साथ फ्रॉड कर रहे हैं, जिससे आप भी सावधान रह सकें। इन तरीकों से करें अपना बचाव फ्रॉडस्टर तत्काल बदल लेते हैं तरीका
साइबर एक्सपर्ट धर्मेन्द्र शर्मा ने बताया कि फ्रॉडस्टर बेहद चालाक होते हैं। यह लोगों को ठगने के लिए हर कुछ दिन में नया तरीका इजात कर लेते हैं। कभी जॉब, कभी इन्वेस्टमेंट तो कभी लालच में फंसाकर फ्रॉड करते हैं। साइबर पुलिस लगातार फ्रॉडस्टर के पीछे लगी हुई है, लेकिन एक साइबर फ्रॉड की चेन इतनी लंबी होती है कि उसे तोड़ने में समय लग जाता है। ऐसे में जब तक एक तरीके पर लोगों को अवेयर करते हैं तो फ्रॉड करने वाले नए तरीके से ठगी करने लगते हैं। इसमें लोगों को बेहद सावधान रहना होगा। जैसे पैमेंट करने के लिए हमेशा सेफ नेटवर्क का उपयोग करें। कभी भी सार्वजनिक प्लेस पर वाईफाई का उपयोग कर ऑनलाइन पेमेंट न करें। APK फाइल न खोलें और डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड से बचें। ये खबर भी पढ़ें… जरा सी चूक…:एक दिन में डिजिटल अरेस्ट , साइबर ठगी के 4 केस राजधानी में साइबर ठगों ने एक ही दिन चार अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाकर लाखों रुपए की ठगी कर ली। कहीं डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया, कहीं फर्जी लिंक भेजे गए, तो कहीं दोगुना पैसा कमाने और ऑनलाइन टास्क का लालच दिया गया। सभी पीड़ित अलग-अलग उम्र, पेशे और इलाकों से हैं। वारदात के शिकार बुजुर्ग से लेकर छात्र तक हुए। यह साफ संकेत है कि साइबर फ्रॉड किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहा। जरा-सी चूक, बिना जांचे लिंक पर क्लिक या अनजान कॉल भारी नुकसान करा सकता है।पूरी खबर पढ़ें

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