अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने पीएम को लिखा पत्र:वीवीआईपी दर्शन के नाम पर पुजारियों को गर्भग्रह से बाहर करने पर आपत्ति, कहा- ये अत्याचार

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने मंदिरों में वीवीआईपी दर्शन के दौरान अपनाए जा रहे प्रोटोकॉल पर कड़ी आपत्ति जताई है। महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश के सभी मंदिरों और देवालयों में वीआईपी प्रथा समाप्त करने और वीआईपी प्रवेश को प्रतिबंधित करने के लिए कानून बनाने की मांग की है। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी और राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि वीआईपी दर्शन के नाम पर मंदिरों में सेवा देने वाले पुजारियों, सेवादारों और संतों को बाहर किया जाना सनातन परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां इस तरह की घटनाएं अधिक देखने को मिल रही हैं। बांके बिहारी मंदिर और शंकराचार्य विवाद का जिक्र महासंघ ने पत्र में हाल ही में उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में हुए विवाद का उल्लेख किया। आरोप है कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के दौरे के दौरान सुरक्षा के नाम पर मंदिर के पुजारियों, सेवादारों और उनके परिवार की महिलाओं को रोका गया, अपमानित किया गया और पुलिस बल का प्रयोग कर खदेड़ा गया। महासंघ ने इसे सनातन धर्म में सीधा हस्तक्षेप बताया। इसके साथ ही प्रयागराज में सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्माधिकारी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुई कथित अभद्रता का भी उल्लेख किया गया। पत्र में कहा गया कि उन्हें स्नान करने से रोका गया, बटुकों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और संतों को अपमानित किया गया। इसी तरह कुछ दिन पहले प्रदेश के नलखेड़ा स्थित बगलामुखी माता मंदिर में अधिकारियों द्वारा ब्राह्मणों और पुजारियों को हवन-पूजन से रोके जाने का आरोप भी लगाया गया है। सीएम योगी से सवाल अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करते हुए कहा है कि यदि भविष्य में किसी अन्य दल का मुख्यमंत्री गोरखपुर पीठ में दर्शन करने जाए और सुरक्षा के नाम पर मठ के सेवादारों और संतों को बाहर किया जाए, जैसा कि वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में हुआ, तो क्या इसे स्वीकार किया जाएगा? महासंघ ने मांग की है कि मंदिरों में सभी भक्तों के लिए समान व्यवस्था हो और वीआईपी संस्कृति को समाप्त कर सनातन परंपराओं और पुजारियों के सम्मान की रक्षा की जाए।

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