अंतर्राष्ट्रीय साड़ी दिवस आज:आवां साड़ी का बढ़ा क्रेज; विदेशों में भी डिमांड, एक्ट्रेस और महिला अफसर भी मुरीद

आज अंतर्राष्ट्रीय साड़ी दिवस है। गुजरात की बंधनी, तमिलनाडु की कांजीवरम, शुद्ध रेशम से बनने वाली उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी की तरह टोंक की आवां साड़ी ने भी अपनी पहचान बनाई है। आवां राजस्थान तीन की उन तीन जगहों में शामिल है जहां ऐसी साडियां बनाई जाती हैं। आवां में कॉटन की हस्तनिर्मित साड़ी का नाम छह साल में ही देश की ब्रांडेड साड़ियों में शुमार जो चुका है। अब इस साड़ी की डिमांड विदेशों तक है। इस साड़ी को टीवी अभिनेत्रियों से लेकर मॉडल, आईएएस, आईपीएस महिला अधिकारी भी बेहद पसंद कर रही हैं। टेलीविजन अभिनेत्री वैशाली ठक्कर और अभिनेत्री सोनाली राउत ने भी जयपुर कूटुर शो 2022 में आवां साड़ी पहनी थी। राजस्थानी कल्चर और शुद्धता को बढ़ावा देने वाली सूती धागे के ताने-बाने से बनने वाली इस साड़ी की बनावट काफी आकर्षक और नेचुरल है। यह एक हजार से दस हजार तक की रेंज में आती है। इसे बनाने वाले 45 कारीगर को भी रोजगार मिल रहा है। दस हजार रुपए कमा रहीं महिलाएं इनमें महिलाएं भी शामिल है। गांव की महिलाएं भी इस साड़ी बनाकर हर माह करीब दस हजार रुपए कमा लेती हैं। ग्राम पंचायत मुख्यालय आवां में स्थित हथकरघा में तैयार की जाने वाली आवां साड़ी के ऑनर आशीष जैन ने बताया कि विद्याशीष हथकरघा आवां की स्थापना सात वर्ष पहले जैनाचार्य श्री विद्यासागर महाराज व परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से हुई थी। यहां विभिन्न रंगों के सूती धागों को ताने-बाने में उपयोग कर आकर्षक साड़ियां बनाने के अलावा हथकरघा के माध्यम से टॉवेल, बेडशीट, धोती, साड़ी, चादर, फैब्रिक आदि का निर्माण हो रहा है। यहां के बुनकरों में दुर्गा शंकर गुर्जर, संतोष देवी बलाई, विमला और सोनू मीणा, पारस सैनी, दशरथ सिंह, भागचंद सैनी विशेष रूप से साड़ी का निर्माण कर रहे हैं। इनको जिला और राज्य स्तरीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। आवां साड़ी को विशेष रूप से अलग-अलग कलर के धागों का उपयोग करते हुए बनाया जाता है जिसमें विशेष रूप से धागे कॉटन और कुछ लिनन के भी उपयोग किए जाते हैं। डबल स्ट्राइप में ये साड़ी होती है और इसमें जरी का उपयोग भी बॉर्डर और बूटी डालने में किया जाता है जो इसे और सुंदर बनाती है। इसमें बूटी में प्रकृति के फूल, पत्तियां, स्मारक के चिन्ह आदि हाथ से बनाए जाते हैं। कुछ प्लेन साड़ी भी बनाकर उन पर प्रिंट किया जाता है जिससे अलग वैरायटी हो सके। कोलकात्ता, बेंगलुरु तक जाती है ये साड़ी आवां साड़ी की बिक्री कोलकात्ता, बेंगलुरु तक होती है। आवां साड़ी के कलर डिजाइन और बारीक बनावट को देखकर अनेक राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारी भी इनकी प्रशंसा करते हैं, क्योंकि इनके धागे की जो क्वालिटी मर्सराइज्ड कॉटन होती है जो इनको और चमक देती है। साथ ही नेचुरल डाई का भी यहां उपयोग किया जाता है। जिससे रंगे धागों से भी साड़ी बनाई जाती है। आवां साड़ी का जयपुर में भी अनेक बार फैशन शो के माध्यम से प्रचार किया गया है जिसमें इस साड़ी को सभी ने सराहा है। जयपुर कूटुर शो, नवेश्रीति फैशन शो, मेरा देश मेरी माटी आदि मुख्य शो में इसको प्रमोट किया गया है।जवाहर कला केंद्र जयपुर द्वारा आयोजित अतुल्य अगस्त में विरासत से विकास उत्सव में आवां साड़ी को प्रमोट किया।

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