सरकारी भर्तियों में डमी कैंडिडेट पर शिकंजा कसने के लिए राजस्थान SOG ने एक खास सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसको SSO और वन टाइम रजिस्ट्रेशन के डेटा बेस से लिंक किया गया है। साथ ही AI फीचर्स का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से असली कैंडिडेट की जगह परीक्षा देने वाले डमी कैंडिडेट तुरंत पकड़े जाएंगे। हाल ही में SOG ने सीनियर टीचर भर्ती-2022 में डमी कैंडिडेट बनने वाले तीन MBBS स्टूडेंट और 2 सरकारी टीचर्स को इसी सॉफ्टवेयर से पकड़े गए थे। इस गिरफ्तारी के बाद भास्कर टीम ने SOG अधिकारियों से बात की। यह जाना कि सॉफ्टवेयर कैसे डमी कैंडिडेट्स को पकड़ने में मददगार साबित हो रहा है। सॉफ्टवेयर ने कैसे पकडे़ MBBS स्टूडेंट और टीचर्स के चेहरे दिसंबर-2022 में सीनियर टीचर भर्ती का सामान्य ज्ञान और शैक्षिक मनोविज्ञान विषय का पेपर लीक हुआ था। ऐसे में परीक्षा निरस्त कर जनवरी-2023 को दोबारा करवाई गई थी। तब SOG को 14 अभ्यर्थियों के खिलाफ डमी कैंडिडेट बिठाकर परीक्षा पास करने की शिकायत मिली थी। एसओजी ने 2023 में FIR दर्ज कर 12 मूल अभ्यर्थियों को पकड़ लिया था। लेकिन उनकी जगह परीक्षा देने वाले महज 3 डमी कैंडिडेट ही पकड़ में आए थे। बाकी डमी कैंडिडेट कौन हैं, इनकी पहचान के लिए फोटो के अलावा कोई दूसरा सबूत नहीं था, क्योंकि डमी कैंडिडेट ने फॉर्म भरने के दौरान बाकी जानकारी तो मूल कैंडिडेट की भरी थी। चालाकी से फोटो खुद की लगाई थी। एडमिट कार्ड पर भी सेम फोटो होने के चलते एग्जाम सेंटर पर ये पकड़ में नहीं आए। मूल अभ्यर्थियों से पूछा तो उनके पास भी डमी कैंडिडेट के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी। पहचान के लिए पुलिस ने 10 हजार रुपए इनाम की घोषणा की थी। फिर भी कोई सफलता नहीं मिली। ऐसे में SOG के आईजी शरत कविराज ने विशेषज्ञों की मदद से एक खास सॉफ्टवेयर तैयार करवाया। इस सॉफ्टवेयर को सरकारी परीक्षा के लिए जरूरी SSO ID और OTR (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) के डेटाबेस से जोड़ा गया। सॉफ्टवेयर तैयार होने के बाद उसमें AI पर आधारित फोटो मैच कराने वाले टूल- फेशियल रिकग्निशन से जोड़े गए। अब SOG के पास 2018 से लेकर अबतक हुई सरकारी परीक्षाओं में एग्जाम देने वाले 50 लाख से ज्यादा स्टूडेंट की पूरी डिटेल थी। SOG ने संदिग्ध डमी कैंडिडेट की फोटो को सॉफ्टवेयर पर अपलोड कर 50 लाख से ज्यादा स्टूडेंट के फेस से मैच करवाया। कुछ ही देर में सॉफ्टवेयर ने संदिग्ध डमी कैंडिडेट को ट्रेस कर लिया। एसओजी की ओर से 16 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे अंडमान, कोलकाता, जालोर, कोटा और जयपुर में 6 स्थानों पर दबिश दी गई। एसओजी ने 10-10 हजार रुपए के इनामी 5 (3 MBBS स्टूडेंट और 2 सरकारी टीचर) डमी कैंडिडेट को अरेस्ट किया। 1 संदिग्ध MBBS स्टूडेंट भी पकड़ा गया है। चेहरे के हर एंगल की डिग्री पर मिलान करता है सॉफ्टवेयर
एसओजी के डीआईजी पारिस देशमुख ने बताया कि राजस्थान में हर एग्जाम के लिए SSO आईडी के जरिए ही फॉर्म भरे जाते हैं। वहीं, वन टाइम रजिस्ट्रेशन में अभ्यर्थी की पूरी डिटेल भरवाई जाती है। साल 2022 से ओटीआर (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) लागू किया गया था। OTR में कैंडिडेट की एक प्रोफाइल बनती है। इसमें अभ्यर्थी की फोटो, उसका मोबाइल नंबर, आधार आईडी का वेरिफिकेशन से लेकर माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, ईमेल आईडी, शैक्षणिक योग्यता (10वीं/12वीं/डिग्री), फोटो और हस्ताक्षर शामिल होते हैं। लेकिन 2022 में कैंडिडेट की LIVE फोटो का कोई ऑप्शन नहीं था। ऐसे में ओटीआर फॉर्म भरते