रांची विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के NET/JRF उत्तीर्ण छात्र शोध निर्देशक नहीं मिलने से परेशान हैं। अपनी समस्या को लेकर छात्र शुक्रवार को विधायक सरयू राय से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा। सरयू राय ने मामले को विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से दूरभाष पर बातचीत कर छात्रों की समस्या का शीघ्र समाधान करने को कहा। छात्रों का कहना है कि शोध निर्देशक के अभाव में वे पीएचडी में नामांकन नहीं ले पा रहे हैं। इससे झारखंड के मेधावी छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। उनका आरोप है कि पिछले लगभग दस वर्षों से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में पीएचडी के लिए केवल चुनिंदा छात्रों के ही आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। जिन छात्रों की पहुंच नहीं होती, उनके आवेदन तक नहीं लिए जाते। छात्रों ने बताया कि बिनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों में शोध निर्देशक नहीं मिलने की स्थिति में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के शोधार्थी मानविकी संकाय के शोध निर्देशकों के अधीन तुलनात्मक अध्ययन के रूप में पीएचडी कर सकते हैं। लेकिन रांची विश्वविद्यालय में ऐसी व्यवस्था लागू नहीं की जा रही है। छात्रों के अनुसार, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय को मानविकी संकाय में सम्मिलित करने का निर्णय विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल से पहले ही पारित हो चुका है, फिर भी महीनों बाद तक इसे लागू नहीं किया गया है। इससे सैकड़ों शोधार्थियों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है।


