राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अंबेडकर अस्पताल में एक्सरे जांच के लिए मरीजों को रोजाना घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है। रेडियोलॉजी विभाग की ज्यादातर मशीनें बंद पड़ी हैं, जिससे जांच की गति बेहद धीमी हो गई है। गरीब और दूर-दराज से आए मरीज मुफ्त इलाज के लिए लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन मशीन की खराबी के कारण अक्सर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार रोजाना करीब 200 से 300 मरीज एक्सरे कराने पहुंचते हैं। यहां कुल पांच मशीनें हैं, लेकिन सभी पुरानी और एक्सपायरी हो चुकी हैं। इन्हें बार-बार रिपेयर करके चलाया जा रहा है। फिलहाल चार मशीनें पूरी तरह बंद हैं और एकमात्र मशीन से ही काम चल रहा है। मशीन के बार-बार बंद होने पर इलेक्ट्रिशियन बुलाना पड़ता है और फॉल्ट ढूंढने में इतना वक्त लग जाता है कि ओपीडी का समय ही खत्म हो जाता है। नतीजतन, मरीजों को अगले दिन फिर से आना पड़ता है। मौके पर टीम ने लिया जायजा
शनिवार को भास्कर की टीम जब एक्सरे यूनिट पहुंची, तो रुम नंबर 5 के बाहर लंबी लाइन लगी हुई थी। बाकी कमरे बंद थे। कुछ मरीज व्हीलचेयर पर तो कुछ बेंच पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। भीड़ बढ़ने पर वहां बहस की नौबत भी आ गई। एक मरीज अपने पिता की हालत बिगड़ने का हवाला देकर जल्दी एक्सरे की मांग कर रहा था, लेकिन स्टाफ का कहना था कि पर्ची जमा है, नंबर आने पर ही जांच होगी। गुढ़ियारी से आए विकास ने बताया कि वह अपने पिता को पैर दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल लाया है। डॉक्टर ने एक्सरे की सलाह दी, लेकिन सुबह 10 बजे से लाइन में खड़े होने के बावजूद 11.30 बजे तक भी जांच नहीं हो सकी। विकास ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है। रोजाना होता है विवाद
एक्सरे यूनिट के बाहर आए दिन ऐसी नोकझोंक देखने को मिलती है। बीते दिनों एक युवती और एक्सरे टेक्नीशियन के बीच विवाद हो गया था। युवती का आरोप था कि टेक्नीशियन ने उसकी पर्ची लंबे समय तक नहीं ली, जबकि टेक्नीशियन का कहना था कि वह खुद को पत्रकार बताकर पहले जांच कराना चाहती थी।
एडवांस मशीन भी खराब
एक्सरे यूनिट में एक एडवांस मशीन भी रखी गई है। लेकिन वह अब तक चालू भी नहीं हो पाई है। 3 साल पहले इस मशीन को इंस्टॉल किया गया था। लेकिन अब तक उसकी शुरुआत भी नहीं हो पाई है। मरीजों को भी इसका फायदा नहीं हो पा रहा है। पुरानी मशीनों से ही काम चलाया जा रहा है। जल्द सुधारी जाएंगी मशीनें
तकनीकी खराबियों के चलते मशीनें बंद हैं। जल्द ही मशीनों को सुधार कर शुरू कर दिया जाएगा। – एसएसबी नेताम, रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष


