RR कॉलेज के करीब 44 हैक्टेसी के घने जंगल में घूम रहा लेपर्ड अब तक 30 से अधिक सूअर के बच्चों को खा चुका है। नील गाय के 2 ही छोटे बच्चे जंगल में नजर आते हैं। पिंजरे में रोजाना लगा रहे बकरे व मुर्गे का शिकार करने अंदर नहीं घुसा है। 24 दिन पहले 1 दिसंबर को लेपर्ड सबसे पहले दो-तीन महिलाओं को दिखा था। उसके बाद से लेपर्ड को पकड़ने का प्रयास जारी है। वनकर्मियों ने पिंजरे के अलावा लेपर्ड को पकड़ने के कोई मजबूत प्रयास नहीं किए हैं। लेपर्ड के कारण इस जंगल के चारों तरफ की कॉलोनियों की करीब 10 हजार आबादी को हमेशा डर रहता है। कभी लेपर्ड आबादी में आया तो मुश्किल हो सकती है। वनकर्मी बोले सब सूअर खा गया वनकर्मी भीम सिंह ने बतायाकि आरआर कॉलेज के जंगल में पालतू सूअर खूब थे। लेपर्ड सूअर के अधिकतर बच्चों को खा चुका है। बड़े सूअर लेपर्ड के काबू में नहीं आते हैं। इसी तरह नील गाय के छोटे बच्चों को खा चुका है। केवल दो ही नील गाय के छोटे बच्चे नजर आते हैं। मतलब जंगल में लेपर्ड को शिकार बराबर मिल रहा है। इस कारण पिंजरे में नहीं आता है। अब जंगल के रास्ते चौड़े कर ढूंढ़ रहे आरआर कॉलेज के जंगल के रास्तों को चौड़ा कर लेपर्ड को ढूंढ़ा जाने लगा है। असल में अब तक वनकर्मियों को यह पता नहीं चला कि लेपर्ड शिकार कर कहां जाता है। शिकार के अवशेष भी नहीं मिल रहे। इस कारण जंगल में रास्ते चौड़े कर लेपर्ड के शिकार कर खाने की जगह का पता लगाया जा रहा है। ताकि वहां पिंजरा लगाकर लेपर्ड को पकड़ा जा सके।


