पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रविवि) ने शैक्षणिक सत्र 2026 के लिए पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह आवेदन उन अभ्यर्थियों से मांगे गए हैं, जो पीएचडी प्रवेश परीक्षा से छूट की पात्रता रखते हैं। आवेदन की प्रक्रिया 6 फरवरी से प्रारंभ हो चुकी है और अंतिम तिथि 20 फरवरी निर्धारित की गई है। ऑफलाइन और डाक दोनों माध्यम से कर सकेंगे आवेदन अभ्यर्थी निर्धारित प्रपत्र में अपना आवेदन-पत्र विषय से संबंधित विश्वविद्यालय अध्ययनशाला या महाविद्यालय स्थित शोध केंद्र में ऑफलाइन जमा कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदन-पत्र डाक के माध्यम से भी संबंधित शोध केंद्र को अंतिम तिथि तक भेजे जा सकते हैं। शोध केंद्रों की सूची विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। कॉलेज शोध केंद्र 25 फरवरी तक भेजेंगे आवेदन विश्वविद्यालय ने महाविद्यालयों में संचालित शोध केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वे प्राप्त आवेदनों को 25 फरवरी तक रविवि मुख्यालय को प्रेषित करें। आवेदन-पत्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है, जिसे अभ्यर्थी डाउनलोड कर सकते हैं। 36 विषयों में मांगे गए आवेदन रविवि ने 36 विषयों में पीएचडी प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से— हिंदी, अंग्रेजी, भाषा-विज्ञान, संस्कृत, ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, समाजकार्य, लोकप्रशासन, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, मनोविज्ञान, गृह-विज्ञान, भूगोल, भौतिकी, रसायन विज्ञान, भू-विज्ञान। गणित, सांख्यिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, प्राणीशास्त्र, बायोसाइंस, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी, वनस्पतिशास्त्र, मानव-विज्ञान, शारीरिक शिक्षा, फार्मेसी, मैनेजमेंट, वाणिज्य, विधि, शिक्षा शास्त्र और क्षेत्रीय अध्ययन शामिल हैं। जिन विषयों में गाइड उपलब्ध नहीं, उन्हें सूची से हटाया रविवि ने सभी शोध केंद्रों से उन विषयों की सूची मांगी थी, जिनमें फिलहाल शोध निदेशक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे विषयों को आवेदन सूची से बाहर कर दिया गया है। विश्वविद्यालय ने संबंधित डीआरसी (डॉक्टोरल रिसर्च कमेटी) को निर्देश दिए हैं कि आवेदन-पत्रों का शीघ्र परीक्षण कर पात्र अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए। क्षेत्रीय अध्ययन में अंतर्विषयी शोध की सुविधा क्षेत्रीय समस्याओं के अंतर्गत अंतर्विषयी शोध के लिए मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, मैनेजमेंट, समाजशास्त्र, भूगोल, शिक्षाशास्त्र, हिंदी सहित अन्य विषयों के विद्यार्थी क्षेत्रीय अध्ययनशाला शोध केंद्र में प्रवेश ले सकेंगे।
शर्त यह होगी कि संबंधित विषय का नियमित प्राध्यापक ही शोध निर्देशक होगा, जबकि अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्ययन एवं अनुसंधानशाला सह-निदेशक की भूमिका निभाएंगे।