समय अपलोड की गई फोटो कैंडिडेट की है या किसी और की इसे पहचाने का कोई टूल नहीं था। इसी का फायदा डमी कैंडिडेट ने उठाया। साल 2025 में ओटीआर रजिस्ट्रेशन के लिए LIVE फोटो अनिवार्य कर दिया गया था। ज्यादातर डमी कैंडिडेट वही होते हैं जिनकी खुद की तैयारी होती है, यानी वे खुद भी कोई न कोई एग्जाम देते हैं। जब LIVE फोटो अनिवार्य हुआ तब डमी कैंडिडेट ने खुद के फॉर्म भरने के लिए अपनी SSO आईडी का इस्तेमाल किया। इसमें उनकी असली और LIVE फोटो थी। हमारे सॉफ्टवेयर ने उन फोटो को पहचान लिया। उम्र, हेयरकट, कलर में बदलाव को भी पहचान लेता है सॉफ्टवेयर
डीआईजी एसओजी पारिस देशमुख ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर लाखों फोटो को स्कैन करता है, अगर किसी का फेस 70% भी मिलता है तो उसे आइडेंटिफाई कर लेता है। एक और खासियत कि समय के साथ बदले चेहरे, हेयरकट, कलर को भी यह आसानी से पहचान लेता है। मूल अभ्यर्थी की जगह परीक्षा के लिए डमी कैंडिडेट बिठाने के लिए किए गए इन सभी बदलावों का भी यह वेरिफिकेशन कर बता देता है। राजस्थान के 50 लाख अभ्यर्थियों का एसओजी ने खंगाला डाटा
आईजी एसओजी शरत कविराज ने बताया कि सॉफ्टवेयर के माध्यम से ओटीआर पर आवेदन करने वाले सभी कैंडिडेट का डाटा एसओजी की ओर से खंगाला जा रहा है। एसओजी ने अभी तक 50 लाख अभ्यार्थियों का डाटा फोटो और सिग्नेचर से मिलान कर सेव किया है। एसओजी की ओर से डमी कैंडिडेट बिठा कर सरकारी नौकरी पाने वाले सभी को पकड़ने के लिए इस विशेष सॉफ्टवेयर से आवेदन किए सभी कैंडिडेट की फोटो और सिग्नेचर मिलान जल्द ही करा दिया जाएगा। शरत कविराज ने बताया कि अब हम इस तकनीक का आने वाले समय में निरंतर यूज करने वाले हैं। जिससे मूल अभ्यर्थी की जगह डमी कैंडिडेट बैठने वाले फोटोग्राफ के जरिये पहचान लिए जाएंगे। एसओजी ने डमी बैठने वालों को दी चेतावनी
सॉफ्टवेयर के एसओजी में शामिल होने के बाद अधिकारी काफी पॉजिटिव हो गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि अगर अब कोई भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति चंद पैसों के लिए डमी बनकर दूसरे की जगह परीक्षा दे रहा है तो वह खुद के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। आज नहीं तो कल इस सॉफ्टवेयर की मदद से वह पकड़ा जाएगा। एसओजी का दावा है कि इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से वह पिछली परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर जांच करेंगे। जिससे परीक्षार्थी की जगह बैठे डमी कैंडिडेट का डाटा सामने आ जाएगा। एसओजी डमी के साथ-साथ मूल अभ्यर्थियों का डेटा भी खंगालने में लगी हुई है, जिस से पता चल सकेगा की ये लोग कितनी परीक्षा में डमी कैंडिडेट की मदद से पास हुए हैं।
2 हजार डमी कैंडिडेट की ‘कुंडली’ एसओजी के पास
एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि उनके पास 2 हजार से अधिक डमी कैंडिडेट का पूरा डेटाबेस तैयार है। इसमें उनके जन्म से लेकर पूरी कुंडली हमारे पास तैयार है। करीब 145 डमी कैंडिडेट अभी तक एसओजी गिरफ्तार कर चुकी है। हमारे सॉफ्टवेयर की मदद से जो भी डमी कैंडिडेट चिह्नित हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। ————— यह खबर भी पढ़िए… 5 लाख में सरकारी टीचर और मेडिकल-स्टूडेंट बने डमी कैंडिडेट:सीनियर शिक्षक भर्ती एग्जाम पास करवाया; 3 राज्यों से 5 आरोपी गिरफ्तार
सरकारी टीचर और MBBS स्टूडेंट ने डमी कैंडिडेट बनकर सीनियर शिक्षक (सेकेंडरी एजुकेशन) ग्रेड सेकेंड प्रतियोगी परीक्षा पास करवाई। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOF) ने दो टीचर और 3 MBBS स्टूडेंट को अरेस्ट किया है…(CLICK कर पढ़ें)


