UPSC ने सिविल सर्विसेज एग्जाम 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। इसमें राजस्थान से कई कैंडिडेट सफल हुए हैं। इनकी सक्सेस जर्नी सिविल सर्विसेज एग्जाम की तैयारी में जुटे कैंडिडेट को प्रोत्साहित करने वाली है। इनमें हैं टोंक की रहने वाली साक्षी जैन भी हैं, जिन्होंने यूपीएससी में 37वीं रैंक हासिल की है। कोटा निवासी माधवेंद्र प्रताप सिंह ने 153वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने एक लाख रुपए महीने सैलरी की जॉब छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी की। उन्हें अब सफलता मिली है। वहीं, डीग के रहने वाले इंशा खान ने तो 6th अटेम्प्ट में सफलता मिली है। बूंदी निवासी सौरभ शर्मा ने 146वीं रैंक हासिल की है। दैनिक भास्कर ऐप के साथ इन्होंने अपनी जर्नी शेयर की। उन्होंने तैयारी से लेकर इंटरव्यू में पूछ जाने वाली सवाल को लेकर बात की। पढ़िए – ये स्पेशल रिपोर्ट… कैसे नौकरी छोड़ साक्षी जैन बनीं IAS? साक्षी ने बताया कि वे 2018 में वे सीए बन गई थी। इसके बाद नोएडा में यूके के एक बैंक में जॉब की। लेकिन, परिवार में सभी सरकारी जॉब में थे। ताऊजी के लड़के अमित जैन आईपीएस हैं तो ऐसे में मन में था कि ग्राउंड पर रहकर कुछ काम करना है। आखिर 2020 में कोविड के दौरान उन्होंने अपनी जॉब छोड़ यूपीएससी की तैयारी करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि 2021 में उनका पहला अटेम्प्ट था। इसमें वे सफल नहीं हो पाई। इसके बाद 2022, 2023, 2024 और 2025 में मेन्स क्लियर कर इंटरव्यू तक पहुंची। आखिर 2025 के एग्जाम को क्लियर कर उन्होंने देशभर में 37वीं रैंक हासिल की है। बोलीं- सीए, योगा और बाल विवाह को लेकर किए सवाल साक्षी ने बताया कि उनका इंटरव्यू राउंड करीब 30 मिनट तक चला। इस दौरान उनके सीए बैकग्राउंड, उनकी हॉबी योगा और गार्डनिंग के साथ ही राजस्थान में बाल विवाह को लेकर सवाल किए। साक्षी ने बताया कि जो साड़ी पहनकर वे पहुंची थी, उसे लेकर भी उनसे सवाल-जवाब किए गए। साक्षी ने बताया कि योग को लेकर पूछा गया कि योग किस तरह का होता है, इसकी क्या हिस्ट्री है? राजस्थान में बाल विवाह का क्या कारण है, इसे लेकर भी सवाल किया गया। इसके बाद उनके सीए बैकग्राउंड को लेकर पूछा गया कि-कई महिलाओं को उनके फाइनेंनशियल अप्रोच की जानकारी नहीं रहती। जैसे-कहां इन्वेस्टमेंट करना है, पति की मौत के बाद कैसे महिलाएं अपने आप को सशक्त करें। यानी कैसे महिलाओं को फाइनेंसशियली रिच किया जाए। एक रात पहले टारगेट तय करती थी, 10 घंटे में कोर्स कवर खास बात ये रही कि साक्षी ने बिना कोचिंग यूपीएससी की तैयारी को पूरा किया। उन्होंने बताया कि एक रात पहले टारगेट बना देती थी कि मुझे अगले दिन क्या करना है और कितना पढ़ना है। इसके बाद 10 घंटे में उस कोर्स को पूरा कर देती थी। साक्षी ने बताया कि मुझे गार्डनिंग और वॉकिंग का काफी शौक है। स्ट्रेस मिटाने के लिए मैं इन दोनों एक्टिविटी पर फोकस करती हूं। डीग के इंशा खान पांच बार फेल हुए, रिजल्ट देख भाई रोने लगे 30 साल के इंशा खान को यह सफलता अपने छठे अटेम्प्ट में मिली है। इससे पहले वह पांच बार मेन्स में फेल