अंग्रेजों ने 1818 में नागपुर राज्य के भोसला शासक से छत्तीसगढ़ क्षेत्र का प्रबंधन पहली बार अपने हाथों लिया। लेकिन 1830 में भोसला शासक ने प्रबंधन वापस ले लिया। फिर जब 1854 में नागपुर राज्य का कोई वारिस नहीं रहा तो अंग्रेजों ने पूरा राज्य हड़प लिया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ क्षेत्र पर अंग्रेजों ने अपना अधिकार जमा लिया और इसे एक सूबा घोषित किया। छत्तीसगढ़ सूबे का मुख्यालय बना रायपुर। अपने प्रशासन को चुस्त बनाने के लिए अंग्रेजों ने छत्तीसगढ़ को सूबे के स्थान पर एक कमिश्नरी अर्थात संभाग घोषित कर दिया। यह उल्लेखनीय है कि जब रायपुर संभाग बनाया गया तो बस्तर क्षेत्र का प्रशासन भी उसी के अधीन रखा गया। 1856 में बनीं तीन तहसीलें
सन् 1856 में रायपुर कमिश्नरी के अंतर्गत पहली बार रायपुर, धमतरी और बिलासपुर में तहसील स्थापित की गई। अगले साल दुर्ग में भी तहसील बनाई गई। इधर जैसे-जैसे छत्तीसगढ़ में अपने प्रशासन के आयाम को अंग्रेज बढ़ा रहे थे वैसे-वैसे उन्हें छत्तीसगढ़ को अलग-अलग जिलों में बांटने की आवश्यकता महसूस हुई। इस प्रक्रिया में पहली बार 1861 में रायपुर को एक जिला घोषित किया गया और बिलासपुर क्षेत्र को अलग कर उसे भी जिले का दर्जा दिया गया। इसी क्रम में 1863 में रायपुर जिले में सिमगा तहसील बनाई गई। और रायपुर जिला चार तहसीलों- रायपुर, धमतरी, दुर्ग और सिमगा तहसीलों- वाला जिला बन गया। खारून नदी और जोंक नदी के बीच आने वाले क्षेत्र तथा शिवनाथ नदी और महानदी के दक्षिण का संपूर्ण खालसा क्षेत्र तथा जमींदारियों को रायपुर जिले में शामिल किया गया। इसके तहत चंद्रपुर, पदमपुर और मालखरौदा जमींदारियां रायपुर से बिलासपुर जिले में चली गई और सोनाखान, सरसीवां, भटगांव, बिलाईगढ़ और कटगी जमीदारियां बिलासपुर से रायपुर जिले में आ गयीं। सोनाखान जमींदारी की पहचान वीरनारायण सिंह के बलिदान के साथ जुड़ी है। 1906 में बना दुर्ग जिला
भारत के राजनीतिक इतिहास की एक बड़ी घटना के रूप में 1905 में बंगाल प्रांत का भूगोल बदल दिया गया। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अंतर्गत आने वाले संबलपुर का अधिकांश भाग बंगाल (वर्तमान ओडिसा) को दिया गया। इस परिवर्तन के फलस्वरूप रायपुर और बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाली तहसीलों के क्षेत्र का पुनर्वितरण किया गया। सन् 1906 में रायपुर और बिलासपुर जिले के कुछ हिस्सों को निकालकर नया जिला दुर्ग बनाया गया। इस प्रक्रिया में रायपुर और बिलासपुर जिले के 1852 गांव दुर्ग जिले में आ गए जबकि बिलासपुर और संबलपुर के 989 गांव रायपुर जिले में आ गए। दुर्ग जिला बनने के साथ ही सिमगा तहसील समाप्त हो गई। सिमगा तहसील का पश्चिम भाग दुर्ग जिले में चला गया और उसके बचे हुए भाग तथा बिलासपुर और रायपुर के कुछ क्षेत्र मिलाकर बलौदाबाजार तहसील बना दी गई। उसी समय महासमुंद के आस-पास के क्षेत्र और देवभोग तथा सरायपाली को मिलाकर महासमंुद तहसील बनाई गई। रायपुर जिले के अंतर्गत बलौदाबाजार और महासमुंद तहसीलों का अपना महत्व शीघ्र स्थापित हो गया।


