छत्तीसगढ़ में 15 लाख से अधिक स्कूलों, 96 लाख शिक्षकों और 26 करोड़ छात्रों के डेटा का उपयोग करने वाला विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप न्यायालयीन विवादों में पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने एक शिक्षक की याचिका पर VSK ऐप को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। जस्टिस एनके चंद्रवंशी के इस आदेश के बाद याचिकाकर्ता शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन को ऐप इंस्टॉल करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। साथ ही याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी रोक रहेगी। फिलहाल हाईकोर्ट का ये आदेश कोर्ट ने सिर्फ याचिकाकर्ता शिक्षक के संदर्भ में ही जारी किया गया है, इसका लाभ अन्य शिक्षकों को भी मिलेगा या नहीं, ये अभी साफ नहीं है। दरअसल, शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने VSK ऐप की अनिवार्यता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया, कि सरकार किसी भी थर्ड पार्टी ऐप को शिक्षकों पर जबरन लागू नहीं कर सकती। उन्होंने इसे शिक्षकों की निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि शिक्षकों के व्यक्तिगत मोबाइल फोन का उपयोग शासकीय कार्यों के लिए बाध्यकारी रूप से नहीं कराया जा सकता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तर्कों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत जवाब पेश करने कहा है। टीचर ने खुद की केस की पैरवी मामले में याचिकाकर्ता कमलेश सिंह बिसेन ने खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया, कि याचिका में दो प्रमुख मुद्दों को उठाया गया है। पहला, शिक्षकों की निजता का प्रश्न और दूसरा, निजी संसाधनों के अनिवार्य उपयोग का विषय। उनके अनुसार, यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय है। जानिए क्या है VSK ऐप विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) 15 लाख से अधिक स्कूलों, 96 लाख शिक्षकों और 26 करोड़ छात्रों के डेटा का उपयोग करके, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा विश्लेषण के माध्यम से शिक्षा गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी करने वाला एक अभिनव केंद्र है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कार्यरत है, जो 50 मीटर की जियो-फेंसिंग तकनीक से शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करता है।