हुए और एग्जाम क्लियर नहीं कर पाए थे। रिजल्ट जारी होने के बाद परिवार में खुशी का माहौल रहा और उनके बड़े भाई भावुक हो गए। खान ने बताया कि ने 12वीं तक पढ़ाई उन्होंने फिरोजपुर झिरका से की। इसके बाद उन्होंने NIT कुरुक्षेत्र से बीटेक किया था। पढ़ाई के दौरान उनका कैंपस सिलेक्शन हो गया और उन्हें टाटा कंपनी में नौकरी मिल गई थी। उनके भाई मुख्तियार खान साल 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। उस चुनाव में वह दूसरे नंबर पर रहे थे। कोटा के माधवेंद्र से इंटरव्यू में पूछा- नाम के आगे क्या लगाना पसंद करोगे IAS या IPS कोटा के माधवेंद्र प्रताप सिंह ने 153वीं रैंक हासिल की है। माधवेंद्र ने भास्कर से बातचीत में इंटरव्यू से जुड़े अनुभव बताए। उन्होंने बताया- मेरे पिता रेलवे में जॉब करते हैं। इसलिए मुझसे रेलवे से जुड़े सवाल पूछे गए। वहीं किसानों पर भी सवाल पूछे। इंटरव्यू के दौरान लोकसभा चल रही थी तो चुनाव प्रक्रिया से संबंधित सवाल पूछे गए। उन्होंने कहा- सबसे इंटरेस्टिंग सवाल मुझसे पूछा कि आप अपने नाम के आगे क्या देखना चाहते हो IAS या IPS… नेम प्लेट मन में बनाना जरूरी है या घर के बाहर बनाना ज्यादा जरूरी है। ज्यादा मुश्किल कहां होता है। मैंने जवाब दिया- मन में बनाना ज्यादा मुश्किल होता है। वो मेहनत से बनती है। माधवेंद्र ने बताया- कोटा कोचिंग के बारे में भी पूछा कि कोचिंग इंडस्ट्री का क्या करना चाहिए? बंद करना चाहिए? आपके हिसाब से क्या होना चाहिए। गणित और प्रशासनिक सेवाओं को जोड़कर सवाल पूछा गया। भ्रष्टाचार को कम करने के लिए आप अपने क्षेत्र में क्या करेंगे, क्या कदम उठाएंगे। चार अटेम्प्ट में प्री भी क्लियर नहीं हुआ था, अब सिलेक्शन
माधवेंद्र को 5वें प्रयास में सफलता मिली है। इससे पहले 4 प्रयास में प्री ही क्लियर हुआ था। माधवेंद्र के पिता नरेंद्र प्रताप सिंह रेलवे में जॉब करते हैं। वे सवाई माधोपुर में चीफ टिकट इंस्पेक्टर (CTI) हैं। मां रेनू सिंह हाउस वाइफ हैं। माधवेंद्र ने 2016 से 2020 तक आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया। इसके बाद एक साल मुंबई में रहकर जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी में टेक्निकल इंजीनियरिंग पोस्ट पर जॉब की। एक लाख रुपए महीने सैलरी थी। वर्ष 2021 में जॉब छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की। सिविल सर्विसेज में जाने का ख्याल कॉलेज के आखिरी 2 साल में आया था। अब सफलता मिली। माधवेंद्र ने बताया- मेरी पब्लिक डीलिंग ज्यादा थी। साथ ही जॉब करते समय मुझे लगा कि सिविल सर्विसेज में जाकर बहुत कुछ किया जा सकता है। चार प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बावजूद मन में कभी सिविल सर्विसेज छोड़ने का ख्याल नहीं आया। मेरा एक ही फोकस था। या तो सिविल सर्विसेज क्लियर करूंगा या वापस प्राइवेट सेक्टर में जाऊंगा। जब मैं दोस्तों और दूसरों को देखता था कि सब सक्सेसफुल हैं, आगे बढ़ रहे हैं। चार साल तक मोबाइल से दूरी बनाए रखी
