पंजाब में सियासत को चौंकाने वाली नई खबर सामने आई है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष व पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल शुक्रवार को अचानक किसान नेता बलवीर राजेवाल के घर पहुंच गए। यहां उनके बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। इस दौरान पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका भी मौजूद रहे। इस मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि किसान नेता प्रदेश की मौजूदा AAP सरकार के रवैये से नाराज हैं। सीएम भगवंत मान कई बार किसानों के रोड जाम करने को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं। इसके अलावा पंजाब पुलिस ने ही शंभू बॉर्डर पर लगाए किसानों के धरने को जबरन हटाया था। मीटिंग के बाद दोनों नेताओं ने क्या कहा… सुखबीर बोले- सेहत का हाल जानने आया
मीटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए सुखबीर बादल ने कहा कि वे बलबीर सिंह राजेवाल की सेहत का हाल जानने आए थे। राजेवाल के उनके पिता प्रकाश सिंह बादल से करीबी संबंध थे। जब भी खेतीबाड़ी या पंजाब को लेकर कोई राय लेनी होती थी तो पिता प्रकाश सिंह बादल उनसे बात करते थे। मैं भी खेतीबाड़ी को लेकर चर्चा करने आया कि कैसे खेतीबाड़ी को मुनाफे का धंधा बनाया जा सकता है। कैसे पंजाब को बचाया जा सकता है। सुखबीर ने कहा कि राजेवाल खेतीबाड़ी की नालेज का खजाना हैं, इनसे कुछ सीखने आए थे। कोई सियासी चर्चा नहीं हुई। राजेवाल बोले- अलग अकाली दल टूटने, नया बनने पर चर्चा हुई
किसान नेता बलबीर राजेवाल ने कहा कि यह निजी मुलाकात थी। इस दौरान पंजाब की क्षेत्रीय पार्टी अकाली दल के टूटने और अलग अकाली दल बनने पर मैंने यह राय जरूर दी कि किसी न किसी तरह दोनों पार्टियां एकजुट हो। इसके अलावा इस मीटिंग में कोई सियासी चर्चा नहीं हुई। अकाली दल 10 साल से राजनीति के हाशिए पर
इस मुलाकात के पीछे अकाली दल की मंशा किसानों के जरिए गांवों में फिर पैठ बनाने की मानी जा रही है। अकाली दल ने 2007 से लेकर 2017 तक लगातार 2 बार पंजाब में सरकार बनाई। हालांकि इस दौरान भाजपा के साथ उनका गठबंधन रहा। मगर, अब यह गठजोड़ टूटा हुआ है। इसके बाद से अकाली दल लगातार पंजाब में सियासत के हाशिए पर पहुंचा हुआ है। प्रदेश में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और गोलीकांड के मुद्दे को लेकर पंजाब के ग्रामीण अभी भी अकाली दल से नाराज हैं। राजेवाल किसान आंदोलन के नेता रहे, चुनाव भी लड़ चुके
वहीं, बलवीर राजेवाल ने भी 2020-21 में दिल्ली बॉर्डर पर हुए किसान आंदोलन की अगुआई की थी। इसके बाद उन्होंने संयुक्त समाज मोर्चा के नाम से पार्टी बनाकर 2022 में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ा था। जिसका सीएम चेहरा भी राजेवाल थे। हालांकि उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई।


