राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (आरआरईसीएल) के अफसरों ने गुजरात की फर्म तीर्थ गोपीकॉन (एसपीवी) को 42 दिन में 456 करोड़ रु. के दो टेंडर दिए। फिजिबिलिटी, प्रगति रिपोर्ट और बैंक गारंटियों की जांच किए बिना ही 46.30 करोड़ एडवांस भी दे दिए। कुछ समय बाद फर्म के फर्जी होने का पता चला तो खुद को बचाने के लिए ब्लैक लिस्ट कर मुकदमा करवा दिया। आरआरईसीएल ने 6 दिसंबर 2024 को फर्म को बारां और पाली जिलों के सरकारी भवनों पर 37 मेगावॉट के रूफटॉप सोलर लगाने और 25 साल तक रख-रखाव का टेंडर दिया। इसके लिए 12 मार्च 2025 को 16.93 करोड़. एडवांस दिए। इसके बाद 14 मार्च को बूंदी, जोधपुर, पाली, सिरोही जिलों में 63 मेगावॉट के रूफटॉप सोलर लगाने का दूसरा टेंडर और 26.23 करोड़ एडवांस दिए। एमपी में 183 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी
एसपीवी मूल रूप से अहमदाबाद में रजिस्टर्ड है। कॉर्पोरेट ऑफिस इंदौर में है। मध्यप्रदेश जल निगम लिमिटेड ने कंपनी को 2023 में छतरपुर, सागर और डिंडोरी जिलों में 974 करोड़ के तीन सिंचाई प्रोजेक्ट के टेंडर दिए थे। कंपनी ने ठेकों के लिए 183.21 करोड़ की 8 बैंक गारंटी दी थी। निगम ने कंपनी को 85 करोड़ एडवांस भी दे दिए। जांच में बैंक गारंटी फर्जी निकली तो कंपनी ने खुद को कर्मचारियों से ठगा जाना बताया। मामले में मप्र हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया और कंपनी के प्रबंधक महेश कुंभानी, गौरव धाकड़ और एक अन्य को गिरफ्तार किया था। टेंडर-1 6 दिसंबर 2024 को फर्म को पहला ठेका (टीएन-10) दिया। फर्म ने 45 दिन बाद भी सोलर सिस्टम लगाने की फिजिबिलिटी और प्रगति रिपोर्ट नहीं दी। आरआरईसीएल ने 27 जनवरी और 3 अप्रैल 2025 को समीक्षा बैठक ली। फर्म ने कार्य-योजना नहीं दी। इस बीच 12 मार्च 2025 को बिना बैंक गारंटी जांचे 16.93 करोड़ एडवांस दे दिए। टेंडर-2 इसके बावजूद 14 मार्च 2025 को दूसरे जिलों में सोलर लगाने का दूसरा टेंडर दे दिया। फर्म ने इस बार भी फिजिबिलिटी और प्रगति रिपोर्ट नहीं दी। एमडी की बैठक में नहीं गई। इसके बावजूद 6 जून को बिना बैंक गारंटी जांचे 26.23 करोड़ एडवांस दे दिए। सीबीआई जांच में खुला मामला सीबीआई ने 23 जून 2025 को आरआरईसीएल से एसपीवी की बैंक गारंटियों की जानकारी मांगी। आरआरईसीएल ने 8 जुलाई को फर्म से स्पष्टीकरण, कार्य की प्रोग्रेस रिपोर्ट और एडवांस रुपए का हिसाब मांगा। कंपनी ने लिखा- कंपनी वित्तीय सलाहकार की धोखाधड़ी का शिकार हुई है। साथ ही 60 करोड़ रुपए की नई बैंक गारंटी देने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद आरआरईसीएल ने पंजाब नेशनल बैंक को पत्र लिखकर फर्म की बैंक गारंटी की प्रामाणिकता सत्यापित करने के लिए कहा। बैंक ने 15 जुलाई को बताया कि हमने ऐसी कोई बैंक गारंटी जारी नहीं की है। इस पर अफसरों ने गलती पर पर्दा डालने और खुद को बचाने के लिए फर्म को ब्लैक लिस्ट करने, मुकदमा करने और रिकवरी का प्रोसेस शुरू कर दिया। बैंक गारंटी जांची थी। सीबीआई की एंट्री के बाद जांच हुई तो पता चला कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत थी, जो बैंक गारंटी रिलीज कर रहा था, वो ही गलत था। केस दर्ज करवाया है और विभागीय जांच शुरू कर दी है। अब नया टेंडर कर लिया है। -योगेन्द्र माथुर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, आरआरईसीएल, जयपुर