माधवेंद्र ने बताया- विश्वास के साथ अपना फोकस रखता था। मम्मी-पापा और दोस्तों का सपोर्ट मिला। मेरे मन में था कि मुझे यह करना ही है और मैंने किया। मैंने तैयारी कोटा से की है। कोचिंग से ऑनलाइन टेस्ट ले रखे थे, वो टेस्ट देता था। इंटरव्यू की तैयारी के लिए दिल्ली चला गया। वहां कोचिंग में करीब 1 महीने तक मॉक इंटरव्यू दिए। सुबह उठकर 15 मिनट में स्टडी टेबल पर बैठ जाता था। दिन के 8 घंटे पढ़ाई की। मेंस में 11-12 पढ़ाई की। पिछले चार साल से मोबाइल से दूरी बनाए रखी। समय मिलने पर मूवी देखता, गाने सुनता था। बूंदी के CA सौरभ को पांचवें अटेम्प्ट में मिली सक्सेस बूंदी निवासी सौरभ शर्मा ने 146वीं रैंक हासिल की। सौरभ की पढ़ाई जोधपुर में हुई है। उन्हें 5वें प्रयास में यूपीएससी में सफलता मिली। इससे पहले तीन प्रयास में प्री क्लियर किया, एक में मेन क्लियर हुआ। सौरभ ने बताया कि सिविल सर्विसेज के बारे में साल 2021 में टीचर क्षितिज महर्षि ने बताया था। उन्होंने बताया था कि इसके जरिए समाज सेवा, देश सेवा, नीति निर्माण में योगदान, लोगों के जीवन को बदल सकते हैं। तब मुझे लगा UPSC की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने बताया- मैंने साल 2021 में CA क्लियर किया था। दो इंश्योरेंस कंपनियों में जॉब का ऑफर था। लेकिन जॉब करने की बजाय मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। चार प्रयासों में सफलता नहीं मिली। जब सफलता नहीं मिलती तो कभी-कभी नर्वसनेस लगता है। थोड़े व्याकुल हो जाते हो, लेकिन जब लक्ष्य आपके सामने हो तो लक्ष्य निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मेरे साथ भी यही हुआ। जब भी मुझे थोड़ी निराशा हुई। तब मैं अपने लक्ष्य के बारे में सोचता था। तीसरे प्रयास में मेन्स में कम नंबर आए थे। इसके बाद मुझे राइटिंग की काफी प्रैक्टिस करनी पड़ी। लेखन शैली में सुधार लाना पड़ा। 5वें प्रयास में मेन्स के बाद सितंबर 2025 में अहमदाबाद EFPO में अकाउंट ऑफिसर पद पर जॉब लग गई थी। सौरभ ने बताया- मैंने पढ़ाई के लिए कोचिंग नहीं की, लेकिन कुछ कोचिंग से टेस्ट सीरीज जॉइन की। इंटरव्यू तैयारी के लिए कुछ कोचिंग में जाकर मॉक इंटरव्यू दिए थे। घर पर ही पढ़ाई की। पढ़ाई के अलावा योग करना, गिटार बजाना, गाने सुनना और बर्ड वॉचिंग में टाइम स्पेंड करता हूं। ‘1857 की क्रांति पहला स्वतंत्रता संग्राम था या सिपाहियों का विद्रोह’ सौरभ ने बताया- मेरा बैकग्राउंड कॉमर्स सब्जेक्ट से है, लेकिन इंटरव्यू के दौरान पहला सवाल 1857 क्रांति के बारे में पूछा गया। यह क्रांति के विभिन्न पहलुओं पर था। मुझसे पूछा गया कि कुछ लोग इसे पहला स्वतंत्रता संग्राम कहते हैं। कुछ लोग इसे सिपाहियों का विद्रोह बताते हैं, यह विरोधाभास क्यों है? मैंने इसके बारे में पढ़ा हुआ था तो मैंने जवाब दे दिया। इतिहास पर भी प्रश्न पूछा। इसके अलावा कॉमर्स और राजस्थान से जुड़े सवाल भी पूछे गए। … UPSC रिजल्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… AIIMS जोधपुर के 4 पूर्व छात्रों का UPSC में चयन:डॉ. अनुज अग्रवाल ने किया टॉप; संस्थान ने कहा-ये उपलब्धियां समुदाय के लिए प्रेरणा राजस्थान के डॉ. अनुज अग्निहोत्री बने UPSC टॉपर:पहले प्रयास में बने थे दिल्ली में SDM; दूसरे प्रयास में इंटरव्यू क्लियर नहीं हुआ था


